कोसी तटबंध की जमीन पर दो मंजिला कॉमर्शियल भवन, नोटिस बेअसर, अब पुलिस-मजिस्ट्रेट के साथ होगी कार्रवाई
कोसी पूर्वी मुख्य तटबंध पर अतिक्रमण कर बना कॉमर्शियल दो मंजिला भवन | Prabhat Khabar Network
कोसी पूर्वी तटबंध पर दो मंजिला व्यावसायिक भवन के अवैध निर्माण ने प्रशासन को सख्ती करने पर मजबूर कर दिया है. एक माह पहले नोटिस के बावजूद अतिक्रमण खाली न होने पर अब पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की मांग की गई है.
Kosi Embankment Encroachment: नवहट्टा. कोसी नदी के दबाव और बाढ़ के खतरे से लोगों की रक्षा करने वाले पूर्वी मुख्य तटबंध पर ही दो मंजिला व्यावसायिक भवन खड़ा कर दिया गया. नौलखा से उत्तर मुख्य तटबंध पर बने ऐसे छह अतिक्रमणों के खिलाफ अंचल प्रशासन ने करीब एक माह पहले नोटिस चिपकाया था. लेकिन नोटिस की अवधि बीतने के बाद भी अतिक्रमित जमीन खाली नहीं की गयी.
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अब प्रशासन ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है. अंचल अधिकारी की ओर से जिला और अनुमंडल प्रशासन को पत्र भेजकर पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की तैनाती की मांग की जा रही है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने की तैयारी है.
मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि यहां अतिक्रमण केवल सरकारी जमीन तक सीमित होने का आरोप नहीं है. स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण तटबंध की पिचिंग तक पहुंच गया है. ऐसे में तटबंध की सुरक्षा, आवागमन और भविष्य में बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
तटबंध पर बना दिया दो मंजिला व्यावसायिक भवन
जानकारी के अनुसार नौलखा से उत्तर कोसी पूर्वी मुख्य तटबंध पर महेश शाह समेत छह लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया है. इनमें महेश शाह द्वारा मुख्य तटबंध पर दो मंजिला व्यावसायिक भवन का निर्माण कर कारोबार किये जाने की बात सामने आयी है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक भवन इस तरह बनाया गया है कि बाहर निकलते ही तटबंध की पिचिंग शुरू हो जाती है. इससे तटबंध मार्ग से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है.
तटबंध सामान्य सड़क या खाली सरकारी जमीन नहीं है. कोसी क्षेत्र में बाढ़ और नदी के दबाव से सुरक्षा के लिहाज से इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में तटबंध की जमीन पर स्थायी और व्यावसायिक निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत और बढ़ जाती है.
एक माह पहले चिपकाया गया था नोटिस
मामला संज्ञान में आने के बाद अंचल अधिकारी मोनी बहन की ओर से अतिक्रमण वाद शुरू किया गया. इसके बाद मुख्य तटबंध पर अतिक्रमण करने वाले महेश शाह समेत छह लोगों को नोटिस दिया गया.
अंचल प्रशासन ने करीब एक माह पहले संबंधित भवनों पर नोटिस चिपकाया था. प्रशासन की ओर से जगह खाली करने की प्रक्रिया शुरू किये जाने के बावजूद अब तक अतिक्रमित स्थल खाली नहीं किया गया है.
इससे प्रशासन के सामने अब अगला कदम उठाने की स्थिति बन गयी है. नोटिस के बाद भी कब्जा बरकरार रहने से अब पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
लोगों ने उठाये अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि दो मंजिला भवन का निर्माण अचानक एक-दो दिन में नहीं हुआ. निर्माण के दौरान प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की आवाजाही भी होती रही.
ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब तटबंध की जमीन पर निर्माण हो रहा था, तब समय रहते उसे रोका क्यों नहीं गया.
स्थानीय स्तर पर कुछ लोग संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत की चर्चा भी कर रहे हैं. हालांकि, अधिकारियों की मिलीभगत का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है. इस आरोप की जांच प्रशासनिक स्तर पर होती है या नहीं, यह आगे महत्वपूर्ण होगा.
पिचिंग तक पहुंच गया निर्माण, सुरक्षा को लेकर चिंता
तटबंध की पिचिंग का काम उसकी संरचना और मजबूती से जुड़ा होता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण इस स्तर तक पहुंच गया है कि भवन से बाहर निकलते ही तटबंध की पिचिंग पर पैर पड़ता है.
इस स्थिति से तटबंध पर आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी हो रही है. साथ ही स्थानीय लोगों के बीच यह चिंता भी है कि अगर तटबंध की संरचना के आसपास अनियंत्रित निर्माण बढ़ता रहा तो भविष्य में उसकी निगरानी और रखरखाव प्रभावित हो सकता है.
कोसी क्षेत्र में तटबंधों का महत्व देखते हुए इस तरह के निर्माण को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है.
कोसी पीड़ितों और व्यावसायिक अतिक्रमण में अंतर
स्थानीय लोगों का कहना है कि तटबंध के किनारे कई परिवार कोसी पीड़ित होने के कारण मजबूरी में बसे हुए हैं. उनका पुनर्वास और आवास का सवाल अलग विषय है.
लेकिन मुख्य तटबंध पर व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दो मंजिला भवन का निर्माण गंभीर मामला है. स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन कार्रवाई करते समय वास्तविक जरूरतमंद परिवारों और व्यावसायिक अतिक्रमण के बीच अंतर को भी ध्यान में रखे.
उनका कहना है कि तटबंध की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए.
अब पुलिस बल और मजिस्ट्रेट की होगी तैनाती
अंचल अधिकारी ने बताया कि चिन्हित छह अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला और अनुमंडल पदाधिकारी को पुलिस बल तथा मजिस्ट्रेट की तैनाती के लिए पत्र लिखा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुलडोजर चलाकर अतिक्रमित जगह को खाली कराया जायेगा. इसके साथ ही कोसी पूर्वी मुख्य तटबंध को अतिक्रमण मुक्त कराया जायेगा.
प्रशासन के इस रुख से अब लंबे समय से बने अतिक्रमण हटाये जाने की उम्मीद जगी है. हालांकि, कार्रवाई कब होगी और छहों अतिक्रमणों पर एक साथ कार्रवाई होगी या चरणबद्ध तरीके से, यह प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा.
Kosi Embankment Encroachment: कार्रवाई से पहले उठेगा जवाबदेही का सवाल
अतिक्रमण हटाना प्रशासन की तत्काल जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर तटबंध की जमीन पर निर्माण शुरू होने के बाद उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया.
यदि किसी सरकारी या संरक्षित तटबंध पर निर्माण धीरे-धीरे हुआ और वर्षों तक चलता रहा, तो निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है. भविष्य में ऐसे अतिक्रमण दोबारा न हों, इसके लिए केवल बुलडोजर चलाना पर्याप्त नहीं होगा. नियमित निगरानी और शुरुआती स्तर पर कार्रवाई भी जरूरी होगी.
फिलहाल नजर इस बात पर है कि नोटिस के बावजूद जगह खाली नहीं करने वाले छह अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है. अगर कार्रवाई होती है, तो इससे कोसी पूर्वी मुख्य तटबंध को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जायेगा.
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लेखक के बारे में
By दीपांकर श्रीवास्तव
दीपांकर श्रीवास्तव प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के सहरसा कार्यालय में काम कर रहे हैं. शिक्षा, अनुसंधान, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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