पटना : अब आवासीय परिसर में भी कर सकते हैं मछलीपालन

Updated at : 28 Dec 2019 9:07 AM (IST)
विज्ञापन
पटना : अब आवासीय परिसर में भी कर सकते हैं मछलीपालन

90 फीसदी तक अनुदान पटना : अब आम आदमी अपने आवासीय परिसर में भी मछली उत्पादन व्यावसायिक उपयोग के लिए कर सकता है. दरअसल, राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से एक योजना तैयार की जा रही है. इसमें बायो फ्लॉक विधि से दस फुट लंबे, दस फुट चौड़े व काफी कम […]

विज्ञापन
90 फीसदी तक अनुदान
पटना : अब आम आदमी अपने आवासीय परिसर में भी मछली उत्पादन व्यावसायिक उपयोग के लिए कर सकता है. दरअसल, राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से एक योजना तैयार की जा रही है.
इसमें बायो फ्लॉक विधि से दस फुट लंबे, दस फुट चौड़े व काफी कम गहरे टैंक में मछली का उत्पादन किया जा सकेगा है. काफी कम क्षेत्र में एक स्थायी या अस्थायी निर्माण कर मछलीपालन होगा. सबसे बड़ी बात है कि राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभाग इस पर योजना पर लगभग 90 फीसदी अनुदान देने की तैयार कर रहा है.
विभाग के मंत्री डाॅ प्रेम कुमार ने अधिकारियों को नयी योजना की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये हैं. बायो फ्लॉक विधि में मछलीपालन में भी जैविक विधि अपनायी जाती है. वैसे मछली मल अधिक एकत्रित होने से पानी में अमोनिया बढ़ जाता है. अमोनिया मछलियों के लिए जहर का काम करता है. इससे मछलियां मर जाती हैं. बायो फ्लॉक विधि में जार में बैक्टीरिया पैदा किया जाता है. यह बैक्टीरिया मछली के 20 प्रतिशत मल को प्रोटीन में बदल देता है. मछली इस प्रोटीन को खा लेती है. बचा मल जार में नीचे जमा हो जाता है. इसे टोटी के जरिये निकाल दिया जाता है और मछलियों को कोई नुकसान नहीं होता है.
बायो फ्लॉक विधि में टैंक में पानी को साफ करने के लिए किसी प्रकार का केमिकल नहीं डाला जाता. इसमें होने वाली मछली पूर्ण रूप से जैविक होती है. बाजार में अधिक कीमत मिलती है.बायो फ्लॉक विधि में जार में हर चीज इंसानी कंट्रोल में होती है. तालाब में मछली का दाना ज्यादा गिरने या मल से अधिक केमिकल बनते हैं. इन्हें निकालने का साधन नहीं होता है.
पानी में ऑक्सीजन घुलना बंद हो जाता है. पानी में ऑक्सीजन घोलने के लिए तरह तरह के केमिकल डाले जाते हैं, जबकि जार में वेस्टेज को निकालने का पूरा साधन होता है. मछलियों को ज्यादा खुराक देने पर भी उन्हें नुकसान नहीं होता.
-राज्य में लगभग छह लाख टन तक होता है मछली उत्पादन.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन