229 वर्षों से आस्था का केंद्र बना रजीगंज का नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, महारानी इंद्रावती ने 1797 में कराया था निर्माण

Updated:
विज्ञापन
Ranipatra | Prabhat Khabar Network

नर्मदेश्वर महादेव मंदिर | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया के रजीगंज में स्थित ऐतिहासिक नर्मदेश्वर महादेव मंदिर 229 वर्षों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. महारानी इंद्रावती द्वारा 1797 में निर्मित इस सिद्ध मंदिर का हाल ही में भव्य जीर्णोद्धार और प्राण-प्रतिष्ठा हुई है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ गई है.

विज्ञापन

पूर्णिया पूर्व प्रखंड अंतर्गत रजीगंज गांव में स्थित ऐतिहासिक नर्मदेश्वर महादेव मंदिर विगत 229 वर्षों से सीमांचल के लाखों श्रद्धालुओं की असीम आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों के लिए यह न केवल पूजा-अर्चना का स्थल है, बल्कि गांव और पूरे जिले की अमूल्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर भी है. सावन के महीने में यहां प्रतिदिन सैकड़ों शिवभक्त भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने और मन्नत मांगने पहुंच रहे हैं.

वर्ष 1797 में महारानी इंद्रावती ने रखा था नींव

रजीगंज निवासी कृष्णानंद गुप्ता, अशोक मंडल, संजय कुमार गुप्ता, धीरेंद्र प्रसाद साह एवं सत्यनारायण मंडल ने मंदिर के ऐतिहासिक बैकग्राउंड के बारे में विस्तार से बताया:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस प्राचीन मंदिर का मूल निर्माण वर्ष 1797 ईस्वी (लगभग 229 वर्ष पूर्व) में 'पुरैनिया राज' की महारानी इंद्रावती द्वारा कराया गया था.
  • धार्मिक चेतना का केंद्र: उस दौर में महारानी इंद्रावती ने क्षेत्र में धार्मिक व सांस्कृतिक चेतना जगाने के लिए कई मंदिरों की स्थापना कराई थी, जिनमें नर्मदेश्वर महादेव मंदिर सबसे प्रमुख और सिद्ध माना जाता है.

फरवरी 2024 में हुआ भव्य कायाकल्प और प्राण-प्रतिष्ठा

लंबे समय के बाद प्राचीन मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार और कायाकल्प कराया गया:

  • पुनर्निर्माण एवं प्राण-प्रतिष्ठा: शिवानंद गुप्ता के पुत्र संजय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में ग्रामीणों के सहयोग से फरवरी 2024 में भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया गया.
  • कई दिनों तक चला अनुष्ठान: इस दौरान कलश शोभायात्रा, भव्य रुद्राभिषेक, अष्टयाम, भजन-कीर्तन और महाप्रसाद का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दराज के गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे.

श्रद्धालुओं की बढ़ रही आस्था, पर्यटन दर्जा देने की उठी मांग

जीर्णोद्धार के बाद से ही मंदिर में प्रत्येक सोमवार, सावन मास, महाशिवरात्रि तथा अन्य धार्मिक पर्वों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है. मंदिर परिसर अब सामाजिक और धार्मिक सम्मेलनों का मुख्य केंद्र बन चुका है.

ग्रामीणों की मुख्य मांग: 229 वर्ष पुराने इस दुर्लभ और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए ग्रामीणों ने बिहार सरकार, जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग (Archaeological Dept.) से मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने तथा इसके ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित करने की मांग की है.


विज्ञापन
Raj Kr Choudhary

लेखक के बारे में

By Raj Kr Choudhary

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन