पूर्णिया का ओंकारेश्वर नाथ शिव मंदिर, जहां दर्शन मात्र से खुलते हैं भाग्य के द्वार

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शिवपुरी शिवालय | Prabhat Khabar Network

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पूर्णिया का श्री श्री 108 ओंकारेश्वर नाथ शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहाँ सच्चे मन से दर्शन करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. 1989 में स्थापित यह मंदिर शिवपुरी इलाके का नामकरण भी करता है.

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पूर्णिया : शहर के भट्ठाबाजार से सटे शिवपुरी स्थित श्री श्री 108 ओंकारेश्वर नाथ शिव मंदिर जिले का प्रमुख आस्था केंद्र है. इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. सुबह और शाम बड़ी संख्या में भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं. मुख्य सड़क से सटे होने के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीर भी मंदिर में माथा टेकना नहीं भूलते. सावन के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.

दर्शन मात्र से खुलते हैं भाग्य के द्वार

स्थानीय लोगों की मान्यता है कि ओंकारेश्वर नाथ शिव मंदिर में सच्चे मन से दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. यही कारण है कि प्रतिदिन सुबह से ही जलाभिषेक और पूजा के लिए श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है. कई भक्त नियमित रूप से यहां पूजा करने आते हैं.

मन्नत पूरी होने की है मान्यता

मंदिर से जुड़े बुजुर्ग बताते हैं कि यहां सच्ची श्रद्धा से पूजा करने वालों की मन्नतें पूरी होती हैं. इसी विश्वास के साथ दूर-दराज के लोग भी मंदिर पहुंचकर शिव स्तुति, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. मंदिर परिसर में धार्मिक आयोजनों के दौरान भक्ति का वातावरण बना रहता है.

1989 में हुई थी मंदिर की स्थापना

ओंकारेश्वर नाथ शिव मंदिर की स्थापना वर्ष 1989 में हुई थी. मंदिर में भगवान शिव के शिवलिंग के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. परिसर में भगवान हनुमान का मंदिर भी स्थित है, जहां श्रद्धालु दर्शन-पूजन करते हैं.

शिवपुरी नाम भी मंदिर से जुड़ा

स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान शिव के इस प्राचीन मंदिर के कारण ही पूरे इलाके का नाम शिवपुरी पड़ा. वर्षों से यह मंदिर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में कुछ देर बैठने मात्र से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.


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अखिलेश चंद्रा

लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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