जलालगढ़ का प्रसिद्ध मां वैष्णवी धाम; जानें 66 साल पुराने मंदिर का इतिहास और आस्था की कहानी

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जलालगढ़ स्थित माँ वैष्णवी धाम सार्वजनिक दुर्गा मंदिर | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया के जलालगढ़ स्थित माँ वैष्णवी धाम भक्तों की अगाध आस्था का केंद्र है. 66 साल पुराने इस सिद्ध मंदिर की स्थापना बंगाल के एक स्टेशन अधीक्षक की प्रेरणा से हुई थी. शारदीय नवरात्र और दीपावली में यहां विशेष रौनक रहती है.

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पूर्णिया जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित जलालगढ़ का मां वैष्णवी धाम पूरे इलाके के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. चाहे स्थानीय कारोबारी हों, राहगीर हों या विद्यार्थी—हर कोई अपने दिन की शुरुआत माता के दर्शन और आशीर्वाद के साथ करता है. जलालगढ़ रेलवे स्टेशन से बिल्कुल सटा यह मंदिर स्टेट हाईवे 60 के किनारे स्थित है, जबकि एनएच 27 (NH-27) भी यहां से महज 200 मीटर की दूरी पर है.

बंगाल के स्टेशन अधीक्षक की प्रेरणा से हुई थी स्थापना

मां वैष्णवी धाम का इतिहास रेलवे और स्थानीय लोगों के आपसी जुड़ाव से जुड़ा हुआ है:

  • स्थापना का इतिहास: मंदिर कमेटी के सदस्यों के अनुसार, वर्ष 1961 में जलालगढ़ रेलवे स्टेशन परिसर में इस मंदिर की स्थापना हुई थी. उस समय बंगाल के रहने वाले एक रेलवे स्टेशन अधीक्षक यहां कार्यरत थे, जिनकी प्रेरणा से परिसर में माता का स्थान स्थापित किया गया.
  • 66 वर्षों की परंपरा: धीरे-धीरे स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों की सहभागिता बढ़ती गई. पिछले 66 वर्षों से यहां दुर्गा पूजा और दैनिक पूजन का आयोजन भव्य तरीके से एक सार्वजनिक कमेटी के माध्यम से किया जा रहा है.

शारदीय नवरात्र और दीपावली में विशेष आकर्षण

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिदिन पूजी जाने वाली मां वैष्णवी का दरबार त्यौहारों के दौरान विशेष रूप से सजता है:

कमेटी सदस्य जयकिशन राय के अनुसार: "शारदीय नवरात्र के दौरान महिला श्रद्धालुओं द्वारा माता के दरबार में खोईंचा चढ़ाने की विशेष परंपरा है. नवरात्र में सैकड़ों महिलाएं खोईंचा चढ़ाकर मन्नतें मांगती हैं. इसके अलावा दीपावली और नवरात्र पर मंदिर की आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है."

विवाह और शुभ कार्यों में वर-वधू लेते हैं आशीर्वाद

वर्तमान में मंदिर के भव्य स्वरूप का निर्माण कार्य भी चल रहा है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार:

  • विघ्नहर्ता रूप: माना जाता है कि मां वैष्णवी के दरबार में मत्था टेकने से जीवन की तमाम बाधाएं और दुख-तकलीफें दूर हो जाती हैं.
  • विवाह संस्कार: क्षेत्र में जब भी कोई शादी-विवाह संपन्न होता है, तो नवविवाहित वर-वधू आशीर्वाद लेने और पूजा-अर्चना करने मां वैष्णवी धाम जरूर पहुंचते हैं.


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Nikesh Kumar

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By Nikesh Kumar

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