एक्सक्लूसिव : पटना में गंगा किनारे 500 मीटर के दायरे में चल रहे दर्जनों ईंट भट्ठे, नियमों की अनदेखी से उठ रहे सवाल
पटना जिले में 325 ईंट भट्ठों में से आधे से अधिक 2022 के पर्यावरण दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं. गंगा किनारे, आबादी और राष्ट्रीय राजमार्गों से दूरी के नियमों की जमकर अनदेखी हो रही है.
Patna Brick Kilns at Ganges Bank: जिले में 325 ईंट भट्ठे हैं, जिनमें 155 गंगा के किनारे स्थित हैं. इनमें आधे से अधिक के मानकों का उल्लंघन करने की बात सामने आ रही है. वर्ष 2022 में लागू नये पर्यावरण दिशा-निर्देशों के अनुसार गंगा तट से 500 मीटर के दायरे में ईंट भट्ठे का संचालन नहीं किया जा सकता है. इसके बावजूद इस दायरे में कई ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं.
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इसी तरह ईंट भट्ठों की आबादी से कम-से-कम 800 मीटर की दूरी जरूरी है, लेकिन कई भट्ठे इस मानक का भी पालन नहीं कर रहे हैं. यहां तक कि कुछ भट्ठा संचालकों द्वारा पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र लिये बिना मिट्टी की खुदाई किये जाने की बात भी सामने आ रही है.
नदी से दूरी के नियम में बार-बार बदलाव भी वजह
गंगा किनारे स्थित ईंट भट्ठों द्वारा न्यूनतम 500 मीटर दूरी के नियम के उल्लंघन के पीछे अलग-अलग समय में नियमों में हुए बदलाव को भी जिम्मेदार माना जा रहा है. वर्ष 2000 से पहले नदी तट से ईंट भट्ठों की न्यूनतम दूरी 500 मीटर निर्धारित थी. बाद में अलग-अलग समय पर इस दूरी को घटाकर 100 मीटर और फिर 50 मीटर तक किया गया. बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से वर्ष 2015 में जारी दिशा-निर्देशों में भी दूरी महज 50 मीटर कर दी गयी थी. हालांकि वर्ष 2022 में जारी नये दिशा-निर्देशों में नदी से न्यूनतम दूरी फिर बढ़ाकर 500 मीटर कर दी गयी.
अलग-अलग समय में ईंट भट्ठों की स्थापना होने के कारण कई भट्ठे उस समय लागू नियमों के अनुसार संचालित हो रहे थे. हालांकि कुछ ऐसे ईंट भट्ठे भी हैं, जो नदी से 50 मीटर से भी कम दूरी पर हैं. ऐसे भट्ठों के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने स्थापना के समय निर्धारित मानकों का उल्लंघन किया था और अब भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.
आबादी बढ़ने से कई भट्ठे बस्तियों के करीब पहुंचे
वर्ष 2022 के पर्यावरण दिशा-निर्देशों के अनुसार ईंट भट्ठों की आबादी से न्यूनतम दूरी 800 मीटर होनी चाहिए. जिले के आधे से अधिक ईंट भट्ठे इस मानक का पालन नहीं कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि कई ईंट भट्ठों की स्थापना के समय आसपास पर्याप्त दूरी पर आबादी थी, लेकिन समय के साथ बस्तियों का विस्तार होने से अब घर इनके नजदीक तक पहुंच गये हैं. इससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की आशंका है.
रेलवे लाइन और एनएच से दूरी के नियम भी ताक पर
वर्ष 2022 के पर्यावरण दिशा-निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग से ईंट भट्ठों की न्यूनतम दूरी 200 मीटर और फोरलेन से 300 मीटर होनी चाहिए. इसी तरह रेलवे लाइन से भी ईंट भट्ठों की न्यूनतम दूरी 200 मीटर निर्धारित है. इसके बावजूद जिले में कई जगह राष्ट्रीय राजमार्ग, फोरलेन या रेलवे लाइन से महज 100 से 150 मीटर की दूरी पर ही ईंट भट्ठे संचालित होने की बात सामने आ रही है.
मिट्टी की खुदाई को लेकर ईंट निर्माता संघ की अलग राय
बिहार ईंट निर्माता संघ के अध्यक्ष मुरारी कुमार मनु का कहना है कि ईंट बनाने के लिए नदी किनारे की मुलायम मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो जाती है. उनका दावा है कि नदी किनारे की गाद निकालने से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता.
उन्होंने कहा कि पर्यावरण स्वच्छता प्रमाणपत्र लेकर मिट्टी की खुदाई करने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. माइनिंग टैक्स एक लाख रुपये से बढ़कर ढाई लाख रुपये हो गया है, जबकि जीएसटी भी एक प्रतिशत से बढ़ाकर छह प्रतिशत कर दी गयी है. इन वजहों से हर साल दो-चार ईंट भट्ठे बंद होते जा रहे हैं.
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