Jayprakash Narayan : क्या थी संपूर्ण क्रांति, जिसका नारा लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने दिया था

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Oct 2022 5:19 AM

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लोकनायक जेपी नें कहा था कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियां राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति शामिल हैं. इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रांति होती है.

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लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पटना के गांधी मैदान से सम्पूर्ण क्रांति का नारा दिया था. जेपी ने सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये किया था. गांधी मैदान 18 मार्च 1974 को लाखों लोग जात-पात, तिलक, दहेज और भेद-भाव का संकल्प लेते हुए जेपी के सम्पूर्ण क्रांति से जुड़ गए. बिहार से भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुई इस क्रांति की तपिश ने केंद्र में कांग्रेस की सत्ता को उखाड़ फेंका था.

सात क्रांतियां मिलाकर सम्पूर्ण क्रांति होती है

लोकनायक जेपी नें कहा था कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियां राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति शामिल हैं. इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रांति होती है.

गांधी मैदान से एक नारा गुंजा था

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के आह्वान पर हजारों-हजार लोगों ने अपने जनेऊ तोड़ दिये थे. उस दिन पटना के गांधी मैदान से एक नारा गुंजा था. “जात-पात तोड़ दो, तिलक-दहेज छोड़ दो. समाज के प्रवाह को नई दिशा में मोड़ दो.”

भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने की क्रांति 

लोकनायक ने उस दिन गांधी मैदान में कहा था कि यह आंदोलन सिर्फ छात्र संघ समिति की मांगों की पूर्ति के लिए ही नहीं, यह सम्पूर्ण क्रांति की शुरुआत है. उन्होंने कहा था कि भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाना और जनता का राज कायम करने का यह आंदोलन है. जेपी ने कहा था कि समाज से अन्याय और शोषण का अंत कर एक नैतिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक क्रांति करने का यह आंदोलन है.

जेपी ने कहा था कि सम्पूर्ण क्रांति का यह आंदोलन समाज और व्यक्ति के जीवन के हर पहलू में क्रांतिकारी परिवर्तन और विकास के लिए हैं. उन्होंने कहा था कि इस क्रांति का मकसद सिर्फ इतना ही नहीं की केवल शासन बदले बल्कि यह भी है कि व्यक्ति और समाज भी बदले और विकास की ओर आगे बढ़े.

जेपी आंदोलन से डर गई थी इंदिरा गांधी 

वर्ष 1975 में जब अदालत में चुनाव के दौरान इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था. तब जय प्रकाश ने विपक्ष को एकजुट किया और उनके इस्तीफे की मांग की. इस बात से इंदिरा गांधी ने डर कर देश में आपातकाल लगा दिया और हजारों विपक्षी नेताओं सहित जेपी को गिरफ्तार करवा दिया था.

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