पटना: खगौल में मंचित हुआ भिखारी ठाकुर का कालजयी नाटक 'गबरघिचोर', मां की ममता ने जीता दर्शकों का दिल

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पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खगौल में भिखारी ठाकुर के कालजयी लोकनाट्य 'गबरघिचोर' का सफल मंचन हुआ. सूत्रधार नाट्य संस्था की प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया. नाटक ने ग्रामीण समाज की सच्चाइयों और मां की ममता को बखूबी दर्शाया.

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Patna Folk Drama: पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल, खगौल के सृजन प्रेक्षागृह में रविवार की शाम भिखारी ठाकुर की कालजयी लोकनाट्य रचना 'गबरघिचोर' का प्रभावशाली मंचन किया गया. चर्चित नाट्य संस्था सूत्रधार की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया. नाटक की परिकल्पना और निर्देशन नवाब आलम ने किया.

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पलायन और स्त्री की पीड़ा को किया जीवंत

नाटक 'गबरघिचोर' ग्रामीण समाज की उस सच्चाई को सामने लाता है, जहां पुरुष रोजी-रोटी की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं और गांव में महिलाएं अकेले संघर्षपूर्ण जीवन जीने को मजबूर हो जाती हैं. नाटक में दिखाया गया कि सामाजिक उपेक्षा और कठिन परिस्थितियों के बीच एक महिला का गांव के एक युवक से संबंध बनता है, जिससे गबरघिचोर नामक पुत्र का जन्म होता है. समाज उस बच्चे को अवैध घोषित कर देता है और मामला पंचायत तक पहुंच जाता है.

पंचायत के फैसले पर भारी पड़ी मां की ममता

नाटक के सबसे मार्मिक दृश्य में पंचायत न्याय की जगह स्वार्थ और अमानवीय सोच का परिचय देती है. विवाद का समाधान न निकलने पर पंच बच्चे को तीन हिस्सों में बांटने जैसा कठोर फैसला सुनाता है. लेकिन मां अपने हिस्से का अधिकार छोड़ते हुए बच्चे को किसी एक के हवाले करने की गुहार लगाती है. मां के त्याग, ममता और करुणा को देखकर पंचायत की आंखें खुल जाती हैं और अंततः फैसला गलीज बहू के पक्ष में सुनाया जाता है. इसके साथ ही मां को अपने पुत्र का पूरा अधिकार मिल जाता है.

कलाकारों ने बांधा समां

लोकगीत और लोकसंगीत से भरपूर इस नाटक को कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से प्रभावशाली बना दिया. नाटक में पंच की भूमिका मिथिलेश कुमार पांडेय, गलीज बहू की भूमिका सिंपी सिंह, गलीज की भूमिका मुकेश कुमार, गड़बड़ी की भूमिका अमन कुमार, गबरघिचोर की भूमिका कुंदन कुमार तथा जल्लाद की भूमिका प्रेम प्रकाश सैनिक ने निभाई.

रूप सज्जा का दायित्व जयप्रकाश मिश्र ने संभाला, जबकि संगीत में अखिलेश सिंह, लवकुश कुमार, अभिजीत कुमार, शशि भूषण शर्मा, सऊद आलम, भोला सिंह, आसिफ हसन, राजीव रंजन त्रिपाठी, हुस्ना फातिमा और संजय गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित

कार्यक्रम में वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी दानापुर अतुल कुमार, साहित्यकार अनिल सुलभ, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष, जेएनएल कॉलेज की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) मधु प्रभा सिंह, मनीष कुमार, दीनानाथ प्रसाद यादव सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और रंगकर्मी उपस्थित रहे.

नाटक के समापन पर दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की जमकर सराहना की और भिखारी ठाकुर की लोकनाट्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने के प्रयासों की प्रशंसा की.


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