सहरसा के रजौरा स्कूल में बच्चों ने उत्साह से मनाया पोषण माह, सीखी सेहत की बातें
फोटो - सहरसा - बच्चों को जानकारी देती प्रधान शिक्षिका व अन्य | Prabhat Khabar Network
सहरसा के प्राथमिक विद्यालय रजौरा में मूल्यांकन कार्य के बावजूद शिक्षकों ने पोषण माह का आयोजन किया. उन्होंने बच्चों को संतुलित आहार का महत्व समझाया और उन्हें सेहतमंद रहने के गुर सिखाए. यह पहल सीमित संसाधनों में भी बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य का संदेश देती है.
Saharsa News: बिहार के सहरसा जिले में स्थित प्राथमिक विद्यालय रजौरा की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली. जहां एक तरफ मूल्यांकन कार्य के कारण अधिकांश शिक्षक स्कूल से बाहर थे और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ा हुआ था, वहीं दूसरी तरफ बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सेहत को लेकर शिक्षकों का उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ. निदेशक मध्याह्न भोजन योजना और जिला शिक्षा पदाधिकारी रोहित रौशन के निर्देशानुसार विद्यालय परिसर में पोषण माह के तहत विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया. इस दौरान बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर व्यावहारिक जीवन में बेहतर खान-पान और सेहतमंद रहने के गुर सिखाए गए.
थाली में दाल, हरी सब्जी और फल: बच्चों को मिला सेहत का मंत्र
सोमवार को आयोजित इस खास कार्यक्रम के दौरान कक्षाओं का माहौल काफी जीवंत नजर आया. शिक्षकों ने बहुत ही सहज और दिलचस्प तरीके से बच्चों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार का महत्व समझाया. बच्चों को बताया गया कि रोजाना के खाने में दाल, हरी सब्जियां, दूध और मौसम के अनुसार फल शामिल करने से शरीर को कौन-कौन से आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं. इसके साथ ही जंक फूड से होने वाले नुकसान के बारे में भी जागरूक किया गया. बच्चों ने भी खेल-खेल में पोषण से जुड़ी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लिया और यह संकल्प लिया कि वे अपनी दैनिक दिनचर्या में पौष्टिक खान-पान को ही प्राथमिकता देंगे.
सीमित संसाधन और चुनौतियां, फिर भी मुस्कुराता बचपन
इस आयोजन का सबसे खास और मानवीय पहलू वह चुनौती है जिससे यह विद्यालय वर्तमान में जूझ रहा है. विद्यालय की प्रधान शिक्षिका रजनी कुमारी ने बताया कि इन दिनों राज्य भर के विद्यालयों में मूल्यांकन का कार्य चल रहा है. इस वजह से स्कूल के ज्यादातर शिक्षक मूल्यांकन कार्य के लिए बाहर तैनात हैं. इसके अलावा बचे हुए शिक्षकों पर विद्यालय की नियमित कक्षाओं के संचालन के साथ-साथ बच्चों से जुड़ी महत्वपूर्ण यूडायस (U-DISE) प्रविष्टियां पूरी करने का अतिरिक्त दबाव भी है. इसके बावजूद शिक्षकों ने यह सुनिश्चित किया कि संसाधनों या मैनपावर की कमी का असर बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी गतिविधियों पर बिल्कुल न पड़े.
इच्छाशक्ति हो तो हर बाधा पार: प्रधान शिक्षिका की प्रेरणादायक पहल
प्रधान शिक्षिका रजनी कुमारी ने कहा कि अगर मन में आत्मविश्वास हो और बच्चों के लिए कुछ बेहतर करने की सच्ची इच्छाशक्ति हो तो सीमित संसाधनों और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बीच भी सकारात्मक परिणाम दिए जा सकते हैं. उन्होंने साझा किया कि बच्चों के साथ गतिविधि आधारित कार्य करने में एक अलग ही आनंद और संतोष मिलता है. विद्यालय स्तर पर लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि बच्चों का केवल किताबी ज्ञान न बढ़े, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास हो. इस पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिक्षिका मालका परवीन, मीना कुमारी और शिक्षक जयप्रकाश मिश्रा ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बच्चों का मार्गदर्शन किया.
Saharsa News: पोषण माह का व्यापक असर और आगे की राह
जिले में नौ सितंबर से शुरू हुआ यह पोषण माह आगामी आठ अक्टूबर तक संचालित होना है. शिक्षा विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच कुपोषण से बचाव के प्रति जागरूकता फैलाना है. प्राथमिक विद्यालय रजौरा जैसी मिसालें यह साबित करती हैं कि प्रशासनिक निर्देशों का यदि धरातल पर निष्ठा के साथ पालन किया जाए, तो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी शिक्षा और स्वास्थ्य के स्तर को सुधारा जा सकता है. ऐसे आयोजनों से न केवल बच्चों की उपस्थिति में सुधार आता है बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार होता है.
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