पूर्णेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ती है आस्था, मान्यता- बाबा के दरबार से कोई नहीं लौटता खाली हाथ

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मंदिर | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया शहर का पूर्णेश्वर महादेव मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का जीवंत केंद्र है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जलाभिषेक करने वाले भक्तों की बाबा कभी खाली झोली नहीं लौटाते. सावन और महाशिवरात्रि पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ता है.

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पूर्णिया शहर के मधुबनी अंतर्गत प्रताप नगर स्थित पूर्णेश्वर महादेव मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था और अगाध विश्वास का जीवंत केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों के बीच यह दृढ़ मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और दर्शन करने वाले भक्तों को बाबा कभी खाली हाथ नहीं लौटने देते. सावन मास और महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां का दृश्य अद्भुत और अलौकिक होता है.

सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ता है आस्था का जनसैलाब

सामान्य दिनों के साथ-साथ विशेष धार्मिक अवसरों पर मंदिर परिसर में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है:

  • सोमवारी भंडारा व अनुष्ठान: सावन के प्रत्येक सोमवारी को स्थानीय निवासियों और मंदिर समिति के सहयोग से विशाल भंडारे का आयोजन होता है.
  • पूजन सामग्री व जलाभिषेक: भक्त पवित्र गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, दूध और अक्षत लेकर बाबा पूर्णेश्वर नाथ का आशीर्वाद लेने और मनोकामना पूर्ति के लिए पहुंचते हैं.
  • शिव चतुर्दशी का महत्व: महाशिवरात्रि और शिव चतुर्दशी पर देर रात तक भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और महाआरती का दौर चलता रहता है.

20 वर्ष पुराना है मंदिर का गौरवशाली इतिहास

प्रताप नगर स्थित इस प्रसिद्ध महादेव मंदिर का इतिहास लगभग 20 वर्ष पुराना है:

  • स्थापना में प्रमुख योगदान: मंदिर की नींव रखने और निर्माण कराने में पूर्णिया कॉलेज के प्राध्यापक रहे महादेव झा तथा लाला जय किशोर प्रसाद की अहम भूमिका रही. लाला जय किशोर प्रसाद ने अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) से ठीक पहले इस मंदिर की स्थापना का सपना पूरा किया.
  • बनारस से लाया गया शिवलिंग: मंदिर में स्थापित अलौकिक शिवलिंग को विशेष रूप से काशी (बनारस) से लाकर पूरे विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठित किया गया था.
  • 20 जून को स्थापना दिवस: प्रतिवर्ष 20 जून को मंदिर का वार्षिक स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें बाहरी राज्यों और जिलों से आए कलाकारों द्वारा भव्य भजन-कीर्तन प्रस्तुत किया जाता है.

सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक

प्रताप नगर का पूर्णेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पूरे मोहल्ले व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी मजबूत प्रतीक बन चुका है.


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अखिलेश चंद्रा

लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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