सहरसा अस्पताल प्रबंधक की नियुक्ति पर फिर उठे सवाल, 2019 की विभागीय जांच रिपोर्ट चर्चा में
फोटो - अस्पताल प्रबंधक | Prabhat Khabar Network
सहरसा मॉडल सदर अस्पताल में प्रबंधक की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। 2019 की विभागीय जांच रिपोर्ट में योग्यता और चयन प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां दर्ज थीं।
सहरसा. जिला स्वास्थ्य समिति, सहरसा में डीपीएम के प्रभार और प्रशासनिक फैसलों को लेकर चल रही चर्चा के बीच मॉडल सदर अस्पताल की अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी की नियुक्ति और पदस्थापन का मामला भी सवालों के घेरे में आया है. वर्ष 2019 की एक विभागीय जांच रिपोर्ट और तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पूर्णिया की ओर से स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए पत्र के सामने आने के बाद उनकी चयन प्रक्रिया को लेकर नए सिरे से सवाल उठाए जा रहे हैं.
उपलब्ध विभागीय पत्र के अनुसार पूर्णिया सदर अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक पद पर सिंपी कुमारी के चयन के विरुद्ध शिकायत की जांच के लिए एक समिति गठित की गयी थी. जांच समिति की रिपोर्ट की कंडिका-07 में शिकायत को सही पाए जाने का उल्लेख किया गया था. इसके बाद तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पूर्णिया ने प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी.
चयन के समय योग्यता और अभिलेखों को लेकर उठी थी आपत्ति
विभागीय पत्र में अस्पताल प्रबंधक पद के लिए जारी विज्ञापन का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट की डिग्री और दो वर्ष की इंटर्नशिप अनिवार्य योग्यता थी. जांच के दौरान इससे संबंधित आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की बात रिपोर्ट में दर्ज किए जाने का उल्लेख है.
पत्र के अनुसार चयन के समय विज्ञापन में निर्धारित शर्तों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेजों की जांच नहीं की गयी थी. जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित था कि यदि निर्धारित अर्हता के अनुसार अभिलेखों की जांच की जाती तो चयनित अभ्यर्थी की पात्रता को लेकर सवाल उठ सकते थे.
अन्य अभ्यर्थियों के चयन को लेकर भी रिपोर्ट में टिप्पणी
उपलब्ध विभागीय पत्र में अन्य अभ्यर्थियों के चयन का भी उल्लेख किया गया है. इसमें वांछित अनुभव अथवा इंटर्नशिप नहीं होने के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों के चयन नहीं किए जाने की बात दर्ज थी.
इसी आधार पर जांच रिपोर्ट में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए जाने का उल्लेख है. हालांकि वर्ष 2019 की जांच के बाद इस मामले में सक्षम प्राधिकार की ओर से क्या अंतिम निर्णय लिया गया, इसकी स्थिति संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी.
चयन प्रक्रिया में शिथिलता की टिप्पणी का भी उल्लेख
तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पूर्णिया की ओर से स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए पत्र में चयन प्रक्रिया में कथित शिथिलता बरते जाने का भी उल्लेख था. पत्र में सिंपी कुमारी का चयन दबाव में किए जाने संबंधी टिप्पणी दर्ज होने की बात सामने आयी है. हालांकि इस टिप्पणी को अंतिम निष्कर्ष के रूप में देखे जाने से पहले विभागीय अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी की ओर से की गयी अंतिम कार्रवाई का सत्यापन जरूरी है.
सहरसा में पदस्थापन के बाद उठे पुराने सवाल
अब मुख्य सवाल यह उठ रहा है कि वर्ष 2019 की जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागीय पत्र के बाद सिंपी कुमारी को मॉडल सदर अस्पताल, सहरसा में अस्पताल प्रबंधक की जिम्मेदारी किस प्रक्रिया और आदेश के आधार पर दी गयी.
यह भी सवाल है कि पदस्थापन से पहले उनकी शैक्षणिक योग्यता, हॉस्पिटल मैनेजमेंट की डिग्री, इंटर्नशिप और अनुभव से संबंधित मूल अभिलेखों का दोबारा सत्यापन किया गया था या नहीं. यदि वर्ष 2019 की जांच में दर्ज आपत्तियों का बाद में समाधान हो गया था तो उससे संबंधित विभागीय रिकॉर्ड क्या है, यह भी स्पष्ट किया जाना बाकी है.
डीपीएम प्रभार विवाद के बीच मामला फिर चर्चा में
जिला स्वास्थ्य समिति में डीपीएम के प्रभार को लेकर पिछले दिनों विवाद सामने आया था. स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों के एक समूह की ओर से तत्कालीन फैसलों पर सवाल उठाए जाने के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा शुरू हुई. इसी दौरान अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी को मिली विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठने लगे. अब वर्ष 2019 की जांच रिपोर्ट से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद नियुक्ति और पदस्थापन का पुराना मामला भी चर्चा में आ गया है.
स्वास्थ्य विभाग से आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग
मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला स्वास्थ्य समिति, सहरसा से यह स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि सिंपी कुमारी को मॉडल सदर अस्पताल में अस्पताल प्रबंधक की जिम्मेदारी किस आदेश और प्रक्रिया के तहत दी गयी. इसके साथ ही पदस्थापन के समय किन दस्तावेजों का सत्यापन किया गया और क्या पूर्णिया की वर्ष 2019 की जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया गया था, इसकी जानकारी भी मांगी जा रही है. मॉडल सदर अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्था में प्रशासनिक जिम्मेदारी वाले पद पर नियुक्ति और पदस्थापन की प्रक्रिया पारदर्शी होना जरूरी है. ऐसे में वर्ष 2019 की विभागीय जांच में उठाए गए सवालों पर स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अंतिम स्थिति सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.
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