बिहार में 4 प्रतिशत तक लोग सोरायसिस से पीड़ित, आधुनिक दवाओं से लंबे समय तक बीमारी रह सकती है कंट्रोल

Patna News: बिहार में करीब 3-4% लोग सोरायसिस से पीड़ित हैं, जो त्वचा की एक क्रॉनिक बीमारी है. विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक उपचार और दवाओं से इसे नियंत्रित रखा जा सकता है, और यह छुआछूत की बीमारी नहीं है. सोरायसिस के लक्षणों और बचाव पर विशेषज्ञों की राय.
Patna News: बिहार में करीब तीन से चार प्रतिशत लोग सोरायसिस से पीड़ित हैं. यह त्वचा की एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारी है, जिसमें त्वचा पर लाल चकत्तों के साथ अभ्रक जैसी सफेद परत जमने लगती है. ठंड के मौसम में इसके लक्षण अधिक बढ़ जाते हैं. हालांकि इसका स्थायी इलाज संभव नहीं है, लेकिन आधुनिक उपचार और नियमित दवाओं की मदद से इसे लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है. यह जानकारी इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स, वेनेरियोलॉजिस्ट्स एंड लेप्रोलॉजिस्ट्स (आईएडीवीएल) की ओर से आयोजित सोरायसिस के आधुनिक उपचार विषयक सीएमई कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने दी.
कोहनी, घुटने और पीठ पर अधिक दिखाई देते हैं इसके लक्षण
पीएमसीएच के त्वचा रोग विभाग के वरीय प्राध्यापक एवं आईएडीवीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अभिषेक झा ने बताया कि सोरायसिस सबसे अधिक कोहनी, घुटने, पेट और पीठ पर दिखाई देता है. कई मरीजों में इसके साथ सोरायटिक आर्थराइटिस यानी गठिया की समस्या भी हो जाती है. उन्होंने कहा कि आधुनिक बायोलॉजिकल दवाओं, विशेषकर उस्टेकीनुमैब आधारित उपचार से मरीजों को लंबे समय तक राहत मिल सकती है. हालांकि यह दवा अपेक्षाकृत महंगी है, इसलिए इसका उपयोग केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए.
सोरायसिस संक्रामक बीमारी नहीं, मरीजों से भेदभाव न करें
एम्स पटना के त्वचा रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. स्वेतालीना प्रधान ने कहा कि सोरायसिस संक्रामक बीमारी नहीं है. इसे छूने, साथ बैठने या साथ भोजन करने से यह दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती. इसलिए मरीजों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय पर इलाज और नियमित फॉलोअप से सोरायसिस से पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.
त्वचा रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
आईएडीवीएल बिहार शाखा के अध्यक्ष डॉ. रामअवतार सिंह ने कहा कि त्वचा रोगों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि मरीज शुरुआती अवस्था में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेकर उपचार शुरू कर सकें. उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और सही उपचार से बीमारी की गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
चिकित्सकों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान देशभर में सर्वाधिक त्वचा रोग चिकित्सा शिविर आयोजित कर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले अभियान से जुड़े चिकित्सकों को भी सम्मानित किया गया. इस अवसर पर आईएडीवीएल बिहार शाखा की सचिव डॉ. श्रीपर्णा देव, उपाध्यक्ष डॉ. विकास शंकर और कोषाध्यक्ष डॉ. रजनीश कुमार सहित कई चिकित्सक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे.
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