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RJD महारैली पटना : तेजस्वी का भावुक संबोधन और भविष्य में भाजपा से लड़ने वाले नेता की तलाश

Updated at : 27 Aug 2017 3:09 PM (IST)
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RJD महारैली पटना : तेजस्वी का भावुक संबोधन और भविष्य में भाजपा से लड़ने वाले नेता की तलाश

आशुतोष कुमार पांडेय @ पटना पटना : राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में राजद सुप्रीमो लालू यादव की ओर से आयोजित ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली में जिस तरह से तेजस्वी यादव ने लोगों से भावुक अपील करते हुए अपना संबोधन दिया. उस संबोधन के आईने में बिहार के राजनीतिक जानकार एक भावी राजनेता […]

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आशुतोष कुमार पांडेय @ पटना

पटना : राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में राजद सुप्रीमो लालू यादव की ओर से आयोजित ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली में जिस तरह से तेजस्वी यादव ने लोगों से भावुक अपील करते हुए अपना संबोधन दिया. उस संबोधन के आईने में बिहार के राजनीतिक जानकार एक भावी राजनेता की तलाश कर रहे हैं. तेजस्वी यादव को वैसे भी राजद की कार्यकारिणी बैठक में लालू यादव ने अपने सियासत की विरासत संभालने की बात कही थी. उस दिन के बाद से यह कहा जा रहा था कि राजद के अगले नेतृत्वकर्ता तेजस्वी यादव ही होंगे. पटना की रैली में तेजस्वी यादव के सत्तापक्ष को लेकर तल्ख तेवर ने लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर किया, वहीं बिहार की सियासी फिजां में एक सवाल भी गूंजने लगा कि क्या इस रैली के प्रतिफल के रूप में तेजस्वी यादव एक दमदार नेता बनकर निकलेंगे. वरिष्ठ पत्रकार और बिहार की राजनीति, खासकर राजद को करीब से देखने वाले प्रमोद दत्ता कहते हैं कि रैली में जुटी भीड़ लालू को सुकून देने वाली है, लेकिन बिहार की राजनीति में विकास भी एक बड़ा फैक्टर है, लालू के अपने खास वोटर हैं, वह आज भी साथ हैं और कल भी रहेंगे. हां, राजनीति में हाल में कदम रखने वाले तेजस्वी को एक बड़ा सियासी मंच इस रैली ने जरूर दे दिया है.

तेजस्वी का संबोधन

रैली में लोगों को संबोधित करते हुए तेजस्वी कभी आक्रोशित नजर आये, तो कभी लोगों से भावुक अपील करते दिखे. तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार हमारे अच्छे चाचा नहीं है. महागठबंधन टूटा नहीं है. असली जदयू हमारे अभिभावक शरद यादव चाचा का है. उनको डराया गया कि आप रैली में नहीं जायेंगे. जायेंगे तो आपको निष्कासित कर दिया जायेगा. तेजस्वी ने कहा कि नीतीश सरकार की उलटी गिनती शुरू हो गयी है. तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि नीतीश जी ने कहा था कि संघ मुक्त भारत का निर्माण करना है. आज उन्हीं के साथ वे जुड़ गये है. तेजस्वी ने लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि मेरे अंदर लालू यादव जी का खून है और मैं आज तक आरएसएस-भाजपा से नहीं डरा. तेजस्वी ने कहा कि नीतीश चाचा पीएम उम्मीदवार बन रहे थे, आज क्या हुआ. तेजस्वी ने कहा कि मैं तो एक बहाना था, इन्हें भाजपा के साथ जाना था. इन्हें सृजन घोटाला छुपाना था. तेजस्वी ने कहा कि हमारे और परिवार के सदस्यों के खिलाफ मुकदमा करवाया गया, क्योकि नीतीश जी को भाजपा में जाना था. तेजस्वी का पूरा संबोधन कमोवेश नीतीश कुमार पर ही केंद्रीत रहा. तेजस्वी ने कहा कि भाजपा वालों ने नीतीश जी के डीएनए पर सवाल उठाया था. हमलोगों ने नहीं इसको लेकर सवाल नहीं उठाया. बावजूद इसके आज उन्होंने फिर से भाजपा के साथ मिलकर बिहार में सरकार का गठन कर लिया. तेजस्वी ने हमला तेज करते हुए आगे कहा कि कोई सगा नहीं, जिसको नीतीश जी ने ठगा नहीं.

अपने-अपने तरीके से रैली को देख रहे हैं राजनीतिक पंडित

लालू की इस महारैली से कई बड़े नेताओं का शामिल नहीं होना भी तेजस्वी के लिए स्पेस क्रिएट कर गया. सीताराम येचुरी, मायावती, प्रकाश करात सहित राहुल गांधी और सोनिया का नहीं आना बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार के कर्णधारों के लिए अच्छा साबित हुआ. राजनीति शास्त्र पर पटना विवि से शोध करने वाले मनीष कुमार कहते हैं कि इस महारैली को एंटी एनडीए फ्रंट के लिए खतरा नहीं बताया जा सकता, क्योंकि यह रैली पूरी तरह लालू यादव की अन्य रैलियों की तरह बनकर रह गयी. हां, लोग ज्यादा आये और उन लोगों के बीच तेजस्वी के दमदार संबोधन ने लोगों को प्रभावित करने का काम किया है. महारैली में जुटी भीड़ ने यह जता दिया है कि लालू से जुड़े वोटर आज भी उनके साथ हैं. रैली में आये लोगों का उत्साह और उनका सत्तापक्ष के प्रति आक्रोश देखकर साफ लग रहा है कि लालू के वोटरों का गुस्सा नीतीश कुमार और भाजपा के प्रति उबल रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन वोटरों की तरह एंटी एनडीए फ्रंट में शामिल सभी दलों के नेताओं में भाजपा हटाओ और देश बचाओ को लेकर इसी तरह का गुस्सा दिख रहा है क्या ?

विपक्षी एकता पर सवाल

इस प्रश्न का जवाब साफ है कि नहीं. ऐसी कोई एकता विपक्षी दलों में नहीं दिखती. महारैली में आये लोगों की तरह प्रतिबद्धता सभी विपक्षी दलों में नहीं है. इस रैली में मायावती को भी शामिल होना था. माकपा नेता प्रकाश करात ने यह कहा था कि यह नकारात्मक राजनीति है. इस रैली का सबसे बड़ा आकर्षण मायावती थीं. अगर इनके साथ मायावती आ जाती, तो मुकाबले की स्थिति बनती. पर वह भी नहीं बनी. जानकारों की मानें तो मायावती ने पूरा खेल बिगाड़ दिया और खासकर उत्तर भारत में एकजुट विपक्ष की संभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया. ऊपर से इस रैली से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भी किनारा कर लिया है. सोनिया गांधी का न जाना, राहुल गांधी का न जाना. कांग्रेस जो सबसे बड़ी पार्टी है, उसने भी आईना दिखा दिया है. प्रमोद दत्त कहते हैं कि तेजस्वी का इस महारैली के बाद राजनेता के तौर पर उभरने के कारण वह लोग भी हैं, जो इस रैली में शरीक हुए हैं. उन्होंने कहा कि जो महारैली में शामिल हुए हैं, उनकी राजनीतिक जमीन अब खिसक चुकी है. यूपी सीएम अखिलेश यादव हाशिये पर हैं. बाबू लाल मरांडी महज नकारात्मक राजनीति का ठप्पा लेकर झारखंड तक सिमट गये हैं, ममता बनर्जी और बाकी लोग बस रैली के मंच सजाने भर हैं. इसलिए तेजस्वी को इस महारैली से लाभ जरूर होगा.

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