पत्रकार से मारपीट के बाद डॉक्टर SK Azad का पुराना कांड वायरल! 2018 में चाकूबाजी के पीड़ित के पेट में छूटा था चाकू
सांकेतिक तस्वीर
सहरसा सदर अस्पताल के डॉ. एसके आजाद एक बार फिर चर्चा में हैं. वर्ष 2018 का एक पुराना मामला, जिसमें एक मरीज के पेट में चाकू का टुकड़ा छूटने का आरोप था, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. यह मामला अब क्यों चर्चा में आया है और तब क्या हुआ था, जानें पूरी कहानी.
सहरसा. सहरसा सदर अस्पताल के डॉक्टर एसके आजाद से जुड़ा वर्ष 2018 का एक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मामले में इलाज में कथित लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आरोप है कि जून 2018 में चाकूबाजी की घटना में घायल एक मरीज को इलाज के बाद ठीक बताकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी थी, लेकिन बाद में निजी क्लिनिक में जांच कराने पर उसके शरीर में चाकू का टुकड़ा मौजूद होने की बात सामने आयी थी.
जमीन विवाद में चाकूबाजी में हुई थी एक की मौत
जानकारी के अनुसार 23 जून 2018 को सहरसा के सिटानाबाद में जमीन विवाद को लेकर चाकूबाजी की घटना हुई थी. इस घटना में मोहम्मद ओहैब की मौत हो गयी थी, जबकि मोहम्मद सोहेब घायल हुए थे.घायल सोहेब का इलाज सहरसा सदर अस्पताल में कराया गया था. आरोप है कि 10 जुलाई 2018 को उन्हें ठीक बताते हुए अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी थी.
लगातार पेट दर्द के बाद निजी क्लिनिक में करायी जांच
परिजनों के अनुसार अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी सोहेब के पेट में लगातार दर्द बना रहा. इसके बाद उन्होंने एक निजी क्लिनिक में चिकित्सकीय जांच करायी. परिजनों के अनुसार जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारी सामने आयी. उनका दावा है कि रिपोर्ट में मरीज के मलद्वार के पास करीब चार से पांच इंच लंबा चाकू मौजूद होने की बात सामने आयी थी. इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री के आधार पर नहीं हुई है.
डॉक्टर के खिलाफ सिविल सर्जन से की गयी थी शिकायत
मामले को लेकर उस समय डॉक्टर एसके आजाद के खिलाफ सिविल सर्जन से शिकायत किए जाने की बात कही गयी है. परिजनों और विभिन्न संगठनों की ओर से मामले को लेकर विरोध भी किया गया था. शिकायतकर्ताओं के अनुसार मामले को लेकर एसपी और डीएम से भी शिकायत की गयी थी. वहीं कई संगठनों ने विरोध मार्च निकालकर कार्रवाई की मांग की थी.
नोट: प्रभात खबर इस वायरल/पुरानी घटना की पुष्टि नहीं करता.
कलेक्ट्रेट के सामने भी हुआ था प्रदर्शन
मामले में मरीज के परिजनों की ओर से वर्ष 2018 में सहरसा कलेक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन किए जाने का भी दावा किया गया है. प्रदर्शन के दौरान इलाज में कथित लापरवाही की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठायी गयी थी. हालांकि उपलब्ध जानकारी में उस समय शिकायतों पर हुई अंतिम प्रशासनिक या चिकित्सकीय कार्रवाई का स्पष्ट विवरण नहीं है.
पुराने मामले के फिर सामने आने से उठे सवाल
सहरसा सदर अस्पताल के डॉक्टर एसके आजाद से जुड़े हालिया विवाद के बीच वर्ष 2018 का यह मामला सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में आया है. ऐसे में पुराने मामले की शिकायत, उस समय हुई जांच और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड को सामने लाने की मांग भी उठ सकती है. पुराने मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित शिकायत, मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उस समय की प्रशासनिक कार्रवाई के दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी होगा.
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