बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नाम और DP से बना फर्जी WhatsApp: अधिकारियों को भेजे जा रहे संदेश, पटना साइबर थाना में जांच शुरू

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अनुसंधान करती पटना साइबर सेल की टीम. सांकेतिक तस्वीर- AI Generated

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साइबर अपराधियों ने बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को निशाना बनाया है. उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी WhatsApp अकाउंट से विभागीय अधिकारियों को संदेश भेजे जा रहे हैं. मामले में पटना साइबर थाने में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

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पटना. साइबर अपराधियों ने अब सीधे निर्वाचन विभाग के शीर्ष नेतृत्व को ही निशाने पर ले लिया है. बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के पदनाम और आधिकारिक तस्वीर (डीपी) का दुरुपयोग कर अज्ञात साइबर ठगों द्वारा फर्जी 'व्हाट्सएप बिजनेस अकाउंट' बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस फर्जी खाते के जरिए राज्यभर के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों को धड़ल्ले से संदिग्ध संदेश भेजे जा रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय की साइबर अपराध व सुरक्षा इकाई ने पटना साइबर थाने को प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

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डीजीपी कार्यालय को मिली थी गोपनीय शिकायत

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस गंभीर फर्जीवाड़े के संबंध में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कार्यालय को गोपनीय शिकायत प्राप्त हुई थी. शिकायत में साक्ष्यों के साथ बताया गया कि असामाजिक तत्वों ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार की पहचान की चोरी कर एक बिजनेस व्हाट्सएप अकाउंट तैयार किया है. इसके जरिए विभागीय अधिकारियों और चुनाव ड्यूटी से जुड़े कर्मियों को प्रशासनिक लहजे में भ्रामक संदेश भेजे जा रहे हैं, ताकि उनसे आंतरिक सूचनाएं हासिल की जा सकें या उन्हें किसी भ्रम में डाला जा सके.

तीन विदेशी/संदिग्ध नंबरों का हुआ इस्तेमाल

साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई की आरंभिक जांच में सामने आया है कि इस फर्जी खाते को संचालित करने के लिए तीन संदिग्ध मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया है. पत्राचार में +84 795528704, +84 788584758 और +84 788417605 नंबरों का उल्लेख किया गया है. साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, नंबरों का कंट्री कोड (+84) वियतनाम का प्रतीत हो रहा है, जिसका इस्तेमाल शातिर साइबर ठग वीपीएन या वर्चुअल नंबरों के जरिए अपनी पहचान छिपाने के लिए करते हैं. साइबर इकाई ने इसे सीधे तौर पर 'आइडेंटिटी थेफ्ट' (पहचान की चोरी), धोखाधड़ी और संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का सुनियोजित षड्यंत्र माना है.

डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगालने में जुटी साइबर सेल

मुख्यालय के निर्देश पर पटना साइबर थाने की विशेष तकनीकी टीम ने मामले की गहन पड़ताल शुरू कर दी है. साइबर सेल इन नंबरों के आईपी एड्रेस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और व्हाट्सएप के सर्वर से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट्स जुटाने में लग गई है. पुलिस यह भी खंगाल रही है कि इन नंबरों से निर्वाचन अधिकारियों को किस तरह के निर्देश या लिंक भेजे गए थे और क्या इसके जरिए किसी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी या संवेदनशील डेटा चुराने का प्रयास तो नहीं किया गया था. जल्द ही इन नंबरों को ब्लॉक कराने के साथ ऑपरेटरों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जाएगी.

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