Doctor Murder in Patna: डॉक्टर सुरभि मर्डर केस में 5 अनसुलझे सवाल, पुलिस को देर से बताया गया, खून का दाग भी नहीं मिला

डॉक्टर सुरभि राज की हत्या
Doctor Murder in Patna: पटना में एशिया हॉस्पिटल की संचालक डॉक्टर सुरभि राज की शनिवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड में कई अनसुलझे सवाल हैं जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है.
Doctor Murder in Patna: बिहार की राजधानी पटना के अगम कुआं में एशिया हॉस्पिटल में शनिवार को बदमाशों ने दिनदहाड़े अस्पताल में घुसकर महिला डॉक्टर को गोलियों से भून दिया. इस घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया. मृतक महिला एशिया हॉस्पिटल की संचालक डॉक्टर सुरभि है. इनकी लाश केबिन में मिली. बदमाशों ने उनको सात गोलियां मारी थीं. गोली लगने से सुरभि गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिन्हें इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन वह नहीं बच पाईं. इस घटना के बाद से कई ऐसे अनसुलझे सवाल है जिसका जवाब मिल जाये तो सब कुछ साफ हो जाएगा.
थर्ड फ्लोर पर मर्डर हुआ लेकिन किसी को पता नहीं चला
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि सुरभि का चैंबर अस्पताल के थर्ड फ्लोर पर था. बिना परमिशन चैंबर के अंदर किसी को घुसने की इजाजत नहीं थी. शनिवार को दोपहर के 2 बजे उन्हें गोली मारी गई. उस वक्त हॉस्पिटल में मरीज और स्टाफ मौजूद थे, लेकिन किसी ने गोली चलने की आवाज नहीं सुनी और ना ही किसी को वहां से आते- जाते देखा.
डॉ सुरभि के पति ने ससुर से क्यों छिपाई बात
हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ सुरभि के पति राकेश रौशन अपने ससुराल में ही रहते थे. सुरभि के साथ राकेश भी पूरा हॉस्पिटल देखते थे. सुरभि को गोली लगने की बाद जब उन्होंने अपने ससुर यानि सुरभि के पिता को कॉल किया तो गोली लगने का जिक्र नहीं किया. राकेश के ससुर जब अस्पताल पहुंचे फिर वो गोली लगने वाली बात छिपाते रहे.
घटनास्थल से खून के दाग क्यों मिटाए गए
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि जहां गोली मारी गई वहां खून का दाग नहीं था जबकि हॉस्पिटल स्टाफ ने कहा कि गोली लगने के बाद सुरभि का लगभग 4 लीटर खून बह चुका था. ऐसे में सवाल उठता है कि सुरभि की हत्या के बाद पूरे चैंबर से खून के निशान क्यों मिटाए गए?
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पुलिस को देर से क्यों सूचना दी गई
सुरभि को उनके चैम्बर में दोपहर करीब 2 बजे गोली मारी गई लेकिन पुलिस को 4 बजे के आसपास इसकी सूचना दी गई. गोली लगने के बाद ऐसा अस्पताल में ही उनका इलाज किया गया. जब तक पुलिस आती 6 बुलेट निकाला जा चुका था और क्राइम सीन से खून साफ कर दिया गया था.
कुछ दिन पहले क्यों बदले गए कैमरे
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि कुछ दिन पहले ही एशिया अस्पताल में CCTV कैमरों को बदला गया था. इस वजह से हॉस्पिटल के अंदर का एक भी कैमरा काम नहीं कर रहा था. सिर्फ हॉस्पिटल के मुख्य दरवाजे का सीसीटीवी कैमरा ही काम कर रहा था. हॉस्पिटल से बाहर निकलने के लिए 3 गेट और भी हैं. स्टाफ के मुताबिक अपराधी यहीं से भागे. जबकि जांच करने आई पुलिस का कहना है कि ये गेट पिछले कई दिनों से खुले ही नहीं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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