बिहार में एक करोड़ लोग तनाव के हैं शिकार
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : आधुनिक जीवनशैली और तनाव के इस दौर में राज्य में करीब एक करोड़ लोग के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल की जरूरत है. इनके इलाज के लिए 31 जिलों में मनोरोग विभाग की ओपीडी सेवा शुरू करने की पहल की गयी है. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अन्य जिलों में भी इसे जल्द […]
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पटना : आधुनिक जीवनशैली और तनाव के इस दौर में राज्य में करीब एक करोड़ लोग के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल की जरूरत है. इनके इलाज के लिए 31 जिलों में मनोरोग विभाग की ओपीडी सेवा शुरू करने की पहल की गयी है. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अन्य जिलों में भी इसे जल्द शुरू किया जायेगा. बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान, कोइलवर के निदेशक डाॅ पीके सिंह के अनुसार कुल आबादी में 10 फीसदी लोगों को किसी-न-किसी रूप में मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल की आवश्यकता है.
इस प्रकार के लोगों के आचार, विचार, व्यवहार, सोच और वाणी में परिवर्तन के लक्षण दिखते हैं. ऐसे लोग अपने को भी नहीं संभाल पाते और न ही जिम्मेदारी निभाने में सक्षम होते हैं. चाहे वह शारीरिक बदलाव हो या नौकरी, परिवार और अन्य तरह के दबाव के कारण व्यवहार में आने वाले लोगों को दवा और काउंसेलिंग की आवश्यकता होती है. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत राज्य के बांका, वैशाली, बक्सर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कैमूर, रोहतास, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया और जमुई के जिला अस्पतालों में ओपीडी की सेवाएं शुरू की गयी हैं.
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डाॅ एनके सिन्हा ने बताया कि सरकार द्वारा राज्य के अन्य 20 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य का ओपीडी आरंभ किया जा रहा है.
इनमें गया, भागलपुर, अररिया, बेगूसराय, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, औरंगाबाद, नवादा और मुंगेर जिले शामिल हैं. उन्होंने बताया कि ओपीडी सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. डाॅक्टर व कर्मचारी की नियुक्ति होते ही सभी ओपीडी में आवश्यक दवाएं उपलब्ध करा दी जायेंगी.
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