बिहार के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, पहली बार खुलेंगी 44 हाईटेक नर्सरी, जानिए सम्राट सरकार का पूरा प्लान

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सांकेतिक तस्वीर

Bihar Government: बिहार के गन्ना किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. राज्य में पहली बार 44 हाईटेक गन्ना नर्सरी खोली जाएंगी, जहां 2.20 करोड़ उन्नत पौधे तैयार होंगे. इससे किसानों को कम लागत में बेहतर बीज मिलेगा, उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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Bihar Government: बिहार सरकार ने गन्ना किसानों की आय बढ़ाने और खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य में पहली बार 44 गन्ना नर्सरी खोली जाएंगी. इन नर्सरियों में उन्नत और रोगमुक्त गन्ने के पौधे तैयार किए जाएंगे. सरकार का दावा है कि इससे गन्ने का उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की लागत घटेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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राज्य में फिलहाल करीब 2.21 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है. सरकार अब इसका दायरा और बढ़ाना चाहती है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए निजी-जन भागीदारी (PPP) मॉडल पर नर्सरी विकसित की जाएगी.

44 नर्सरियों में तैयार होंगे 2.20 करोड़ पौधे

योजना के तहत हर नर्सरी में करीब 5 लाख उन्नत प्रजाति के गन्ने के पौधे तैयार किए जाएंगे. इस तरह कुल 2 करोड़ 20 लाख पौधे किसानों के बीच वितरित किए जाएंगे. इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज मिलेगा और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.

25 नई चीनी मिलों की तैयारी से जुड़ा है प्लान

सरकार राज्य में 25 नई चीनी मिलें खोलने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही है. इसके लिए गन्ने का रकबा बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है. नई नर्सरियों का मकसद भी अधिक से अधिक किसानों को गन्ने की खेती से जोड़ना है, ताकि भविष्य में चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल मिल सके.

कौन कर सकता है आवेदन?

गन्ना उद्योग विभाग ने इस योजना के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. किसान, किसान उत्पादक संगठन (FPO), जीविका समूह, निजी उद्यमी, चीनी मिल संचालक और गुड़ उद्यमी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. योग्य आवेदकों का चयन होने के बाद विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाएगा.

गैर चीनी मिल क्षेत्रों में भी खुलेगी नर्सरी

ईखायुक्त अनिल कुमार झा ने बताया कि नर्सरी सिर्फ चीनी मिल वाले इलाकों तक सीमित नहीं रहेगी. गैर चीनी मिल क्षेत्रों में भी इसे शुरू किया जाएगा. इससे नए इलाकों में गन्ने की खेती का विस्तार होगा. साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

रोगमुक्त पौधों से बढ़ेगा उत्पादन

नर्सरी में वैज्ञानिकों की निगरानी में उन्नत और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जाएंगे. इससे रेड रॉट जैसी बीमारियों का खतरा काफी कम होगा. बेहतर पौधों के इस्तेमाल से गन्ने की पैदावार बढ़ेगी और चीनी रिकवरी भी पहले से अधिक होगी. इसका फायदा किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों को भी मिलेगा.

एक से दो महीने की होगी बचत

नर्सरी में तैयार पौधे सीधे खेत में लगाए जाएंगे. इससे किसानों का एक से दो महीने का समय बचेगा. खाली समय में किसान दूसरी फसल भी उगा सकेंगे. इससे उनकी अतिरिक्त आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

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कम खर्च, ज्यादा फायदा

अभी अधिकांश किसान पारंपरिक तरीके से गन्ने की खेती करते हैं. इसमें ज्यादा बीज लगता है और रोग लगने का खतरा भी अधिक रहता है. कई बार आधे से ज्यादा पौधे खराब हो जाते हैं.

नई योजना में सिंगल बड (एकल कली) तकनीक का इस्तेमाल होगा. इस तकनीक से कम लागत में अधिक पौधे तैयार किए जाते हैं. जहां पारंपरिक खेती में प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल बीज की जरूरत होती है, वहीं इस तकनीक में सिर्फ 5 से 7 क्विंटल बीज से काम चल जाता है. इससे किसानों की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा.

किसानों और उद्योग दोनों को होगा फायदा

सरकार का मानना है कि यह योजना सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी. इससे गन्ने की खेती का विस्तार होगा, चीनी उद्योग को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. आने वाले वर्षों में इसका सीधा लाभ बिहार के लाखों गन्ना उत्पादक किसानों को मिलने की उम्मीद है.

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