बिहार विधानमंडल : शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा और सत्तापक्ष के बीच जारी रहा मनमुटाव

पटना : बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा और सत्तपक्ष के बीच मनमुटाव जारी रहा और सत्र के अंतिम दिन आज भी दोनों पक्षों द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और हंगामा किए जाने के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई. सत्तापक्ष अर्थात राजद, जदयू और कांग्रेस के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी […]
पटना : बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा और सत्तपक्ष के बीच मनमुटाव जारी रहा और सत्र के अंतिम दिन आज भी दोनों पक्षों द्वारा विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी और हंगामा किए जाने के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई. सत्तापक्ष अर्थात राजद, जदयू और कांग्रेस के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विदेश से कालाधन लाकर देश के प्रत्येक नागरिक के खाते में 15-15 लाख रुपये जमा करने का चुनावी वादा पूरा नहीं करने को लेकर बिहार विधानमंडल परिसर में धरना दिया. सत्तापक्ष के इस धरने ने सुबह ही दिन का सुर-ताल तय कर दिया.
बिहार विधानसभा की आज की कार्यवाही शुरू होने पर प्रतिपक्ष के नेता प्रेम कुमार ने कहा, सत्तापक्ष ने 29 नवंबर को नोटबंदी के मामले सदन के बीच आकर हंगामा और नारेबारी करने के दौरान, भाजपा सदस्या गायत्री देवी को चोट पहुंचाने, पार्टी का झंडा लहराने और रिपोटर्स के टेबुल पर चढ़ने आदि आचरण से सदस्यों ने सदन का अनुशासन तोड़ा है और इसके लिए राजद तथा कांग्रेस के छह सदस्यों को सदन से बर्खास्त किया जाना चाहिए.
बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने हालांकि यह कहा कि सदन में सभी दलों के नेताओं ने कल इस घटना की निंदा की थी और प्रधानमंत्री सहित अन्य लोगों के खिलाफ की गयी आपत्तिजनक टिप्पणियों और नारों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया है लेकिन भाजपा सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और सदन के बीच आकर विरोध जताने लगे.
भाजपा सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के बीच सत्तपक्ष के सदस्य भी अपनी अपनी सीटों से खड़े होकर विपक्ष के विरुद्ध नारेबाजी करने लगे. इसपर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. बिहार विधानसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे फिर से आहूत होने पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी जारी रही. इसे देखते हुए सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी.
बिहार विधानपरिषद की आज की कार्यवाही शुरु होते हुए राजद सदस्यों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, लालू प्रसाद और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ गत 28 नवंबर को की गयी आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा के खिलाफ सदन के बीच आकर नारेबाजी शुरू कर दी.
दूसरी ओर राज्य में वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनांतर्गत पिछले 10-11 महीने से भुगतान नहीं होने को लेकर लायेगये कार्यस्थगन प्रस्ताव पर सदन में सबसे पहले चर्चा कराने की मांग सभापति अवधेश नारायण सिंह द्वारा अस्वीकृत किए जाने के बाद भाजपा सदस्य रजनीश कुमार और नकी पार्टी के अन्य सदस्य भी खड़े हो गये.
सत्तापक्ष और विपक्ष के नारेबाजी, हंगामा और शोरशराबा के बीच सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कुछ विधायी कार्यों को संपन्न कराने के बाद सदन के सुचारु संचालन हेतु दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। लेकिन आग्रह अनसुनी किए जाने उन्होंने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.
विधानपरिषद की कार्यवाही दोपहर 12 बजे पुन: शुरू होने पर भी सदन में हंगामा जारी रहा. राजद नेता राबड़ी देवी जहां आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी द्वारा माफी मांगे जाने पर अड़ी रहीं. वहीं भाजपा सदस्य सबसे पहले अपने कार्यस्थगन पर चर्चा की मांग करते रहे.
भाजपा सदस्य मंगल पाण्डेय ने सदन में मौजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया कि वह राजद सदस्यों से हंगामा बंद करने तथा अपने स्थान पर लौटनेे को कहें, ताकि कार्यवाही चल सके. इस आग्रह पर नीतीश की ओर से कोई टिप्पणी नहीं किए जाने पर उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ‘लाचार’ और ‘निरीह’ बनकर इसे देख रहे हैं.
सत्तापक्ष और विपक्ष के शोर शराबे के बीच सभापति ने कुछ अन्य विधायी कार्य संपन्न कराए. फिर सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले परंपरानुसार मुख्यमंत्री से सत्र समापन वकतव्य देने को कहा.
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार विधानपरिषद के इस सत्र के दौरान कुल 39 ध्यानाकर्षण सूचनाएं स्वीकृत हुईं लेकिन सदन अव्यवस्थित रहने के कारण सभी सूचनाएं अनागत हुईं. उन्होंने कहा, विधानपरिषद के इस 184वें सत्र के लिए कुल 292 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई थीं. उनमें 281 को स्वीकृत किया गया और इस सत्र के लंबित प्रश्नों को आगामी सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखने का यथा संभव प्रयास किया जाएगा.
सभापति ने कहा, इस सत्र के दौरान शून्यकाल की कुल नौ सूचनाएं प्राप्त हुईं. जिनमें पांच स्वीकृत की गयीं पर सदन अव्यवस्थित रहने के कारण सभी सूचनाएं अनागत हुईं. उन्होंने बताया कि इस सत्र के दौरान कुल 34 निवेदनों की सूचनाएं प्राप्त हुईं. जिन्हें निवेदन समिति को विचारार्थ सुपुर्द कर दिया गया है. सभापति ने अपना समापन भाषण को पढ़ने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी.
विधानपरिषद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विपक्ष द्वारा नोटबंदी को लेकर सदन के भीतर लगाए गये नारे ‘‘कालाधन के तीन ‘दलाल’, सोनिया, लालू और केजरीवाल’ पर आपत्ति जताते हुए राबड़ी देवी ने कहा कि बिहार विधानपरिषद की कार्यवाही उस समय तक सामान्य नहीं होगी जबतक सुशील माफी नहीं मांगते. उन्होंने कहा, जबतक सुशील मोदी माफी नहीं मांगते सदन का केवल यह सत्र ही नहीं बल्कि अगले सत्र को भी वे चलने नहीं देंगी.
वहीं, बिहार विधानपरिषद स्थित अपने कक्ष में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी ने सत्तापक्ष पर पिछले पांच दिनों से लगातार सत्र बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘मैं इस जन्म में माफी नहीं मांगूंगा. किस बात की माफी, बल्कि मैं दो कदम आगे बढ़ते हुए लालू प्रसाद को ‘बेइमान’ और कांग्रेस को भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली पार्टी बताउंगा.’ उन्होंने चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद को सजा मिलने की चर्चा करते हुए कहा, ‘‘भ्रष्टाचारी को भ्रष्टाचारी ना कहें तो और क्या कहें? किसी भ्रष्टाचारी को इमानदार कैसे कहा जा सकता है?’
सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री पर दोनों सदन को बाधित करने वाले सत्तापक्ष के सदस्यों को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘यह प्रदेश में सत्ताधारी महागठबंधन में ‘दरार’ और ‘फांक’ को परिलक्षित करता है.’ बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता प्रेम कुमार ने सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा सदन को बाधित करने पर कहा कि यह सत्र ‘काला सत्र’ के रुप में याद किया जाएगा और इससे परिलक्षित होता है कि ‘जंगलराज 2′ की वापसी हो गयी है.
बिहार विधानसभा के इस सत्र के दौरान कुल 932 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 736 प्रश्न स्वीकृत हुए. स्वीकृत प्रश्नों में 10 अल्पसूचित, 600 तारांकित एवं 126 प्रश्न अतारांकित थे. सदन में 38 प्रश्न उतरित हुए। 64 प्रश्नों को सदन पटल पर रखा गया तथा 622 प्रश्न अनागत हुए. इस सत्र में कुल 177 निवेदन प्राप्त हुए, जिसमें 168 स्वीकृत हुए एवं 09 अस्वीकृत हुए। कुल 80 याचिकाएं प्राप्त हुई, जिनमें 67 स्वीकृत हुई.
इस सत्र में कुल 147 ध्यानाकर्षण सूचनाएं प्राप्त हुई, जिनमें 10 वक्तव्य के लिए स्वीकृत हुए तथा 135 सूचनाएं लिखित उतर के वास्ते संबंधित विभागों को भेजे गये एवं 02 अमान्य हुए. बिहार विधानमंडल के इस शीतकालीन सत्र के दौरान कुल छह बैठकें हुईं और इस दौरान वितीय वर्ष 2016-17 की द्वितीय अनुपूरक व्यय-विवरणी का उपस्थापन किया गया तथा बिहार वित सेवा (चयन द्वारा नियुक्ति: :निरसन) विधेयक 2016, बिहार राज्य फुटपाथ विक्रेता (जीविका संरक्षण एवं व्यापार विनियमन :निरसन) विधेयक 2016, बिहार राज्य वाहन करारोपण (संशोधन) विधेयक 2016, आर्यभट्ठ ज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2016, बिहार राज्य विशविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2016, बिहार विनियोग (संख्या -4) विधेयक 2016 को ध्वनिमत से पारित किया गया.
सत्र के प्रथम दिन 25 नवम्बर को बिहार लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक, 2016 को राज्यपाल देवानंद कुमार द्वारा दोनों सदनों के पुनर्विचार के लिए वापस किये जाने के बारे में आसन द्वारा सदन को सूचित किया गया.
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