तिलाबे नदी किनारे जालंधर धाम में रात में सर्पों के वास की मान्यता, श्रावण समापन पर उमड़ा सैलाब

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बाबा को लगाये गये 56 भोग. | Prabhat Khabar Network

तिलाबे नदी के किनारे स्थित जालंधर धाम में श्रावण मास का समापन श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ. रुद्राभिषेक, भव्य श्रृंगार, 56 भोग और मिथिला के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजन संध्या ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया.

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तिलाबे नदी के तट पर रामपुर बरदाहा गांव की सीमा में स्थित स्वयंभू अंकुरित महाकाल बाबा जालंधर नाथ धाम में बाबा जालंधर नाथ सेवा समिति की ओर से श्रावण समापन समारोह श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. मुख्य पुजारी गौरीशंकर ठाकुर एवं गम्हरिया पंचायत के सरपंच बेचन तांती की अध्यक्षता और बाबा जालंधर नाथ के सेवक शैलेश कुमार झा के संचालन में आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. रुद्राभिषेक, भव्य श्रृंगार, 56 भोग और भजन संध्या ने पूरे धाम को भक्तिमय बना दिया.

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रुद्राभिषेक के बाद हुआ बाबा का भव्य शृंगार

समारोह के दौरान पंडित कैलाश झा के मार्गदर्शन में शैलेश कुमार झा, राम गुलाम सिंह, मृत्युंजय कुमार यादव, मंटु साह और अनिल पौदार ने महाकाल बाबा जालंधर नाथ का विधिवत रुद्राभिषेक कराया. इसके बाद बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया.

पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा के जयकारे लगाये और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. श्रावण के समापन पर बाबा को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग भी अर्पित किया गया.

मिथिला के कलाकारों ने देर रात तक बांधा समां

श्रावण समापन समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण भजन संध्या रही. मिथिला के प्रसिद्ध कलाकार दीक्षा झा, कन्हैया सिंह कन्हैया, मिट्ठू कुमार और ब्रजेश कुमार ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी.

भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे. भजनों और जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंजता रहा. भजन संध्या के दौरान धाम में श्रद्धा और भक्ति का ऐसा माहौल बना कि श्रद्धालु देर रात तक कार्यक्रम से जुड़े रहे.

स्वयंभू शिवलिंग से जुड़ी है जालंधर की पौराणिक कथा

बाबा के सेवक शैलेश कुमार झा ने धाम से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की जानकारी दी. उनके अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू और अंकुरित माना जाता है. इसकी मान्यता महादेव के तेज से उत्पन्न असुर सम्राट जालंधर से जोड़ी जाती है.

मान्यता के अनुसार शिवलिंग ईशान कोण की ओर झुका हुआ है और इसके चारों ओर जनेऊ का दिव्य चिन्ह भी अंकित है. धाम के आसपास विषैले सर्प पाए जाने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि रात के समय सर्प शिवलिंग के आसपास वास करते हैं.

तीन विधानसभा क्षेत्रों की सीमा से जुड़े सैकड़ों गांवों की आस्था

समारोह में मौजूद अतिथियों ने कहा कि बाबा जालंधर नाथ धाम के प्रति आसपास के क्षेत्रों में गहरी आस्था है. सहरसा, मधेपुरा और महिषी विधानसभा क्षेत्रों के सीमावर्ती इलाके में स्थित यह धाम सैकड़ों गांवों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है.

वक्ताओं ने कहा कि धाम का धार्मिक महत्व होने के साथ यह क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर भी है. ऐसे में इसके विकास की दिशा में सरकारी स्तर पर विशेष पहल की जरूरत है.

सरकारी स्तर पर बाबा जालंधर नाथ महोत्सव कराने की मांग

समारोह के दौरान धाम के सर्वांगीण विकास के लिए सरकारी स्तर पर बाबा जालंधर नाथ महोत्सव आयोजित कराने की मांग उठी. अतिथियों ने धाम के विकास में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया.

कार्यक्रम में महिला आयोग सदस्य एवं राजद नेत्री सह पूर्व जिला परिषद सदस्य मधेपुरा गीता यादव, बिशनपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि सरोज यादव, मधेपुरा जिला परिषद प्रतिनिधि बीके आर्यन, सनातन धर्म प्रचारक नवीन यादव, विकास कुमार अकेला, समाजसेवी ललन यादव, बरदाहा पंचायत के वार्ड सदस्य अजित कुमार यादव सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.

श्रावण समापन समारोह में समिति के सदस्यों और श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी रही. रुद्राभिषेक से लेकर भजन संध्या तक पूरा धाम भगवान शिव की भक्ति में डूबा रहा.


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