गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मैथिली सम्मिलित

गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति राजघाट नई दिल्ली में आयोजित मलंगिया महोत्सव नामक पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में मैथिली में एक रिकॉर्ड बना.
बीएनएमयू मैथिली विभाग के डॉ केएम ठाकुर ने महेंद्र मलंगिया का लिया साक्षात्कार सहरसा. गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति राजघाट नई दिल्ली में आयोजित मलंगिया महोत्सव नामक पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में मैथिली में एक रिकॉर्ड बना. जिसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया. मैथिली के शेक्सपीयर माने जाने वाले वरेण्य नाटककार व आलोचक महेंद्र मलंगिया केंद्रित इस विराट आयोजन में इनके 35 नाटकों का मंचन, इनके साहित्य केंद्रित 25 विमर्श-सत्रों का आयोजन व पांच हजार से अधिक लेखक, साहित्यकर्मी, संस्कृतिक कर्मी शामिल हुए. इस आयोजन में भारत एवं नेपाल के लेखक, साहित्यकार, रंगकर्मी गण भी मौजूद थे. जेएनयू, बीएचयू, एएमयू, पीयू जैसे विश्वविद्यालय के ख्यातिलब्ध विद्वान भी मौजूद थे. इस आयोजन में बीएनएमयू मधेपुरा के विश्वविद्यालय मैथिली विभाग के प्रोफेसर डॉ कृष्ण मोहन ठाकुर की भूमिका भी महत्वपूर्ण थी. विश्व के किसी भी देश में एवं किसी भी देश के भाषा-साहित्य में, किसी एक नाटककार केंद्रित ऐसा विराट आयोजन व एक नाटककार के इतने नाटकों का एक साथ मंचन आज तक नहीं हुआ था. इस आयोजन में महेंद्र मलंगिया ने पांच सौ से अधिक रचनाकारों को, नाट्यलेखन के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग प्लान वाले सत्र में संबोधित किया. जिसे गिनीज बुक कमेटी के सदस्यों ने प्रत्यक्ष देखा एवं उसे अभिलेखित भी किया. विश्वस्तरीय महत्व के इस आयोजन में गिनीज बुक बालों के सामने महेंद्र मलंगिया की लेखन-यात्रा वाले सत्र में उनसे बातचीत करने के लिए, उनका साक्षात्कार लेने के लिए डॉ ठाकुर को ही चयनित किया गया था. वे मलंगिया के विराट साहित्य से भली-भांति परिचित थे. डॉ ठाकुर सहित संपूर्ण बीएनएमयू के लिए यह एक अप्रत्याशित अभूतपूर्व उपलब्धि है. गिनीज बुक वालों के समक्ष संपन्न हुए इस सत्र को अपार सफलता मिली एवं मैथिली की इस उपलब्धि को गिनीज बुक में भी दर्ज किया गया. गिनीज बुक के इस विश्व रिकार्ड में डॉ ठाकुर द्वारा लिये गये महेंद्र मलंगिया के साक्षात्कार को भी अंकित किया गया है. इस आयोजन का महत्व जितनी डॉ ठाकुर के लिए है, उससे कई गुना अधिक मैथिली के लिए महत्वपूर्ण है. मैथिली को मिली इस उपलब्धि से मिथिला सहित बिहार एवं भारतवर्ष का भी मान उन्नत हुआ है. मैथिली को प्राप्त इस उपलब्धि से यहां के लेखकों, साहित्यकारों में खुशी की लहर दिख रही है. इस उपलब्धि के लिए स्थानीय साहित्यकार डॉ राम चैतन्य धीरज, अरविंद नीरज, शैलेंद्र शैली, मुख्तार आलम, डॉ निक्की प्रियदर्शिनी, विजय झा सहित अन्य लोगों ने महेंद्र मलंगिया को बधाई दी है.
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