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आईआरसीटीसी भी नहीं निकाल सका यात्रियों के खाने से ‘मक्खी, होती है खानापूर्ति, जानें क्‍या कहते हैं अधिकारी

Updated at : 25 May 2018 5:27 AM (IST)
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आईआरसीटीसी भी नहीं निकाल सका यात्रियों के खाने से ‘मक्खी, होती है खानापूर्ति, जानें क्‍या कहते हैं अधिकारी

II प्रभात रंजन II ढाक के तीन पात सिर्फ जुर्माना लगा की जाती है खानापूर्ति पटना : ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता भगवान भरोसे ही है. आईआरसीटीसी की इस व्यवस्था में कई खामियां हैं, जिनके चलते अच्छी-खासी कीमत चुकाने के बाद भी रेलयात्रियों को सड़ा-गला खाना मिल रहा है. हालिया जांच पड़ताल में इस बात […]

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II प्रभात रंजन II
ढाक के तीन पात सिर्फ जुर्माना लगा की जाती है खानापूर्ति
पटना : ट्रेनों में खाने की गुणवत्ता भगवान भरोसे ही है. आईआरसीटीसी की इस व्यवस्था में कई खामियां हैं, जिनके चलते अच्छी-खासी कीमत चुकाने के बाद भी रेलयात्रियों को सड़ा-गला खाना मिल रहा है. हालिया जांच पड़ताल में इस बात की पुष्टि हुई है.
इसके अलावा चलती ट्रेनों में जिस तरह एजेंटों के जरिये खाना बिकवाया जा रहा है, उसमें कम वजन और बासी भोजन की शिकायत मिल रही है, साथ ही पैसा भी रेट से अधिक वसूला जा रहा है. ऐसे भोजन की शिकायत भी नहीं की जा सकती, क्योंकि चलती ट्रेनों में इस तरह का भोजन अधिकृत तौर पर नहीं बेचा जा रहा है.
क्वालिटी में नहीं हो सका सुधार : भारतीय रेलवे में खान-पान सेवाओं पर वर्ष 2016 में कैग की आयी रिपोर्ट में कहा गया था कि प्लेटफॉर्म व ट्रेनों के पेंट्रीकार में बिकने वाला खाना इंसान के खाने लायक नहीं है. इसके बाद रेलवे बोर्ड ने आईआरसीटीसी के सहयोग से क्वालिटी सुधारने का निर्णय लिया.
इसके तहत दानापुर रेलमंडल की कई मुख्य ट्रेनों के पेंट्रीकार का संचालन आईआरसीटीसी कर रही है. साथ ही पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या-एक व 10 पर फूड प्लाजा और प्लेटफॉर्म संख्या-एक पर जन आहार भी इसी के हवाले है. लेकिन, खान-पान की क्वालिटी की स्थिति फिर भी नहीं सुधरी है.
प्लेटफॉर्म के स्टॉल पर बेचे जा रहे गड़बड़ समोसे व सैंडविच
रेलमंडल और जोन के कैटरिंग विभाग ने पिछले एक वर्ष में पटना जंक्शन पर चार-पांच बार छापेमारी की है. यह छापेमारी प्लेटफॉर्म संख्या-एक व 10 स्थित फूड एक्सप्रेस और प्लेटफॉर्म संख्या दो-तीन, चार-पांच के स्टॉल पर की गयी और प्रत्येक छापेमारी में ओवर चार्जिंग, बासी समोसा, खराब रोल मिले.
इस पर पांच हजार व दस हजार रुपया जुर्माना भी लगाया गया. बुधवार को औचक छापेमारी में प्लेटफॉर्म संख्या चार-पांच पर स्थित एक्सप्रेस फूड स्टॉल पर खराब सैंडविच, अनब्रांडेड लीची जूस और 15 रुपये की पानी बोतल 20 रुपये में बेचते पकड़ा गया.
पेंट्रीकार से लगातार मिल रहीं अनब्रांडेड पानी बोतलें
रेलमंडल में आने और गुजरने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, दानापुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस, पाटलिपुत्र-पुणे एक्सप्रेस, पाटलिपुत्र-मुंबई एक्सप्रेस, हावड़ा-अमृतसर मेल, बाड़मेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में जब-जब कैटरिंग विभाग की छापेमारी होती है, तो बड़ी संख्या में अनब्रांडेड पानी की बोतलें बरामद की जाती हैं.
अब तक कार्रवाई नहीं की गयी है. अधिकारी कहते हैं कि कार्रवाई की अनुशंसा की जाती है. लेकिन, कार्रवाई की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को ही है.
जन आहार में मिली एक्सपायरी आईसक्रीम
पटना जंक्शन स्थित जन आहार काउंटर को छह माह पहले आईआरसीटीसी को दिया, ताकि रेल यात्रियों को सस्ता व क्वालिटी खाना मिले. लेकिन छापेमारी के दौरान बेस किचन में गंदगी का ढेर लगा दिखा. वहीं, गंदे लिबास और चप्पल पहने कुक खाना बनाते मिला. फ्रिज में वर्ष 2017 की बनी आईसक्रीम के 16 बड़े पैकेट रखे मिले, जो एक्सपायर थे. इसके साथ ही पानी की हजारों अनब्रांडेड बोतलें बरामद की गयीं.
सिर्फ होती है खानापूर्ति
आईआरसीटीसी द्वारा चयनित एजेंसियों पर रेलवे जोन या रेलमंडल के अधिकारियों को कार्रवाई करने का प्रावधान नहीं है. छापेमारी में अनियमितता मिलती भी है, तो सिर्फ कार्रवाई की अनुशंसा होती है.
बड़ी अनियमितता मिलने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है. यही वजह है कि एक्सप्रेस फूड के स्टॉल पर वर्ष में चार बार ओवर चार्जिंग व निम्न क्वालिटी का खाना मिलने के बाद भी प्लेटफॉर्म पर स्टॉल चल रहे हैं.
ठेकेदार हो चुका है टर्मिनेट
10 माह पहले हावड़ा-दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस की पेंट्रीकार की बिरयानी में छिपकली मिली. रेलयात्री ने इसकी शिकायत रेलमंडल, रेलवे बोर्ड और रेलमंत्री से की.
इस शिकायत को रेलमंत्री ने गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की और अगले दिन ही पेंट्रीकार के ठेकेदार को टर्मिनेट किया गया. इस घटना के बाद भी पेंट्रीकार व स्टॉल की शिकायतें मिलती रही हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं की गयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
पेंट्रीकार या स्टॉल के संचालन को लेकर आईआरसीटीसी के मुख्यालय से एजेंसी चयन की जाती है. रेलवे से कार्रवाई की अनुशंसा होती है, तो हम मुख्यालय को जानकारी देते है. रीजनल ऑफिस को टर्मिनेट करने का अधिकार नहीं है.
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