महिषी के पस्तवार में शिव परिचर्चा, भजन-कीर्तन के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माना शिव को गुरु
फोटो - परिचर्चा को संबोधित करते परमेश्वर भाई | Prabhat Khabar Network
सहरसा के पस्तवार गांव में 'शिव परिचर्चा' के दौरान आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला. सैकड़ों ग्रामीणों ने शिव को अपना गुरु मानकर शिष्यता ग्रहण की, जिससे पूरे गांव में भक्तिमय माहौल छा गया.
Saharsa News : सहरसा जिले के महिषी प्रखंड अंतर्गत पस्तवार गांव में आध्यात्मिक चेतना और भक्ति रस का एक अनूठा समागम देखने को मिला. शिव शिष्य हरिन्द्रानंद फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित एक दिवसीय 'शिव परिचर्चा' में भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि पूरा गांव महादेव के जयकारों और भजन-कीर्तन की गूंज से सराबोर हो उठा. स्थानीय शिक्षक घोष पासवान के कुशल संयोजन में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में आसपास के ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. परिचर्चा के दौरान मुख्य वक्ता के विचारों से प्रभावित होकर सैकड़ों पुरुषों व महिलाओं ने महादेव को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते हुए शिव की शिष्यता ग्रहण की.
देवाधिदेव महादेव अनंत हैं, शिव को गुरु बनाना ही मुक्ति का मार्ग: परमेश्वर भाई
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरिन्द्रानंद फाउंडेशन के वरीय सदस्य एवं मुख्य वक्ता परमेश्वर भाई ने शिवत्व के दर्शन को अत्यंत सरल शब्दों में श्रद्धालुओं के समक्ष रखा. उन्होंने कहा कि आदिकाल से ही देवाधिदेव महादेव सभी जीवों के पूज्य रहे हैं और जनमानस उन्हें परमात्मा स्वरूप में पूजता आया है. उन्होंने याद दिलाया कि दशकों पूर्व स्वामी हरिन्द्रानंद और दीदी नीलम आनंद ने भगवान शिव को अपना गुरु स्वीकार कर तीन आध्यात्मिक सूत्रों का प्रतिपादन किया था. इसी के साथ पूरे देश में जन-जन को शिव से जोड़ने का एक महान अभियान शुरू हुआ. आज लाखों लोग शिव को अपना गुरु मानकर सांसारिक दुखों, मानसिक संतापों और भटकाव से मुक्ति पा रहे हैं.
बिना किसी बाध्यता और भेदभाव के कोई भी बन सकता है शिव का शिष्य
मुख्य वक्ता परमेश्वर भाई ने कहा कि शिव किसी जाति, वर्ग या सीमा में बंधे नहीं हैं, वे अनंत और कल्याणकारी हैं. शिव को अपना गुरु स्वीकार करने में किसी प्रकार की कर्मकांडीय जटिलता या बाध्यता नहीं है. कोई भी व्यक्ति सरल भाव, पवित्र मन और समर्पण के साथ शिव का ध्यान कर उनका शिष्य बन सकता है. शिव की शिष्यता ग्रहण करने से जीवन में सकारात्मकता, शांति और आत्मानुशासन का संचार होता है. उन्होंने उपस्थित लोगों का आह्वान किया कि वे दैनिक जीवन के व्यस्त कर्मों के बीच भी शिव के ध्यान और सुमिरन का मार्ग अपनाएं.
भजन-कीर्तन और महाप्रसाद वितरण से भक्तिमय हुआ पूरा माहौल
परिचर्चा के दौरान जब मंडप में ढोलक और झाल की थाप पर शिव भजनों और कीर्तन की तान छिड़ी, तो श्रद्धालु झूमने पर मजबूर हो गए. 'जय शिव' और 'हर हर महादेव' के गगनभेदी जयकारों से पूरा पस्तवार गांव आध्यात्मिक ऊर्जा से जगमगा उठा. परिचर्चा के समापन के उपरांत उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच भक्ति भाव से महाप्रसाद का वितरण किया गया. इस एक दिवसीय आयोजन ने गांव के माहौल को पूरी तरह भक्ति रस में डुबो दिया.
Saharsa News : स्थानीय ग्रामीणों के एकजुट प्रयास से सफल हुआ आयोजन
इस भव्य परिचर्चा के सफल आयोजन, व्यवस्था संचालन और आगंतुक श्रद्धालुओं की आतिथ्य सेवा में स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया. कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीण नवीन पासवान, कुलदीप पासवान, शुभांकर पासवान, उमेश पासवान, बीरबल पासवान सहित अन्य सहयोगियों की सराहनीय भूमिका रही. इस सफल आयोजन के बाद पस्तवार और आसपास के क्षेत्रों में शिव शिष्यता अभियान को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.
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