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Bihar Politics: कांग्रेस प्रभारी ने बताया टूट का कारण, तेजस्वी को लेकर दिया यह बयान

लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने बिहार में भाजपा को परास्त करने के लिए के महागठबंधन (Mahagathbandhan) बनाया था. लेकिन, वह धीरे-धीरे बिखर गया.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
राजद और कांग्रेस का टूट गया बंधन
राजद और कांग्रेस का टूट गया बंधन
प्रभात खबर

राजेश कुमार ओझा

पटना. लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने बिहार में भाजपा को परास्त करने के लिए के महागठबंधन (Mahagathbandhan) बनाया था. लेकिन, वह धीरे-धीरे बिखर गया. महागठबंधन कभी हम के जीतन राम मांझी ( Jitan Ram Manjhi) शामिल थे. रालोसपा के उपेन्द्र कुशवाहा ( Upendra Kushwaha)और मुकेश सहनी की वीआईपी (VIP of Mulesh Sahni) शामिल थे. लेकिन, अब राजद की बड़ी सहयोगी पार्टी कांग्रेस (Congress) ने भी महागठबंधन के बंधन से से अलग होने का फैसला कर लिया. कांग्रेस टूट का पूरा ठिकरा राजद पर फोड़ा है. कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास ने कहा कि राजद के तानाशाही रवैया के कारण हमने अपनी राह अलग चुन लिया.

गठबंधन के क्यों टूटे बंधन

सवाल यह है कि गठबंधन के बंधन क्यों रहे हैं. टूट के पीछे की वजह क्या है? क्या गठबंधन में शामिल पार्टियों की अति राजनीतिक महत्वाकांक्षा मुख्य वजह है या फिर महागठबंधन की सबसे बड़ी और सबसे मजबूत माने जाने वाली पार्टी राष्ट्रीय दल जनता दल का मनमाना व्यवहार इस टूट की मुख्य वजह बनी?

पहले मांझी ने छोड़ा साथ, अब कांग्रेस

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सबसे पहले महागठबंधन से अलग होने का फैसला किया. जीतन राम मांझी लगातार महागठबंधन में कोआर्डिनेशन कमेटी के गठन की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी मांग तवज्जो नहीं दी गई. आखिरकार अगस्त 2020 में जीतन राम मांझी महागठबंधन से अलग हो गए. महागठबंधन में टूट की यह पहली घटना थी. इसके बाद उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा ने महागठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया. उपेंद्र कुशवाहा विधानसभा में अपनी पार्टी के लिए सम्मानजनक सीट चाहते थे. लेकिन राजद ने उनकी मांगों को अनसुना कर दिया. आखिरकार रालोसपा ने महागठबंधन से अलग हो गई. फिर अक्टूबर 2020 को मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी ने महागठबंधन से अपना रिश्ता तोड़ लिया.

राजद नेता कांग्रेस को कमतर आंकते रहे

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राजद और वामदलों के साथ मिलकर महागठबंधन के घटक दल के तौर पर चुनाव लड़ा, लेकिन 70 सीट मिलने के बावजूद कांग्रेस 19 सीटों पर सिमट कर रह गई. ऊपरी तौर पर महागठबंधन बंधन में एकता बनी रही, लेकिन कांग्रेस के परफॉर्मेंस को लेकर राजद नेता अंदर ही अंदर नाराज थे. इधर, राजद की वामदलों से बढ़ती दोस्ती कांग्रेस को रास नहीं आ रही थी. कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा चुनाव में राजद ने कांग्रेस की तुलना में वामदलों को ज्यादा महत्व देना कांग्रेस को खलने लगा.

कांग्रेस विधायक दल के नेता का कहना है कि 30 से 40 सीटें ऐसी दी गई थीं, जहां पहले से ही हार तय थी. दूसरी तरफ वामदलों को मिलने वाली सीटों की संख्या भले ही कम थी, किंतु सबके सब मनचाही और जनाधार वाली थीं. सूत्र कहते हैं कि कांग्रेस को इसका मलाला था. यह नाराजगी 2021 के बिहार विधानसभा उपचुनाव के दौरान खुलकर सामने आई जब तारापुर और कुशेश्वरस्थान सीट के लिए राजद ने दोनों जगहों पर अपने प्रत्याशियों को खड़ा कर दिए. कांग्रेस ने इसे धोखा करार देते गठबंधन से अपना बंधन छोड़कर अलग हो गए.

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