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मंदिर के बरामदे और पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे

Updated at : 02 Aug 2025 6:26 PM (IST)
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मंदिर के बरामदे और पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे

मंदिर के बरामदे और पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे

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भवन के अभाव में बच्चे कर रहे मुसीबतों का सामना सौरबाजार . सरकार और शिक्षा विभाग लगातार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में प्रयास कर रही है, लेकिन अभी भी कई ऐसे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई तो दूर की बात है, बच्चों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है. यहां के ग्रामीण से लेकर शिक्षक और बच्चे कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभाग के अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार लाने की मांग कर चुके हैं. लेकिन कोई सुनने और सुधार करने की दिशा में पहल करने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. जिसके कारण खासकर बच्चों में पूरी तरह निराशा नजर आ रही है. प्रखंड से लेकर जिला के अधिकारी विद्यालय निरीक्षण करने जरूर आते हैं, लेकिन इस समस्या को कोई नहीं देखते. प्रखंड क्षेत्र के खजुरी पंचायत स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय, कांप पूर्वी पंचायत के सितलपट्टी स्थित प्राथमिक विद्यालय और सुहथ पंचायत स्थित मध्य विद्यालय अर्राहा के बच्चों का भविष्य धूप और छांव में बरामदे पर कुम्हला रहा है. इन सभी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा देने के लिए पर्याप्त मात्रा में शिक्षक मौजूद हैं, लेकिन शिक्षकों को पढ़ाने के लिए वर्ग कक्ष नहीं रहने के कारण वे बच्चों को सही तरीके से नहीं पढ़ा पाते हैं. मध्य विद्यालय अरर्हा में कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है. यहां प्रधानाध्यापक, शारीरिक शिक्षक समेत कुल 13 शिक्षक-शिक्षिका मौजूद हैं, नामांकित बच्चों की संख्या भी पांच सौ के करीब है. लेकिन वर्ग कक्षा की उपलब्धता नहीं रहने से कभी बरामदे तो कभी खुले आसमान के नीचे शिक्षा ग्रहण करना मजबूरी है. यहां वर्ग कक्ष के नाम पर सिर्फ ढाई कमरा उपलब्ध है, आधे कमरे में कार्यालय का काम होता है. जिसमें आठ वर्गों की पढ़ाई प्रतिदिन होती हैं. अधिकारी आते हैं, बच्चों से बिना मिले चले जाते हैं. बच्चों की समस्या हैं कि इस भीषण गर्मी में बिना पंखा के बरामदे पर बैठकर पढ़ना पड़ता है. दोपहर बाद बरामदे पर धूप आ जाने के बाद कैसी हालत होती होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. खजुरी पंचायत के कन्या प्राथमिक विद्यालय और कांप पूर्वी पंचायत के सितलपट्टी स्थित प्राथमिक विद्यालय में तो भवन हीं नहीं है. यहां एक शिव मंदिर के बरामदा और पेड़ के नीचे हीं बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं. यह तो एक बानगी है, प्रखंड में दर्जनों ऐसे स्कूल मिल जायेंगे, जहां ऐसी समस्या से बच्चों को प्रतिदिन जूझना पड़ रहा है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नीरज कुमार निराला बताते हैं कि मेरे कार्यालय से भवन की कमी वाले सभी विद्यालयों की सूची विभाग को भेजी जा चुकी है. वहां से आदेश के बाद काम शुरू किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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