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सीएम नीतीश कुमार ने कहा- पर्यावरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं, साढ़े आठ करोड़ पौधे और लगाये जायेंगे

Updated at : 20 Jan 2020 7:32 AM (IST)
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सीएम नीतीश कुमार ने कहा- पर्यावरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं, साढ़े आठ करोड़ पौधे और लगाये जायेंगे

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पर्यावरण के मुद्दे पर सरकार कभी कोई समझौता नहीं करेगी. राज्य के लोगों में पर्यावरण के मुद्दे पर जागृति आयी है. हाल में इस मुद्दे को लेकर की गयी पूरे बिहार की यात्रा के दौरान भी लोगों का पर्यावरण के प्रति उत्साह और जागृति देखने को मिली. […]

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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पर्यावरण के मुद्दे पर सरकार कभी कोई समझौता नहीं करेगी. राज्य के लोगों में पर्यावरण के मुद्दे पर जागृति आयी है. हाल में इस मुद्दे को लेकर की गयी पूरे बिहार की यात्रा के दौरान भी लोगों का पर्यावरण के प्रति उत्साह और जागृति देखने को मिली. यह सोशल वेलफेयर का काम है. इसमें सभी का सहयोग मिलना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने रविवार को जल-जीवन-हरियाली के समर्थन में गांधी मैदान में आधा घंटा तक आयोजित ऐतिहासिक मानव शृंखला के केंद्र में खड़े होने के बाद आम लोगों को उसी स्थान से संबोधित किया. मुख्यमंत्री ने मानव शृंखला के सफल आयोजन के लिए पूरे बिहार के लोगों को खासतौर से धन्यवाद भी दिया. इस दौरान जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने सीएम को तरुण भारत संघ की तरफ से ‘पर्यावरण संरक्षक’ सम्मान से सम्मानित किया.

सम्मान पाकर सीएम ने कहा कि यह उनका सम्मान नहीं है, बल्कि पूरे बिहार के लोगों का सम्मान है. कार्यक्रम के अंत में सीएम को जल से भरा ज्ञान कलश भी जल पुरुष ने भेंट करते हुए कहा कि सूबे की धरती का पेट सदा इसी तरह पानी से भरा रहे. सीएम ने कहा कि बापू की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर ही उनके विचार को ध्यान में रखते हुए जल-जीवन-हरियाली की अवधारणा को साकार किया गया है.

धरती जरूरत को पूरी कर सकती है, लालच को नहीं, इसे ध्यान में रखते हुए यह अभियान शुरू किया गया है. पर्यावरण की जो मौजूदा स्थिति है, अगर हम उसके प्रति जागरूक नहीं हुए, तो भविष्य में संकट आ जायेगा. जिस तरह से अचानक बाढ़ और सूखे की स्थिति प्रदेश में बन रही है, उसे दूर करने के लिए यह जरूरी है. इसके साथ ही नशामुक्ति और दहेज ए‌वं बाल विवाह के मुद्दे भी बेहद जरूरी है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल और हरियाली के बाद ही जीवन है. जल और पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए ही पूरी कार्ययोजना तैयार करके ही जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत की गयी है. इसे मिशन मोड में सभी जिलों में शुरू किया गया है. विभिन्न विभागों को भी इससे जोड़ा गया है. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी पोखर, आहर, पइन, कुओं को अतिक्रमण मुक्त किया जा रहा है. रेन वॉटर हर्वेस्टिंग का काम तेजी से चल रहा है. गंगा के जल को बरसात के मौसम में गया और राजगीर तक पहुंचाया जायेगा.

सीएम ने कहा कि राज्य के हरित आवरण को बढ़ाने के लिए 19 करोड़ पौधे लग चुके हैं. साढ़े आठ करोड़ पौधे अभी और लगने हैं. जल संरक्षण होगा, हरियाली बढ़ेगी, तभी पर्यावरण संतुलित होगा. इसे ध्यान में रखते हुए ही काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि घर-घर बिजली पहुंचाने के बाद अब सौर्य ऊर्जा पर खासतौर से काम किया जा रहा है. यही अक्षय ऊर्जा है.

पटना : नीतीश कुमार पर्यावरण संरक्षण पर काम करने वाले पहले सीएम : राजेंद्र

पटना : देश में ‘जल पुरुष’ के नाम से प्रसिद्ध रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार देश-दुनिया के पहले सीएम हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए काम किया है. वह पहले ऐसे सीएम हैं, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे बड़ी मानव शृंखला बनायी है. इस मानव शृंखला का निर्माण पर्यावरण के प्रति कॉमन फ्यूचर (सामान्य भविष्य) की चिंता को लेकर किया गया है.

पूरी दुनिया के साथ ही बिहार में भी पर्यावरण चेतना को लेकर पुरजोर पहल शुरू हो गयी है, यह बेहद सराहनीय कदम है. उन्होंने कहा कि भारत भाग्यशाली देश है, जहां नीतीश कुमार जैसे राजनेता हुए हैं. उन्होंने गंगा की अविरलता को बनाये रखने के लिए खासतौर से पहल की है. वह पहले ऐसे सीएम हैं, जिन्होंने प्रकृति को मानवता के समान सम्मान दिया है. यहां जल-जीवन-हरियाली के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है. बिहार को बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति से मुक्ति दिलाने के लिए यह बेहद जरूरी है. यह अभियान गांधी जी की विरासत को संजोये कर रखने का माध्यम भी है. राजेंद्र सिंह ने कहा कि पिछड़े-दलितों को समता से स्वावलंबी बनाने के लिए भी यह अभियान बेहद सहायक साबित होगा.

बाकी प्रदेश भी बिहार से सीखें : अतुल

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनइपी) के कंट्री हेड अतुल बगई ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान को बेहतरीन कार्यक्रम बताया. मानव शृंखला को अद्भुत कार्यक्रम बताते हुए उन्होंने कहा कि बिहार एकमात्र ऐसा प्रदेश हैं, जहां पर्यावरण संरक्षण विभाग के अलावा जल संसाधन विभाग जैसे दूसरे विभाग भी पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं.

दूसरे राज्यों को भी बिहार की इस पहल से सीख लेनी चाहिए. अन्य प्रदेश इससे प्रेरणा लेकर कार्ययोजना तैयार कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र भी इस कार्यक्रम का प्रतिनिधित्व करने की पहल करेगा. इसे आगे ले जाने के लिए व्यापक स्तर पर पहल की जायेगी. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी जिलों में यह कार्यक्रम एक साथ चलाया जा रहा है, यह सबसे बड़ी बात है.

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