PhD Holders Protest: आंखों की रोशनी नहीं, लेकिन हौसला है बुलंद, विद्यानंद बोले- मांग नहीं मानी तो तिरंगे के नीचे सीने पर गोली खा लेंगे
प्रभात खबर रिपोर्टर से बातचीत करते विद्यानंद
Bihar Student Protest: पटना में PhD होल्डर्स के लोकभवन मार्च में नालंदा के नेत्रहीन PhD धारक विद्यानंद पासवान ने सबका ध्यान खींचा. आंखों से दुनिया नहीं देख सकते, लेकिन अपने हक की लड़ाई में पूरे हौसले के साथ सड़क पर उतरे हैं. उन्होंने कहा कि वह देख नहीं सकते, लेकिन दुनिया को आईना दिखा सकते हैं.
Bihar Student Protest: पटना में PhD होल्डर्स शनिवार को लोकभवन मार्च के लिए सड़क पर उतरे. आर ब्लॉक चौराहे पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे. सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई. इसी भीड़ में नालंदा के विद्यानंद पासवान भी पहुंचे. वह नेत्रहीन हैं. आंखों से दुनिया नहीं देख सकते. लेकिन अपने हक के लिए सड़क पर उतरने का उनका जुनून हर किसी का ध्यान खींच रहा था.
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विद्यानंद अपने साथियों के सहारे मार्च में आगे बढ़ रहे थे. उनका कहना था कि वह देख नहीं सकते, लेकिन अपनी समस्याओं को अच्छी तरह समझ सकते हैं.
'मैं देख नहीं सकता, लेकिन दुनिया को आईना दिखा सकता हूं'
प्रभात खबर रिपोर्टर राजकमल से बातचीत में विद्यानंद ने कहा, 'हम देख नहीं सकते हैं. लेकिन अपनी समस्याओं को समझ सकते हैं. मैं देख नहीं सकता, लेकिन दुनिया को आईना दिखा सकता हूं.'
उनकी आवाज में संघर्ष साफ नजर आया. उन्होंने बताया कि उन्होंने ब्रेन लिपि के माध्यम से पढ़ाई की है. वर्ष 2024 में उन्होंने PhD पूरी की. विद्यानंद नालंदा के रहने वाले हैं और पटना यूनिवर्सिटी से PhD कर चुके हैं. अब वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
गुलाब लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, कोई व्हीलचेयर पर तो कोई सहारे से
लोकभवन मार्च में प्रदर्शनकारियों का अलग-अलग अंदाज दिखा. कुछ लोग राज्यपाल को देने के लिए गुलाब लेकर पहुंचे थे. वहीं, 19 दिनों से अनशन कर रहे कुमुद पटेल व्हीलचेयर पर प्रदर्शन में पहुंचे. उन्होंने भावुक होते हुए सरकार से मांगें मानने की अपील की.
कुमुद पटेल ने कहा कि सरकार चाहती है कि वह मर जाएं. उन्होंने कहा कि अगर एक कुमुद पटेल मरेगा तो 10 और पैदा होंगे.
बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन को देखते हुए आर ब्लॉक चौराहे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए. प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए डबल लेयर बैरिकेडिंग की गई थी. हालांकि, कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए. कुछ ने उसे तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की. मौके पर तनाव की स्थिति भी बनी रही.
UGC नियम और उम्र सीमा को लेकर विरोध
PhD होल्डर्स प्रोफेसर नियुक्ति में UGC के नियमों का पालन करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा उम्र सीमा बढ़ाने की भी मांग है. प्रदर्शनकारी राज्य सरकार की ओर से लाए जा रहे नए नियमों का भी विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि नए प्रावधानों से PhD होल्डर्स के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं.
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'मांग नहीं मानी तो बलिदान दे देंगे'
विद्यानंद पासवान ने आंदोलन को लेकर कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो वह बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटेंगे.
उन्होंने तिरंगे का जिक्र करते हुए कहा कि वे तिरंगे के नीचे खड़े हैं. उनके शब्दों में संघर्ष और त्याग का भाव साफ दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो सीने पर गोली खाने से भी पीछे नहीं हटेंगे. उनकी बात सुनकर आसपास मौजूद प्रदर्शनकारी भी भावुक नजर आए.
'आंखों से नहीं, हौसले से देख रहे हैं रास्ता'
विद्यानंद की कहानी इस आंदोलन में अलग नजर आई. आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन पढ़ाई के जुनून ने उन्हें PhD तक पहुंचाया. अब वही जुनून उन्हें सड़क पर ले आया है. साथियों के सहारे कदम बढ़ाते हुए विद्यानंद अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं. उनका संदेश साफ है. दृष्टि भले नहीं है, लेकिन अपने भविष्य को लेकर उनका सपना और हौसला पूरी तरह जिंदा है.
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