जमुईकांड पर उबला महिलाओं का गुस्सा: सहरसा में महंगाई और अपराध के मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा!

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फोटो - सहरसा - बैठक करती महिलाएं | Prabhat Khabar Network

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महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर महिलाओं ने सरकार को घेरा. जमुई की घटना पर भी चिंता व्यक्त की गई और सरकार की आलोचना हुई.

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Saharsa AIDWA Meeting Jamui Incident: बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, कमरतोड़ महंगाई और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्ज को लेकर सियासत और जन-आक्रोश चरम पर पहुंच गया है. सहरसा जिले के महखड़ गांव में जब ग्रामीण महिलाओं का हुजूम एकजुट हुआ, तो वहां से उठी आवाज ने पटना के राजनीतिक गलियारों तक हलचल पैदा कर दी. अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) द्वारा आयोजित इस विशेष बैठक में जमुई में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुई खौफनाक घटना को लेकर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए. महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि वादों और दावों के बीच राज्य की बेटियां आज भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं.

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जमुई की घटना पर फूटा आक्रोश, रामपरी देवी का तीखा प्रहार

आरती देवी की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामपरी देवी ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ हुई कथित छेड़खानी, मारपीट, गाली-गलौज और दुष्कर्म के प्रयास की शर्मनाक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि कानून का खौफ खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद से महिलाओं और मासूम बच्चियों के खिलाफ आपराधिक घटनाओं में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है. रामपरी देवी ने मुख्यमंत्री के उस कथित बयान का हवाला दिया जिसमें सुबह होते ही पद छोड़ने की बात कही गई थी और जोर देकर मांग की कि जमुई की घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

महंगाई, बेदखली और राशन कार्ड कटौती से हलकान हैं गरीब परिवार

बैठक में केवल अपराध ही नहीं, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी बुनियादी समस्याओं पर भी खुलकर बात हुई. रामपरी देवी ने कहा कि आज राज्य का गरीब वर्ग चौतरफा मार झेल रहा है. एक तरफ जहां अनियंत्रित महंगाई ने रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है, वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी के कारण युवाओं का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है. प्रशासनिक स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण गरीबों को उनकी अपनी जमीन से बेदखल किया जा रहा है और पात्र परिवारों को राशन कार्ड जैसी बुनियादी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रखा जा रहा है. इन सभी समस्याओं के चलते आम जनता में गहरा असंतोष पनप रहा है.

माइक्रोफाइनेंस कंपनियों का जाल और ग्रामीण महिलाओं की मजबूरी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की एक और कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए एडवा नेत्री ने बताया कि सुदूर गांवों में रहने वाली महिलाएं आज माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के कर्ज के भारी दबाव में जी रही हैं. रोजगार के अभाव में छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लिया गया कर्ज अब महिलाओं के लिए गले की फांस बन चुका है. किस्त वसूली के नाम पर कंपनियां महिलाओं का उत्पीड़न कर रही हैं, जिससे कई परिवार पाई-पाई के लिए मोहताज हो रहे हैं. बैठक में मांग उठाई गई कि सरकार इन निजी कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाए और महिलाओं के लिए सरकारी स्तर पर बिना ब्याज या रियायती दर पर स्वरोजगार ऋण की व्यवस्था करे.

Saharsa AIDWA Meeting Jamui Incident: अधिकारों के लिए संगठित आंदोलन का शंखनाद

एडवा की जिला सचिव अनिता देवी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक महिलाएं खुद अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगी, तब तक शोषण का यह दौर खत्म नहीं होगा. उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि वे अपने मान-सम्मान और हक की लड़ाई के लिए जाति और मजहब से ऊपर उठकर एकजुट हों. मजदूर नेता डोमी पासवान ने भी बैठक का स्वागत करते हुए महिला आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया. इस अवसर पर रूबी देवी, उषा देवी, प्रतिमा देवी और खुशी देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं मौजूद रहीं. सभी ने एक स्वर में अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया.

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