नवादा में बढ़ता ध्वनि प्रदूषण बना चिंता का विषय, प्रेशर हॉर्न और डीजे के शोर से लोग परेशान
वाहनों की कतार
Nawada News : नवादा में अवैध प्रेशर हॉर्न और तेज शोर से ध्वनि प्रदूषण बढ़ा है. प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है.
Nawada News : शहर में ध्वनि प्रदूषण लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है. सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों में अवैध प्रेशर हॉर्न, जगह-जगह डीजे की तेज आवाज, शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों और जनरेटर के शोर से आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है. सबसे अधिक परेशानी अस्पतालों, स्कूलों, आवासीय इलाकों और बाजारों में देखने को मिल रही है. ध्वनि प्रदूषण केवल असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि मानसिक तनाव, अनिद्रा और कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दे रहा है.
प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से बज रहे हैं प्रेशर हॉर्न
मोटर वाहन अधिनियम और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत प्रेशर हॉर्न के उपयोग पर प्रतिबंध है. इसके बावजूद शहर में बस, ट्रक, पिकअप और कई दोपहिया वाहनों में तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न का खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे राहगीरों, बुजुर्गों, बच्चों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
डीजे और जनरेटर का शोर भी बढ़ा रहा परेशानी
शादी-विवाह, जुलूस, धार्मिक कार्यक्रम और अन्य आयोजनों में देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाना आम बात हो गई है. वहीं, बिजली कटौती के दौरान चलने वाले जनरेटर का तेज शोर भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा देता है. कई मामलों में निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज होने के बावजूद शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती.
स्वास्थ्य पर पड़ता है गंभीर प्रभाव
जनरल फिजिशियन डॉ. रवीश कुमार के अनुसार लगातार तेज आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, उच्च रक्तचाप, सिरदर्द और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि 80 से 100 डेसीबल या उससे अधिक तीव्रता की ध्वनि के लंबे समय तक संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है.
नियम तोड़ने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत प्रतिबंधित प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने और निर्धारित ध्वनि मानकों का उल्लंघन करने पर संबंधित वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे मामलों में 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है. आवश्यकता पड़ने पर वाहन जब्त करने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.
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ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है. आम लोगों को भी अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचना चाहिए और धार्मिक, सामाजिक व निजी आयोजनों में निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना चाहिए. साथ ही प्रशासन को नियमित जांच अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. तभी शहर को बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से राहत मिल सकेगी.
जल्द चलेगा विशेष अभियान : परिवहन पदाधिकारी
जिला परिवहन पदाधिकारी रंजीत कुमार ने कहा कि प्रेशर हॉर्न का अवैध इस्तेमाल करने वाले वाहनों के खिलाफ जल्द ही विशेष अभियान चलाया जाएगा. अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया जाएगा और आवश्यकतानुसार अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.
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