सुर, ताल और लय का जादू... विद्या विहार के बच्चों को शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सिखा गये महारथी
शास्त्रीय संगीत के महारथी पंडित रितेश मिश्रा और पंडित रजनीश मिश्रा ने विद्या विहार आवासीय विद्यालय में छात्रों को सुर, ताल और लय के महत्व को समझाया. उन्होंने न केवल अपनी गायन प्रस्तुति दी, बल्कि संगीत को जीवन में उतारने की प्रेरणा भी दी.
पूर्णिया : शहर से सटे परोरा स्थित विद्या विहार आवासीय विद्यालय में स्पीकमेके की पहल पर आयोजित सांगीतिक अनुष्ठान में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुति ने छात्र-छात्राओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. शास्त्रीय संगीत के महारथी पंडित रितेश मिश्रा और पंडित रजनीश मिश्रा ने न केवल अपनी गायकी से श्रोताओं का मन मोहा, बल्कि विद्यार्थियों को सुर, ताल और लय की बारीकियों से भी परिचित कराया.
कलाकारों ने विद्यार्थियों को बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, एकाग्रता और संतुलन लाने का भी जरिया है. उन्होंने आज के तनावपूर्ण जीवन में संगीत के महत्व को समझाते हुए विद्यार्थियों को इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने की सीख दी.
सातों स्वरों की सुंदरता से कराया परिचित
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने सरगम के सातों स्वरों की विशेषताओं और संगीत में उनके महत्व को समझाया. इसके बाद जब उन्होंने शास्त्रीय गायन की तान छेड़ी तो खचाखच भरे विद्या विहार के ऑडिटोरियम में बैठे विद्यार्थी, शिक्षक और अन्य श्रोता मंत्रमुग्ध हो गये.
कलाकारों ने राग मुल्तानी में मध्य लय तीन ताल से कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके बाद द्रुत एकताल में सुंदर बंदिश प्रस्तुत की. शास्त्रीय संगीत से जुड़े विद्यार्थियों ने गायन और वादन के अभ्यास से संबंधित सवाल भी पूछे, जिनका कलाकारों ने विस्तार से समाधान बताया.
भजन से सुरमय हुआ पूरा ऑडिटोरियम
कार्यक्रम के अंत में कलाकारों ने ‘साध रे मन सूर को साध रे’ भजन की प्रस्तुति दी. भजन के साथ पूरा ऑडिटोरियम सुरों से गूंज उठा. हारमोनियम पर प्रसिद्ध वादक देवाशीष अधिकारी और तबले पर अर्कोदीप दास ने संगत कर कार्यक्रम को और प्रभावी बना दिया.
दीप प्रज्ज्वलन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के निदेशक राजेश मिश्रा, प्राचार्य निखिल रंजन, शिक्षकों, स्पीकमेके के राज्य कोऑर्डिनेटर स्वरूप कुमार दास और अतिथि कलाकारों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
इस अवसर पर विद्यालय के सभी विद्यार्थी, शिक्षक, शहर के शास्त्रीय संगीत प्रेमी और संगीत सीख रहे कई विद्यार्थी मौजूद रहे.
भारतीय कला-संस्कृति से युवाओं को जोड़ना उद्देश्य
स्पीकमेके के राज्य कोऑर्डिनेटर स्वरूप कुमार दास ने कहा कि संस्था का उद्देश्य देश-दुनिया के युवाओं और बच्चों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, कला और संस्कृति से परिचित कराना है. इसके माध्यम से नई पीढ़ी में भारतीय कला और संस्कृति के प्रति रुचि पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है.
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