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राजकीय पोलिटेक्निक के बच्चों के लिए 46.4 करोड़ से आवास निर्माण की मिली स्वीकृति

Updated at : 03 Aug 2025 6:22 PM (IST)
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राजकीय पोलिटेक्निक के बच्चों के लिए 46.4 करोड़ से आवास निर्माण की मिली स्वीकृति

46.4 करोड़ से आवास निर्माण की मिली स्वीकृति

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तीन सौ बेड बालक व तीन सौ बेड बालिकाओं के जी फाइव आवास का होगा निर्माण सहरसा . शिक्षा के क्षेत्र में जिले के सरकारी संस्थान भी लगातार आगे बढ़ रहा है. बेहतर सुविधा व बच्चों के रहने तक की बेहतर सुविधा सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है. इस कड़ी में राजकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय से जुड़ी एक अच्छी खबर सामने आयी है. जहां राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के छात्रों के बेहतर आवास की सुविधा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया. सात निश्चय योजना के तहत राजकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में बालक एवं बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जायेगा. इसके लिए 46.40 करोड़ की स्वीकृति भी मिल चुकी है. यहां तीन सौ बालक व एवं तीन सौ बालिकाओं के रहने के लिए जी प्लस फाइव आवासीय भवन का जल्द निर्माण पूरा होगा. लंबे अरसे के प्रयास के बाद सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. बालक एवं बालिका के लिए अलग-अलग छात्रावास बनने के लिए राशि की स्वीकृति दे दी है. अब यहां के बच्चे इस छात्रावास में रहकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे. छह सौ बेड का बनेगा छात्रावास जानकारी देते राजकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्राचार्य मिथुन कुमार ने बताया कि इस छात्रावास के निर्माण के लिए लंबे वर्षों से इंतजार था. काफी जद्दोजहद के बाद मांग पूरी हुई है व सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. जिसके लिए कॉलेज प्रशासन सरकार एवं अधिकारियों का आभार व्यक्त करता है. उन्होंने कहा कि तीन सौ बेड का बालक व तीन सौ बेड का बालिका छात्रावास का निर्माण होगा. जिसकी लागत 46.4 करोड़ की होगी. इसके लिए स्वीकृति भी मिल चुकी है. महाविद्यालय के ठीक बगल में यह बालिका छात्रावास का निर्माण कराया जायेगा. जहां कॉलेज के छात्र-छात्राओं को इसी छात्रावास में रहकर उन्हें बेहतर शिक्षा एवं बेहतर सुविधा प्रदान किया जायेगा. अब बच्चों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. छात्रावास में ही सारी सुविधाएं उन्हें प्रदान की जायेगी. वहीं यह छात्रावास हाईटेक तरीके से बनाया जायेगा. वहीं बड़े शहरों के छात्रावास की तर्ज पर इस छात्रावास का निर्माण जी प्लस फाईव की तर्ज पर होगा. उन्होंने कहा कि अगले 16 महीने में इसे पूरा किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Dipankar Shriwastaw

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