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इंस्पेक्टर सीख रहे साइबर अपराध के खिलाफ लड़ना और जांच करना

Updated at : 20 May 2025 1:25 AM (IST)
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इंस्पेक्टर सीख रहे साइबर अपराध के खिलाफ लड़ना और जांच करना

साइबर अपराध के बढ़ते मामलों से निबटने के लिए आर्थिक अपराध इकाइ (इओयू) ने इंस्पेक्टर स्तर के अफसरों को साइबर फॉरेंसिक और ट्रेसिंग तकनीक की विशेष ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है

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संवाददाता, पटना साइबर अपराध के बढ़ते मामलों से निबटने के लिए आर्थिक अपराध इकाइ (इओयू) ने इंस्पेक्टर स्तर के अफसरों को साइबर फॉरेंसिक और ट्रेसिंग तकनीक की विशेष ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है. 19 मई से शुरू हुए पहले बैच में राज्यभर से आये 40 इंस्पेक्टरों को पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है. आर्थिक अपराध इकाई साइबर के डीआइजी संजय कुमार का कहना था कि क्राइम का मोड बदला है. जैसे-जैसे तकनीक उन्नत होागी साइबर क्राइम चुनौती बनेगा. साइबर अपराधी हर वर्ग को निशाना बना रहे हैं. डीएसपी अमरजीत सिंह और ट्रेनर उदित शर्मा ने इस बैच को साइबर अपराध की जटिलताओं से निबटने की बारीकियां बतायीं. प्रशिक्षण में अफसरों को सोशल मीडिया कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और बैंकिंग संस्थानों से साक्ष्य प्राप्त करने की प्रक्रिया, साइबर फॉरेंसिक विश्लेषण, ट्रांजेक्शन ट्रेसिंग और केस डायरी के तकनीकी लेखन जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दी जा रही है. प्रशिक्षण के फोकस बिंदु साइबर अपराध की रिपोर्टिंग प्रक्रिया डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने के तरीके साइबर क्राइम की कैटेगरी डिजिटल साक्ष्य को सुरक्षित रखना चौंकाते हैं आंकड़े 2018 में बिहार में साइबर अपराध के केवल 374 मामले थे, जो 2024 में बढ़कर 5,274 हो गए. इस वर्ष अब तक 6.3 लाख फ्रॉड कॉल दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 1.2 लाख शिकायतें ‘चक्षु’ एप के जरिये आयी हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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