पटना : सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा़ नियोजित शिक्षकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं

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पटना : सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकोें को नियमित शिक्षकों के समान वेतन नहीं दिये जाने संबंधी अपने फैसले में राज्य सरकार के तर्कों को सही ठहराया है. कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार ने नियोजित शिक्षकों के मौलिक अधिकारों का कोई हनन नहीं किया है. उनके साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है. जस्टिस […]

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पटना : सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकोें को नियमित शिक्षकों के समान वेतन नहीं दिये जाने संबंधी अपने फैसले में राज्य सरकार के तर्कों को सही ठहराया है. कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार ने नियोजित शिक्षकों के मौलिक अधिकारों का कोई हनन नहीं किया है.

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उनके साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है. जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने शुक्रवार को सुनाये गये अपने फैसले में कहा कि हमें यह नहीं लगा कि राज्य सरकार की ओर से इन्हें बोझ समझा गया.

इसलिए कोर्ट यह मानती है कि संसाधनों की कमी भी राज्य सरकार अौर केंद्र सरकार के हलफनामे का एक प्रमुख कारण रहा है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उसे लगता है, पिछले एक दशक में राज्य सरकार ने पूरी जवाबदेही के साथ इस मामले को देखा है और अदालत के समक्ष रखा है. सरकार की बेहतर पहल और नीतियों की वजह से ही प्रदेश में लड़कियों की शिक्षा में बढ़ोतरी हुई, प्रजनन दर में गिरावट आयी और साक्षरता दर भी बढ़ी.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नियोजित शिक्षक कह रहे हैं कि सरकार ने कोर्ट में कमजोर तरीके से उनका पक्ष रखा है. जबकि, कोर्ट को ऐसा नहीं लगता है. कोर्ट ने राज्य सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार ने नियमित शिक्षक और नियोजित शिक्षक का दो अलग-अलग कैडर की बात कही है, वह अदालत को तार्किक जान पड़ता है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमित और नियोजित शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया अलग-अलग है. वेतन का निर्धारण नियुक्ति की प्रक्रिया और नियोक्ता की क्षमता पर निर्भर करता है.

शिक्षा के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने बेहतर कदम उठाये हैं. ऐसा संसाधनों के बेहतर उपयोग से ही संभव है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का नियोजित और नियमित शिक्षकों के अलग-अलग वेतन का निर्णय किसी पैमाने पर गलत नहीं है. राज्य सरकार को दो अलग-अलग कैडर बनाने का अधिकार है.

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