कर्मचारी सीखें-समझें

Published at :05 Mar 2014 4:27 AM (IST)
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कर्मचारी सीखें-समझें

नवादा : खरीफ (धान) के मौसम में कम बारिश से धान की उत्पादकता बड़ी समस्या बनी है. इस समस्या से निबटने के लिए एक विकल्प श्री विधि से खेती करना है, जो कम पानी में अधिक उत्पादकता दर्शाता है. साथ ही जैविक खेती के रूप में ढैंचा व मूंग लगायें. इससे खेतों का उर्वरा शक्ति […]

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नवादा : खरीफ (धान) के मौसम में कम बारिश से धान की उत्पादकता बड़ी समस्या बनी है. इस समस्या से निबटने के लिए एक विकल्प श्री विधि से खेती करना है, जो कम पानी में अधिक उत्पादकता दर्शाता है. साथ ही जैविक खेती के रूप में ढैंचा व मूंग लगायें. इससे खेतों का उर्वरा शक्ति बढ़ता है. खेती के संबंध में इस कार्यशाला के माध्यम से किसान सलाहकार व कृषि समन्वयक सीखें-समझें तभी किसानों को लाभ दे सकते हैं. यह बातें डीएम ललन जी ने श्री संस्कृति खरीफ अभियान, 2014 के तहत आयोजित कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान कहीं.

उन्होंने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ दिलाने की जरूरत है. साथ ही खेती के संबंध में तकनीकी जानकारी किसानों को देने का काम करें. जिला कृषि पदाधिकारी विभू विद्यार्थी ने कहा कि खरीफ मौसम में धान की खेती श्री विधि से करने से बीज भी कम लगता है और फसल जल्दी पक कर तैयार हो जाती है.

इससे उत्पादन व उत्पादकता दोनों दोगुना से भी अधिक होता है. उन्होंने बताया कि धान के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए संकर धान से खेती करने की जरूरत है. इसे प्रोत्साहित करने के लिए अनुदानित दर पर सकर धान का बीज वितरण किया जाना है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार कार्यक्रम के तहत धान व अरहर के लिए प्रत्येक राजस्व ग्राम में दो-दो किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया जाना है. डीएओ ने बताया कि बीज ग्राम योजना भी चलाया जा रहा है. इसके तहत प्रत्येक प्रखंडों के 6-6 गांवों में धान, अरहर व उरद फसलों के लिए बीज ग्राम स्थापित किया जायेगा.

प्रत्येक बीज ग्राम में सौ सौ किसानों को आधा एकड़ जमीन में बीज उत्पादन के लिए 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया जाना है. उक्त दोनों योजनाओं से किसान बीज उत्पादन में आत्म निर्भर हो जायेंगे. उन्होंने बताया कि हरी खाद के उपयोग से ढैंचा और मूंग लगायें. उन्होंने कहा कि अप्रैल में ढैंचा लगाएं व जुलाई में यूरिया खेत में ही पायें. सेखोदेवरा के वैज्ञानिक डॉ एसके मिश्र व आबिद हुसैन ने भी कई तरह की महत्वपूर्ण बातें कहीं. मौके पर आत्मा के परियोजना निदेशक अश्वनी कुमार, जिला उद्यान पदाधिकारी शंभु प्रसाद, कनीय पौधा संरक्षक पदाधिकारी मुकेश कुमार सहित सभी बीएओ, किसान सलाहकार व कृषि समन्वयक आदि मौजूद थे.

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