पटना समेत 13 नगर निकायों का कचरा पहुंचेगा बैरिया, 514 करोड़ में बनेगा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट

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नगर निगम के अधिकारी

रामचक बैरिया में 514 करोड़ की लागत से एक बड़ा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगने जा रहा है. यह प्लांट पटना सहित 13 नगर निकायों के ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करेगा. कचरे से बिजली, बायोगैस और खाद का उत्पादन होगा, जिससे प्रदूषण कम होगा.

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Patna Waste to Energy Plant: पटना नगर निगम सहित आसपास के 13 नगर निकायों से निकलने वाले ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए रामचक बैरिया में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना के तहत वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किया जाएगा. इस परियोजना के लिए गुरुवार को नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना नगर निगम और परियोजना संचालन एजेंसी मगध रिसोर्स रिकवरी सस्टेनेबल सॉल्यूशंस लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए.

514 करोड़ की परियोजना, 40 एकड़ में बनेगा प्लांट

रामचक बैरिया में 40 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस प्लांट की कुल लागत करीब 514 करोड़ रुपये होगी. इसमें सरकार की ओर से 126 करोड़ रुपये का सहयोग दिया जाएगा, जबकि शेष 388 करोड़ रुपये का निवेश एजेंसी स्वयं करेगी. परियोजना को पीपीपी मॉडल पर दो वर्ष छह माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. निर्माण के बाद एजेंसी अगले 20 वर्षों तक इसका संचालन और रखरखाव करेगी.

1607 टन कचरे का होगा प्रतिदिन निस्तारण

इस परियोजना के तहत प्रतिदिन 1607 टन ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा. इसमें अकेले पटना नगर निगम से 1250 टन तथा आसपास के 12 नगर निकायों से 357 टन कचरा बैरिया पहुंचेगा. परियोजना के दायरे में दानापुर, फतुहा, खगौल, फुलवारी, बख्तियारपुर, मसौढ़ी, बिहटा, संपतचक, मनेर, नौबतपुर, पुनपुन और खुशरूपुर नगर निकाय शामिल हैं.

कचरे से बनेगी बिजली, गैस और खाद

परियोजना के तहत कई आधुनिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

  • 15 मेगावाट वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से बिजली का उत्पादन होगा.
  • 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायो मीथेनेशन प्लांट में गीले कचरे से बायोगैस तैयार होगी.
  • 700 टन प्रतिदिन क्षमता के कम्पोस्टिंग प्लांट में जैविक खाद बनाई जाएगी.
  • मटेरियल रिकवरी सेंटर में पुनर्चक्रण योग्य कचरे की छंटाई कर आरडीएफ ईंधन तैयार किया जाएगा.
  • 325 टन प्रतिदिन क्षमता का सुरक्षित लैंडफिल भी विकसित किया जाएगा.

कचरे के पहाड़ बनने से मिलेगी राहत

यह परियोजना भारत सरकार के आर्थिक कार्य विभाग और शहरी कार्य मंत्रालय से स्वीकृत देश की चुनिंदा एकीकृत कचरा प्रबंधन योजनाओं में शामिल है. इसके शुरू होने से खुले में कचरा फेंकने और लैंडफिल साइटों पर कचरे के पहाड़ बनने की समस्या में कमी आएगी. साथ ही प्रदूषण और विषैली गैसों के उत्सर्जन पर भी नियंत्रण होगा.

13 सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी करेगी निगरानी

परियोजना की पारदर्शी निगरानी के लिए पटना नगर आयुक्त की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित की गई है. इसमें सभी 12 सहयोगी नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी सदस्य होंगे.

बिजली और गैस बेचकर होगी आय

परियोजना संचालित करने वाली एजेंसी कचरे से तैयार बिजली और बायोगैस को बिहार सरकार एवं संबंधित विभागों को बेचकर राजस्व अर्जित करेगी. इसके लिए बिजली विभाग के साथ अलग से समझौता भी किया जा रहा है. प्लांट के निर्माण के लिए एजेंसी को 30 महीने का समय दिया गया है.

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हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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