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लोकसभा चुनाव 2019 : पहले चरण में बिहार की चार सीटों पर आज से नामांकन, चारों सीटों पर आमने-सामने होगा मुकाबला

Updated at : 18 Mar 2019 6:13 AM (IST)
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लोकसभा चुनाव 2019 : पहले चरण में बिहार की चार सीटों पर आज से नामांकन, चारों सीटों पर आमने-सामने होगा मुकाबला

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में बिहार की चार सीट नवादा, जमुई सुरक्षित, गया सुरक्षित और औरंगाबाद में दोनों गठबंधनों के बीच आमने-सामने का मुकाबला होने वाला है. औरंगाबाद में भाजपा के सुशील कुमार सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है. उनकी टक्कर कांग्रेस के दिग्गज निखिल कुमार से होने की संभावना […]

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लोकसभा चुनाव के पहले चरण में बिहार की चार सीट नवादा, जमुई सुरक्षित, गया सुरक्षित और औरंगाबाद में दोनों गठबंधनों के बीच आमने-सामने का मुकाबला होने वाला है. औरंगाबाद में भाजपा के सुशील कुमार सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है. उनकी टक्कर कांग्रेस के दिग्गज निखिल कुमार से होने की संभावना है. इसी तरह नवादा में लोजपा की वीणा देवी एनडीए की उम्मीदवार होंगी. उनकी टक्कर राजद उम्मीदवार से होने की संभावना है.

औरंगाबाद लोकसभा

कांग्रेस से भाजपा की होगी सीधी टक्कर
वर्तमान सांसद भाजपा के सुशील कुमार सिंह की सीधी टक्कर कांग्रेस से होने वाली है. सिंह 2009 में भी इसी सीट से सांसद थे,पर पार्टी जदयू थी. 2014 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के निखिल कुमार को हराया था. जदयू उम्मीदवार बागी कुमार वर्मा तीसरे स्थान पर रहे.
यह सीट भाजपा के खाते में जाने से उम्मीदवार बदलने की संभावना कम दिख रही है. सुशील सिंह पिछले चुनाव में 39 फीसदी वोट पाकर विजयी हुए थे. जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाली कांग्रेस को 30 और जदयू को 17 फीसदी वोट मिले थे. अगर इस आधार देखा जाये, तो भाजपा और जदयू का वोट इस बार संयुक्त रूप से एक साथ पड़ना चाहिए. वर्ष 2009 के पहले से यह सीट कांग्रेस की गढ़ रही है. 2004 में निखिल कुमार यहां से जीत चुके हैं. 1999 में निखिल कुमार की पत्नी श्यामा सिंह भी सांसद रही हैं. यहां इस बार भाजपा की सीधी टक्कर कांग्रेस से होगी.
गया लोकसभा

जदयू के प्रत्याशी आजमायेंगे भाग्य
गया लोकसभा सुरक्षित सीट है. यहां से 2009 और 2014 में लगातार भाजपा उम्मीदवार हरि मांझी जीतते रहे हैं. इस बार यह सीट जदयू के खाते में चली गयी है. इस वजह से यहां से एनडीए के उम्मीदवार के रूप में जदयू के विजय मांझी के नाम की संभावना है. पिछले लोकसभा में हरि मांझी को 40 फीसदी वोट मिले थे और उन्होंने राजद के रामजी मांझी को हराया था, जिन्हें 26 फीसदी वोट मिले थे.
जदयू के टिकट पर जीतन राम मांझी चुनाव लड़े थे, जिन्हें महज 16 फीसदी वोट ही मिले थे. इस बार जदयू और भाजपा के एक साथ होने से इनके उम्मीदवार की सीधी लड़ाई राजद के उम्मीदवार से होगी. हालांकि वर्ष 1999 में रामजी मांझी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे. फिर वह राजद में शामिल हो गये. इसके बाद 2004 में राजद के राजेश कुमार मांझी यहां से चुनाव जीते थे.
नवादा लोकसभा

यह सीट अब लोजपा के खाते में
नवादा सीट पर 1996 से 2014 तक छह बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें चार बार भाजपा के उम्मीदवार ही विजयी हुए हैं. सिर्फ 1998 और 2004 में राजद के उम्मीदवार जीते हैं. वर्तमान में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह इसका प्रतिनिधित्व करते हैं. 2014 के चुनाव में गिरिराज सिंह को 44 फीसदी वोट मिले थे. जबकि, दूसरे नंबर पर रहे राजद के राजवल्लभ प्रसाद यादव को 28 फीसदी और जदयू के कौशल यादव को 19 फीसदी वोट मिले थे. इस बार यह सीट लोजपा के खाते में चली गयी है. यह पहला मौका है, जब लोजपा यहां से चुनाव लड़ने जा रही है.
यहां से राजद के पिछले प्रत्याशी राजवल्लभ यादव रेप के मामले में जेल में सजा काट रहे हैं. ऐसे में राजद को नया उम्मीदवार खोजना पड़ेगा. फिर भी यहां लोजपा की सीधी लड़ाई राजद से होनी तय है. एक तरह से देखा जाये, तो यहां से इस बार दोनों पार्टी के उम्मीदवार इस क्षेत्र के लिए नये ही होंगे.

जमुई लोकसभा

लोजपा के पास ही रहेगी यह सीट
यह लोकसभा भी सुरक्षित है. वर्तमान में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लोजपा के सांसद चिराग पासवान कर रहे हैं. इस बार भी यह सीट लोजपा के पास ही है और संभावना पूरी है कि उम्मीदवार भी वहीं होंगे.
पिछले चुनाव में उन्हें 36 फीसदी वोट मिले थे. उन्होंने राजद के सुधांशु कुमार भास्कर को हराया था, जिन्हें 25 फीसदी वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर आप के विनोद कुमार दास रहे थे. जदयू के टिकट पर लड़े उदय नारायण चौधरी नौवें नंबर थे. हालांकि 2014 के पहले यहां से भूदेव चौधरी चुनाव जीते थे. परिसीमन के कारण 1971 के बाद जमुई लोकसभा समाप्त हो गया था.
फिर 2009 में यह क्षेत्र वापस अस्तित्व में आया. इस बार यहां लोजपा की सीधी लड़ाई राजद से होने जा रही है. हालांकि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा नहीं होने से यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह सीट किसके खाते में जायेगी. परंतु संभावना राजद के पास ही रहने की है. एक तरह से देखा जाये, तो 2009 से यहां लगातार एनडीए का ही कब्जा रहा है.
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