सड़क सुरक्षा परिषद का नहीं दिखा असर
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़क सुरक्षा परिषद गठित हुई. लेकिन उसकी कारगर व्यवस्था नहीं दिख रही है. सड़क सुरक्षा परिषद में शामिल विभिन्न विभागों को जो टास्क सौंपे गये, वह सड़क पर उतरा नहीं दिख रहा है. घनी आबादी वाले इलाके में ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए ट्रैफिक थाना सहित पुलिस […]
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पटना : सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए सड़क सुरक्षा परिषद गठित हुई. लेकिन उसकी कारगर व्यवस्था नहीं दिख रही है. सड़क सुरक्षा परिषद में शामिल विभिन्न विभागों को जो टास्क सौंपे गये, वह सड़क पर उतरा नहीं दिख रहा है. घनी आबादी वाले इलाके में ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए ट्रैफिक थाना सहित पुलिस की व्यापक व्यवस्था का इंतजाम करना था.
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जो शहरी क्षेत्र में देखने को नहीं मिल रहा है. सड़कों पर साइनेज नहीं दिखता है, जो खतरों को लेकर संकेत करते हों. यह काम पथ निर्माण विभाग को करना है. जगह-जगह सीसीटीवी लगाकर ट्रैफिक की स्थिति को भी देखना है कि वाहनों की क्या रफ्तार रहती है ? न्यू बाइपास में खेमनीचक, अनीसाबाद मोड़, फुलवारीशरीफ इलाके में लोग मौत के साये में सड़क पर चलते हैं.
तेज रफ्तार में चलने वाले भारी वाहनों के रफ्तार पर नियंत्रण की कोई व्यवस्था नहीं होने से अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं. इसका परिणाम है कि राजधानी पटना सहित आसपास के क्षेत्रों में पिछले दस दिनों में लगभग डेढ़ दर्जन सड़क हादसे हुए. इसमें 11 लोगों की मौत हुई है. कई घायल भी हैं. इसे रोकने की कोई कारगर व्यवस्था नहीं दिख रही है.
मिले टास्क के अनुसार नहीं हुआ काम
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने सड़क सुरक्षा परिषद गठित की. परिवहन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया. इसके अलावा गृह, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण कार्य, नगर विकास, पथ निर्माण विभाग को शामिल किया गया. सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभागों को जो काम मिला उसके अनुसार काम नहीं दिख रहा है. घनी आबादी वाले इलाके में यातायात प्रबंधन काफी जरूरी है, ताकि ससमय दुर्घटना की स्थिति में आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके.
इसके रोकथाम के लिए ट्रैफिक थाना बनाना नितांत आवश्यक है. सड़कों पर यातायात नियंत्रण को लेकर साइनेज लगाना आवश्यक है. इसमें घनी आबादी वाले इलाके में इसका संकेत करना, गति पर नियंत्रण संबंधी साइनेज लगाना, स्कूल होने पर उसे दर्शाना आदि पथ निर्माण विभाग का है.
स्वास्थ्य विभाग को महत्वपूर्ण स्थलों पर ट्रॉमा सेंटर का निर्माण, आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों की व्यवस्था, एनएच व एसएच पर निजी ट्रॉमा सेंटर के साथ अनुबंध नीति तैयार करना है. नगर विकास व आवास विभाग को संवेदनशील सड़कों पर सीसीटीवी लगाने, गृह विभाग द्वारा पुलिस की व्यवस्था करना है.
सड़क हादसे
एक दिसंबर : पालीगंज के करकट बिगहा गांव के समीप ट्रक ने बाइक में टक्कर मारी. इसमें मां की मौत हो गयी, जबकि बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया.
दो दिसंबर : गांधी मैदान थाना क्षेत्र में जेपी गोलबंर के समीव सिटी बस ने स्कूटी सवार को टक्कर मारी.
चार दिसंबर : फुलवारीशरीफ में एफसीआइ मोड़ के समीप ट्रक ने बाइक सवार भाई-बहन को रौंदा. भाई की मौत, बहन घायल.
पांच दिसंबर : परसा में ट्रक ने बाइक सवार दंपती को कुचला.
छह दिसंबर : पंडारक थाना अंतर्गत एनएच पर ट्रक ने युवक को रौंदा. फुलवारीशरीफ टमटम पड़ाव के समीप धक्के से चंद्रदेव सिंह का निधन.
सात दिसंबर : पटना एम्स में इलाज के लिए बाइक पर जा रहे दंपती भुसौला मोड़ के समीप ट्रक से घायल.
नौ दिसंबर : पुलिस कॉलाेनी मोड़ के समीप ट्रक के धक्के से इंजीनियरिंग छात्र की मौत. नौबतपुर-मसौढ़ी मार्ग में रामपुर गांव के पास ट्रैक्टर की टक्कर से बाइक सवार दो युवक की मौत.
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