लोक संस्कृति को सहेजने की नयी पहल,15 दिवसीय लोकगीत-लोक नृत्य प्रशिक्षण शुरू

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कार्यक्रम का उद्घाटन करतीं प्रशिक्षु आइएएस अधिकारी | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया में लोक कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए 15 दिवसीय निःशुल्क कजरी लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जानें पूरी खबर।

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पूर्णिया : पूर्णिया में लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी को पारंपरिक विधाओं से जोड़ने की दिशा में 15 दिवसीय निःशुल्क कजरी लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ. जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र, प्रेक्षागृह सह आर्ट गैलरी में चल रहा है. प्रशिक्षण का समापन 2 सितंबर को होगा.

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लोक विधाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर

प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि लोकगीत और लोकनृत्य किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के जीवंत दस्तावेज हैं. कजरी जैसी लोक विधाओं को संरक्षित करने में समाज और युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान सीखी कला को विभिन्न मंचों पर प्रस्तुत करने का आह्वान किया.

विलुप्त होती विधाओं को बचाने की कोशिश

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज पटेल ने कहा कि पूर्णिया और सीमांचल की लोक संस्कृति बेहद समृद्ध है. बदलती जीवनशैली के कारण कई पारंपरिक लोक विधाएं धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही हैं. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए इन विधाओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है.

लोकगीत और लोकनृत्य का दिया जा रहा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान लोकगीत की बारीकियां चांदनी शुक्ला सिखा रही हैं, जबकि लोकनृत्य की विभिन्न विधाओं के साथ ताल, लय और भाव-भंगिमा का प्रशिक्षण अम्बपाली पुरस्कार से सम्मानित कलाकार अमित कुमार दे रहे हैं. प्रशिक्षकों के अनुसार कजरी लोकजीवन की संवेदनाओं, ऋतु, प्रेम, विरह और सामाजिक परिवेश को अभिव्यक्त करने वाली समृद्ध लोक विधा है.

प्रतिभागियों में दिखा उत्साह

प्रशिक्षण को लेकर प्रतिभागियों में भी उत्साह है. उनका कहना है कि वरिष्ठ स्थानीय कलाकारों से प्रशिक्षण मिलने से उन्हें लोक कला की बारीकियों को सीखने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर मिल रहा है. प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों की ओर से सीखी गई लोक विधाओं की प्रस्तुति भी की जाएगी.


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