बिहार में आयकर रिटर्न दाखिल करनेवालों की बढ़ी संख्या, पर नहीं बढ़े करदाता, इतने लोगों ने चुना न्यू टैक्स स्लैब

पिछले साल की तुलना में 1.92 लाख अधिक लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किये.वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 के प्रथम तिमाही यान अप्रैल,मई और जून में आइटीआर भरने वालों की संख्या 4.71 लाख रही है,पिछले साल की इस अवधि में यह संख्या 2.32 लाख थी. जो पिछले साल की तुलना में 1.39 लाख लाख अधिक है.
पटना. इस बार बिहार से आयकर रिटर्न (आइटीआर) दाखिल करने वालों की संख्या, पिछले साल की तुलना में करीब 8% बढ़ी है. इस साल 31 मार्च 2023 तक 24.30 लाख लोगों ने आइटीआर दाखिल किये थे,जबकि 31मार्च 2022 में यह संख्या 22.36 लाख थी. पिछले साल की तुलना में 1.92 लाख अधिक लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किये.वहीं चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 के प्रथम तिमाही यान अप्रैल,मई और जून में आइटीआर भरने वालों की संख्या 4.71 लाख रही है,पिछले साल की इस अवधि में यह संख्या 2.32 लाख थी. जो पिछले साल की तुलना में 1.39 लाख लाख अधिक है.आयकर सूत्रों का कहना है कि जिस अनुपात में आइटीआर दाखिल करने की वालों की संख्या बढ़ी है,उस अनुपात में करदाताओं की संख्या नहीं बढ़ी है. करदाताओं की संख्या में महज 1.98% की ही वृद्धि हुई है.
पड़ोसी राज्यों में आयकर रिटर्न दाखि करने वालों की संख्या
राज्य आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या
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बिहार 24.30 लाख
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झारखंड 11.90 लाख
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ओडिशा 13.90 लाख
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पश्चिम बंगाल 47.90 लाख
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यूपी 75.7 लाख
आयकर भरने वाले देश के टॉप पांच राज्य
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महाराष्ट्र 1.20 करोड़
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गुजरात 75.6 लाख
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यूपी 75.7 लाख
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राजस्थान 50.90 लाख
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तमिलनाडु 47.90 लाख
बिहार में आयकर देने वालों की संख्या 5.60 लाख
बिहार में आयकर देने वाले लोगों की संख्या,राज्य के कुल आबादी का लगभग आधा फीसदी है.वर्ष 2022-23 में बिहार के कुल 22.36 लाख लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किये, जिसमें 16.75लाख लोगों ने अपने रिटर्न में शून्य आयकर देयता दिखाया है. जबकि आयकर देने वालों की संख्या महज 5.60 लाख ही है. राज्य की आबादी को अभी यदि 12 करोड़ माने तो आयकर देने वालों का यह आंकड़ा, राज्य की आबादी का आधा फीसदी के करीब ही होता है. जिसमें अधिकांश सरकारी कर्मी हैं. हालांकि इधर कुछ सालों से राज्य में साल-दर-साल आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले और आयकर देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है. जबकि आयकर देने वालों का राष्ट्रीय आंकड़ा कुल आबादी का करीब दो फीसदी है.
बिहार में आकर रिटर्न भरने वाले, शून्य कर देने वाले और कुल कर देने वालों की संख्या
वर्ष कुल रिटर्न शून्य रिटर्न आयकर देने वाले
लाख लाख लाख
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2022-23 22.36 16.75 5.60
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2021-22 20.11 16.12 3.98
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2020-21 18.96 15.06 3.89
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2019-20 17.19 14.95 3.23
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लोगों को पसंद नहीं आ रहा न्यू टैक्स स्लैब, 95 फीसदी ने पुराना स्लैब को चुना
मुजफ्फरपुर से मिली रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की कोशिश के बावजूद भी आयकर दाता को नया टैक्स स्लैब पसंद नहीं आया. लोगों ने पुराने टैक्स स्लैब में ही अपना रिटर्न दाखिल किया है. ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग प्लेटफार्म क्लियर के एक सर्वेक्षण से पता चला कि केवल 15 फीसदी टैक्सपेयर्स ने ही नई व्यवस्था को चुना, जबकि 85 फीसदी ने अभी भी पुरानी व्यवस्था को पसंद किया है. मुजफ्फरपुर के टैक्स प्रोफेशनल का कहना है कि यहां दो सौ रिटर्न दाखिल हुए हैं तो उसमें से दस फीसदी लोगों ने ही नये स्लैब को चुना है. 90 फीसदी लोगों ने पुराने टैक्स व्यवस्था के तहत अपना रिटर्न दाखिल किया है.
छूट के कारण पुराना स्लैब आ रहा पसंद
बजट 2023 में सात लाख रुपए तक की आय पर टैक्स की छूट शुरुआत की गई है. पुरानी कर व्यवस्था के तहत यह सीमा पांच लाख रुपये है. इसका मतलब यह है कि सात लाख रुपये तक की आय में बिलकुल भी टैक्स नहीं देना होगा. वहीं पुराने टैक्स छूट सीमा तीन लाख है. नयी टैक्स व्यवस्था में वेतन भोगी व्यक्ति को 50 हजार रुपये की मानक कटौती का लाभ देने और परिवार पेंशन से 15 हजार रुपए तक कटौती की गयी है.
पुराना टैक्स स्लैब को अपना रहे आयकरदाता
सीए आदित्य तुलस्यान ने कहा कि अधिकतर आयकर दाता का रिटर्न दस से बीस लाख सालाना है. पुराने टैक्स स्लैब में बचत की बात है. टैक्स भी नये टैक्स स्लैब से कम है. इस कारण अधिकतर आयकर दाता पुराने स्लैब को अपना रहे हैं. इससे लोगों को राहत मिल रही है
मुजफ्फरपुर के रिटर्न में हुआ खुलासा
टैक्सेशन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि पुराने टैक्स स्लैब अधिकतर लोगों की पसंद बन रहा है. मुजफ्फरपुर में अधिकतर लोगों ने पुराने टैक्स स्लैब को चुना है. इस बार के रिटर्न में यह बात सामने आयी है. नया टैक्स स्लैब लोगों को पसंद नहीं आ रहा है.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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