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बिहार में मोबाइल टावर लगाने के लिए नहीं लगाना होगा चक्कर, यहां करें ऑनलाइन आवेदन, मिलेगी मंजूरी

बिहार के शहरी निकायों में मोबाइल टावर या अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने को लेकर अब आवेदकों को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे. अब सरकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदनों को मंजूरी दी जाएगी.

By Prabhat Khabar Print Desk
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सांकेतिक फोटो
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सोशल मीडिया

बिहार के शहरी निकायों में मोबाइल टावर या अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने को लेकर अब आवेदकों को अलग-अलग सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे. अब सरकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदनों को मंजूरी दी जाएगी.

बिहार मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल्स और संबंधित दूरसंचार अवसंरचना नियमावली- 2020 की मंजूरी मिलने के बाद मोबाइल टावर या अंडरग्राउंड ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने से संबंधित आवेदनों को ऑनलाइन ही वेबसाइट http://rowbihar.in पर मंजूरी दी जा रही है. राज्य सरकार ने नगर विकास एवं आवास विभाग को इसके लिए नोडल मनोनीत किया है.

इस वित्तीय वर्ष अब तक 3918 ऑनलाइन आवेदन मिले, जिनमें से 25 को एनओसी दी जा चुकी है. नियमावली के तहत सबसे अधिक 270 आवेदन पटना जिले से मिले हैं. इसके साथ ही गया, पूर्वी चंपारण, नालंदा और मुजफ्फरपुर जिले के लिए भी करीब 200 या उससे अधिक आवेदन मिले. सबसे कम 27 आवेदन शिवहर, जबकि 28 आवेदन अरवल जिले के लिए मिले.

कुल मिला कर चार जिलों में 200 से अधिक, 12 जिलों में 100-200 के बीच, जबकि 22 जिलों में 100 से कम आवेदन मिले. रिन्युअल के लिए एक भी आवेदन नहीं मिला है. नियमावली नयी होने के साथ ही बीच में कोविड संक्रमण की मुश्किलों के चलते आवेदनों का निबटारा थोड़ा धीमा रहा, लेकिन अब इसकी मॉनीटरिंग में तेजी लायी जा रही है.

वेबसाइट पर मिलने वाले आवेदनों का संबंधित निकाय व पंचायत स्तर पर ही निबटारा कर ऑनलाइन किया जाना है, लेकिन किसी भी तरह के विवाद के निबटारे को लेकर राज्य स्तर पर नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव, जबकि जिला स्तर पर संबंधित डीएम की अध्यक्षता में दूरसंचार समिति बनायी गयी है.

जिला स्तरीय समिति में संबंधित जिले के एसपी व डीडीसी सहित वन विभाग, पथ निर्माण, भवन निर्माण, नगर आयुक्त व कार्यपालक पदाधिकारी तथा टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर के सर्किल प्रमुख को शामिल किया गया है. यह कमेटी किसी भी आपत्ति की स्थिति में 30 दिनों के भीतर बैठक बुला कर विवादित मामलों का निबटारा करेगी.

निर्णय से असंतुष्ट होने पर द्वितीय अपीलीय प्राधिकार के रूप में राज्यस्तरीय कमेटी के समक्ष आवेदन किया जा सकेगा. राज्यस्तरीय कमेटी में गृह, राजस्व एवं भूमि सुधार, आपदा प्रबंधन, सूचना-प्रावैधिकी, वन एवं पर्यावरण विभाग, भवन निर्माण, पथ निर्माण, बीएसएनएल व एनएचएआइ के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है.

POSTED BY: Thakur Shaktilochan

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