नीतीश ने दिया जेटली के पत्र का जवाब, बिहार के साथ विशेष राज्य का दर्जा ही करेगा न्याय

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Sep 2015 6:47 AM

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख कर 14 वें वित्त आयोग से मिली राशि को लेकर उनके पत्रों का जवाब दिया है. पांच पन्नों के इस पत्र में नीतीश कुमार ने 18 सितंबर के जेटली के पत्र और इसके पहले अपनी ओर से सात सितंबर को भेजे […]

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख कर 14 वें वित्त आयोग से मिली राशि को लेकर उनके पत्रों का जवाब दिया है. पांच पन्नों के इस पत्र में नीतीश कुमार ने 18 सितंबर के जेटली के पत्र और इसके पहले अपनी ओर से सात सितंबर को भेजे पत्र का हवाला देते हुए दोहाराया है कि यदि केंद्र सरकार सही मायनों में बिहार के सामाजिक, आर्थिक और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में विकास चाहती है तो उसे विशेष राज्य का दर्जा देना होगा. इसके साथ ही अतिरिक्त सहायता और अनुदान भी मंजूर करना होगा.
सीएम ने अपने पत्र में कहा कि 13वें वित्त आयोग से मिली राशि और 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुपात में कोई मेल नहीं है. नीतीश ने अपने पूर्व के पत्रों में उठाये गये बिंदुओं को दोहराते हुए कहा कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य के लिए यह भेदभावपूर्ण है. बिहार के बेहतर विकास के लिए काफी कुछ करने की जरूरत है, लेकिन केंद्र के रवैये को देखते हुए लग रहा है कि आने वाले समय में कुछ मिलने नहीं जा रहा है. इन बातों पर ध्यान आकर्षित कराने के लिए तमाम सुसंगत और महत्वपूर्ण तथ्यों को उजागर किया गया है.
पत्र में कहा गया है कि 13वें वित्त आयोग की तुलना में 14वें वित्त आयोग में राज्यों के लिए ‘डिविसिव पुल’ की हिस्सेदारी में 136 फीसदी बढ़ायी गयी. वाबजूद इसके बिहार को तुलनात्मक रूप से शेयर देने में कोई बढ़ोतरी नहीं की गयी है. सभी राज्यों को मिलने वाले फंडों के क्षैतिज वितरण व्यवस्था के आधार पर इसे आसानी से समझा जा सकता है. पत्र में इस आर्थिक विषमता और भेदभाव को समझाने के लिए एक टेबल भी दिया गया है.
बिहार का उत्तरी हिस्सा हर साल नेपाल से आने वाली नदियों में बाढ़ आने से तबाह होता है. इससे राज्य को हर वर्ष अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है. फिर भी इसे विशेष पैकेज देने में आनाकानी की जा रही है. ऊर्जा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा कटौती की गयी है. इस क्षेत्र में पहले से राज्य के बकाये 4693 करोड़ का भुगतान नहीं किया गया.
बल्कि विशेष प्लान के तहत 2417 करोड़ जारी किया गया. इस पत्र में हाल में प्रधानमंत्री के दिये 1.25 लाख करोड़ के विशेष पैकेज की हकीकत का फिर से उल्लेख किया गया है. पत्र के अंत में सीएम ने लिखा है कि राज्य के सही दिशा में सार्वभौमिक विकास के लिए इस मुद्दे पर फिर से विचार करने की जरूरत है. राष्ट्र के समग्र विकास के लिए बिहार का चौमुखी विकास होना बेहद जरूरी है.
इस तरह घटती गयी बिहार की हिस्सेदारी
करों में हिस्सेदारी 2013-14 2014-15 2015-16
केंद्रीय कर में हिस्सा 37977.32 38082.05 50747.58
राज्य योजना 10108.99 26361.23 15086.01
गैर योजना 2086.01 2314.63 2948.01
केंद्रीय योजना 242.15 227.4 186.41
कुल 55063.58 66985.31 68968.14
(सभी आंकड़े करोड़ में)
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