अमौर में 50 दिनों के बाद खत्म हुई पंचायत सचिवों की हड़ताल, सोमवार से काम पर लौटेंगे कर्मी; थमे विकास कार्यों को मिलेगी गति
अमौर प्रखंड कार्यालय, पूर्णिया
Panchayat Secretary Strike: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड में पिछले करीब पौने दो महीने से ठप पड़ा ग्रामीण विकास का पहिया अब फिर से रफ्तार पकड़ने जा रहा है. अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे पंचायत सचिवों ने आंदोलन वापस ले लिया है, जिसके बाद आगामी सोमवार से सभी पंचायतों में कामकाज पूरी तरह बहाल हो जाएगा.
पूर्णिया के अमौर से सुनील कुमार की रिपोर्ट
Panchayat Secretary Strike: पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. अपनी विभिन्न सेवा शर्तों और न्यायसंगत मांगों को लेकर पिछले 50 दिनों से अनवरत सामूहिक हड़ताल पर चल रहे प्रखंड के सभी पंचायत सचिवों ने आखिरकार अपना आंदोलन समाप्त करने का आधिकारिक निर्णय लिया है. इस बड़े फैसले के बाद आगामी सोमवार से अमौर प्रखंड की सभी पंचायतों के सचिव अपने-अपने आवंटित कार्य प्रभार पर वापस लौट जाएंगे. पंचायत सचिवों की इस घर वापसी से ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले डेढ़ महीने से रुका हुआ प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज एक बार फिर पटरी पर लौट आएगा.
इस संबंध में अमौर प्रखंड की पंचायती राज पदाधिकारी (BPRO) नूतन कुमारी ने भी हड़ताल समाप्त होने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि सभी पंचायत सचिवों के सोमवार से काम पर लौटने की लिखित सहमति बन चुकी है. प्रखंड प्रशासन ने सभी सचिवों को कड़ा निर्देश दिया है कि हड़ताल की अवधि के दौरान आम जनता के जो भी विकासात्मक और प्रशासनिक कार्य पेंडिंग (लंबित) पड़े हैं, उन्हें पहली प्राथमिकता के आधार पर अविलंब पूरा किया जाए.
परदेश से लौटे प्रवासी मजदूरों को अब गांवों में ही मिलेगा रोजगार
अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती: पंचायत सचिवों की इस 50 दिवसीय हड़ताल का सबसे बुरा असर ग्रामीण विकास योजनाओं और मनरेगा (MGNREGA) के तहत होने वाले कार्यों पर पड़ा था. सचिवों की अनुपस्थिति के कारण पंचायतों में डोंगल (डिजिटल सिग्नेचर) ब्लॉक था, जिससे न तो नई योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति मिल पा रही थी और न ही मजदूरों के बकाए वेतन का भुगतान हो पा रहा था.
हड़ताल खत्म होने के इस फैसले से सीमांचल के उन हजारों प्रवासी मजदूरों को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, जो हाल के दिनों में परदेश (दूसरे राज्यों) से कमाकर अपने वतन और गांवों को लौट आए हैं. गांवों में जल-जीवन-हरियाली, पक्की नाली-गली और सात निश्चय की योजनाएं दोबारा शुरू होने से इन मजदूरों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर सुलभ होंगे, जिससे ठप पड़ी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया बूस्ट और मजबूती मिलेगी.
ठप पड़े ये महत्वपूर्ण कार्य अब होंगे सुचारू:
पंचायत सचिवों के सोमवार से अपनी सीटों पर बैठने के बाद ग्रामीण स्तर के निम्नलिखित कार्यों में तेजी आएगी:
- वित्तीय भुगतान: मनरेगा व पंद्रहवीं वित्त आयोग के तहत पेंडिंग पड़े वेंडरों और मजदूरों के राशि का भुगतान तुरंत शुरू हो सकेगा.
- सरकारी प्रमाणपत्र: गांवों के गरीब नागरिकों के लंबे समय से अटके पड़े जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, कबीर अंत्येष्टि योजना का लाभ और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन के आवेदनों का सत्यापन तेजी से हो सकेगा.
- बाढ़ पूर्व तैयारियां: सीमांचल में मॉनसून के दस्तक देने से पहले पंचायतों में जलजमाव से निपटने और सुरक्षात्मक बांधों की मरम्मत संबंधी योजनाओं को समय रहते धरातल पर उतारा जा सकेगा.
फिलहाल, इस हड़ताल की समाप्ति से अमौर प्रखंड की आम जनता सहित स्थानीय जन प्रतिनिधियों (मुखिया और वार्ड सदस्यों) ने बड़ी राहत की सांस ली है.
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लेखक के बारे में
By दिव्यांशु प्रशांत
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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