मौसम की मार : धान की रोपनी लक्ष्य से काफी पीछे, किसान हो रहे परेशान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jul 2019 8:08 AM

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मसौढ़ी : माॅनसून के देर से आने की वजह अनुमंडल क्षेत्र के किसानों की उनकी खेती पर असर देखने को मिल रहा है. अभी तक पूरे अनुमंडल क्षेत्र में मात्र 18 प्रतिशत धान की रोपनी संभव हो पायी है. हालांकि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि अभी समय है और जिस उत्साह […]

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मसौढ़ी : माॅनसून के देर से आने की वजह अनुमंडल क्षेत्र के किसानों की उनकी खेती पर असर देखने को मिल रहा है. अभी तक पूरे अनुमंडल क्षेत्र में मात्र 18 प्रतिशत धान की रोपनी संभव हो पायी है. हालांकि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार का कहना है कि अभी समय है और जिस उत्साह के साथ किसान लगे हैं उससे पूरी उम्मीद है कि शत प्रतिशत धान की रोपनी हो जायेगी. बिक्रम. क्षेत्र धान के कटोरे के रूप विख्यात है. इस बार मौसम की बेरुखी से किसान परेशान दिख रहे हैं.
नहर में पानी सुचारु रूप से मिलने के लिए विधानसभा में भी विधायक सिद्धार्थ सिंह ने भी मांग रखी थी फिर भी जरूरत के अनुसार किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है. कृषि पदाधिकारी मोहनदास ने बताया कि इस वर्ष धान की खेती का लक्ष्य श्री विधि से 192 एकड़, जीरो टेलर विधि से 212 एकड़ व तनाव रोधी से 152 एकड़ रखा गया है, जिसमें लगभग 10 से 12 प्रतिशत धान की रोपनी हो पायी है, यदि वर्षा लगातार तीन चार दिनों हो तो किसान तेजी से धान रोपनी कर लेंगे.
फतुहा. प्रखंड क्षेत्र में अषाढ़ महीने की समाप्ति के बाद भी किसान 25 प्रतिशत ही धान की रोपनी पूरी की है. जिससे धान की पैदावार पर कमी के आसार दिख रहे हैं. हालांकि अषाढ़ महीने के अंत में अच्छी बारिश से धान की रोपनी में तेजी आयी है, लेकिन आगे बारिश की अच्छी संभावना रही तो रोपनी में और तेजी आयेगी और पैदावार ठीक रहेगा.
किसान अभी और बारिश के इंतजार में बिचड़ा को बचाये रखे है, ताकि अच्छी बारिश हो और धान की रोपनी और किया जाये. पालीगंज. अषाढ़ माह समाप्त होने के बावजूद खेतों में पानी नहीं है. जिससे किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं. बारिश नहीं होने से इलाके में धान की रोपनी न के बराबर हुई है. प्रखंड कृषि पदाधिकारी जयंत रजक के मुताबिक प्रखंड क्षेत्र में करीब 10 प्रतिशत धान की रोपनी हो चुकी है.
दुल्हिनबाजार. प्रखंड कृषि पदाधिकारी अनिल कुमार के अनुसार प्रखंड क्षेत्र में सात दिनों पूर्व हुई वर्षा के बाद 2 से 3 प्रतिशत खेतों में धान की रोपण हुई है.
वहीं नहर के बगल स्थित खेतों में छिटपुट तरीके से धान का रोपण हो रहा है. दो दिनों से वर्षा नहीं होने के कारण रोपण कार्य बाधित है व खेतों में नमी समाप्त होने के बाद खेतों की जुताई की जा रही है. किसानों व ग्रामीणों के अनुसार भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चले जाने से नलकूप व पंप सेट से पानी नहीं मिल पा रही है. जिससे रोपण कर पाना असंभव है. वर्षा कम हुई तो इस वर्ष भी सुखाड़ का सामना करना पड़ेगा.
बिहटा. प्रखंड में धीमी गति से धान की रोपनी का कार्य चल रहा है. पिछले पांच दिनों से मौसम का मिजाज बदलने के बाद धान रोपनी का कार्य शुरू हुआ है. प्रखंड कृषि पदाधिकारी मनोज मिश्रा ने बताया कि 16 जुलाई तक प्रखंड में महज 10 प्रतिशत धान की रोपनी हुई है.
बारिश कम होने के कारण धान की रोपनी भी अभी काफी कम हुई है. विलंब से बारिश होने के कारण अभी खेतों को तैयार करने में किसान लगे हैं. कई प्रखंडों में अभी भी खेतों में भरपूर पानी नजर नहीं आ रहा है. किसानों ने बताया कि अबतक 60 प्रतिशत धान की रोपनी होनी चाहिए थी.
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