मॉल व दुकान के श्रमिक लाभ से वंचित

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पटना : श्रम संसाधन विभाग के मुताबिक राज्यभर में असंगठित मजदूरों की संख्या लगभग 90 लाख है, लेकिन इनकी पहचान कर श्रम योजनाओं का लाभ दिलाने में श्रम अधिकारी पूरी तरह से नाकाम है. विभाग की धीमी गति के कारण अभी तक 16 लाख असंगठित श्रमिकों का निबंधन हो पाया है.दूसरी आेर राज्यभर में बड़े […]

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पटना : श्रम संसाधन विभाग के मुताबिक राज्यभर में असंगठित मजदूरों की संख्या लगभग 90 लाख है, लेकिन इनकी पहचान कर श्रम योजनाओं का लाभ दिलाने में श्रम अधिकारी पूरी तरह से नाकाम है. विभाग की धीमी गति के कारण अभी तक 16 लाख असंगठित श्रमिकों का निबंधन हो पाया है.दूसरी आेर राज्यभर में बड़े मॉल, होटल, स्कूल, दुकान में काम करने वाले लोग भी श्रम विभाग की योजना से वंचित है.

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यहां काम करने वालों को इएसआइसी व न्यूनतम मजदूरी तक का लाभ नहीं मिलता है, लेकिन अधिकारी ऑफिस में बैठकर योजना को पूरा करने के लिये लाखों रुपये प्रचार-प्रसार के नाम पर प्रतिमाह राज्यभर में खर्च करते है. इन्हीं कारणों से ही बिहार में प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना की गति भी धीमी है.
श्रम कानून की हो रही अनदेखी : श्रम कानून के तहत जहां भी 10 या उससे अधिक लोग एक साथ काम करते है.उनको इएसआइसी का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन राजापुर पुल और कुर्जी के एक बड़े मॉल में काम करने वाले लोगों ने बताया कि हर दिन 12 घंटे काम लिया जाता है.
साथ ही , न्यूनतम मजदूरी के नाम पर हर माह पांच से आठ हजार रुपया मिलता है, जो निश्चित तारीख को नहीं मिलता है. इसी तरह राजधानी में चलने वाले सैंकड़ों स्कूल हैं, जिनके शिक्षकों को श्रम कानून के तहत कोई लाभ नहीं मिल रहा है.
योजना से नहीं जुड़ रहे लोग : प्रधानमंत्री पेंशन योजना का प्रचार-प्रसार करने की जिम्मेदारी श्रम संसाधन विभाग के अधिकारियों के जिम्मे है. बावजूद इसके बिहार अपने लक्ष्य से 11 लाख की दूरी पर है.
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