35 देशों के बौद्ध होंगे शामिल

Updated at : 11 Mar 2017 4:10 AM (IST)
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35 देशों के बौद्ध होंगे शामिल

आयोजन. यादगार होगा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में जुटेंगे दुनिया के नामचीन हस्तियां 60 साल बाद बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का पुनर्मुद्रण किया गया नालंदा : 17 मार्च से शुरू होने वाले तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन ऐतिहासिक व यादगार होगा. इस सम्मेलन का उद्घाटन बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा करेंगे. जबकि सम्मेलन का समापन […]

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आयोजन. यादगार होगा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में जुटेंगे दुनिया के नामचीन हस्तियां
60 साल बाद बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का पुनर्मुद्रण किया गया
नालंदा : 17 मार्च से शुरू होने वाले तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन ऐतिहासिक व यादगार होगा. इस सम्मेलन का उद्घाटन बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा करेंगे. जबकि सम्मेलन का समापन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी करेंगे. सम्मेलन में हावर्ड विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय, साउथ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, युगांडा बुद्धिस्ट सेंटर, हांगकांग विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालय के नामचीन विद्वान शामिल होंगे . सम्मेलन के आयोजक नवनालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलपति एमएल श्रीवास्तव ने यह जानकारी शुक्रवार को दी. उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में सिंगापुर,श्रीलंका,ताइवान,रूस,पोलैंड,नार्वे, नेपाल, म्यानमार, मंगोलिया, कंबोडिया, मलेशिया, कजाकिस्तान, इटली, इंडोनेशिया,
हांगकांग,जर्मनी,चेक रिपब्लिक,चीन,बांग्लादेश सहित दुनिया के 35 देशों के बौद्ध विद्वान शामिल होंगे. इनके अलावे बौद्ध भिक्षु करमापा लामा,हॉलीवुड स्टार रिचर्ड गेरे, बुद्धिस्ट राइटर रावर्ट थ्रुमन , इंग्लैंड के डरहम विवि के रार्वट ए-ई कनिंघम,डोनाल्ड ट्रंप, युगांडा बुद्धिस्ट सेंटर के भंते धर्म रक्षित, फोग क्वांग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर छंग वेई ई, वियतनाम विश्वविद्यालय के वाइस रेक्टर न्हात तू शामिल होंगे. कुलपति ने बताया कि पहली बार भारत में उच्च कोटि के बुद्धिस्ट काॅन्फ्रेंस का आयोजन नव नालंदा महाविहार के द्वारा किया गया है. इस तीन दिवसीय सम्मेलन में बुद्धिष्ट विद्वानों के अलावे बौद्धिक समागम भी होगा. इस सम्मेलन को सफल बनाने में भारत सरकार पूरी संजीदगी से काम कर रही है . उन्होंने बताया कि 60 साल बाद नवनालंदा महाविहार के द्वारा बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का पुनर्मुद्रण किया गया है . इसकी दुनिया में बहुत मांग है. ग्रंथ का विमोचन बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा 17 मार्च को करेंगे . दुनिया का सबसे पहला बुद्धिष्ट साइंस फैकल्टी नव नालंदा महाविहार में खुलेगा , जिसका उद्घाटन धर्म गुरु दलाई लामा करेंगे. कुलपति श्रीवास्तव ने बताया कि दलाई लामा 1959 ई. में चीन से ह्वेनसांग की अस्थि कलश लेकर महाविहार आए थे . पुन: वे इसी महाविहार से अस्थिकलश लेकर व्हेनसांग मेमोरियल हॉल जाएंगे .
अस्थि कलश की सुरक्षा व्यवस्था
चीनी बौद्ध विद्वान ह्वेनसांग के अस्थिकलश की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होगी . इसके लिए विश्वविद्यालय ने सुरक्षा की निजी व्यवस्था तो की ही है . सरकार के द्वारा भी इसकी सुरक्षा के लिए कड़े पहरे लगाए गए हैं .कुलपति ने कहा कि बुद्धिज्म राष्ट्रीय अस्मिता से जुड़ी है. बुद्धिज्म में ही सभी समस्याओं का निदान है. सम्मेलन के दौरान प्रत्येक दिन 5 सेमिनार एक साथ चलेंगे. एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें धर्मगुरू और विद्वानों के साथ महत्वपूर्ण डिस्कस होगा.
लाइब्रेरी होगी ऑनलाइन
नवनालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय का ग्रंथागार डिजिटल होगा . इसे ऑनलाइन किया जा रहा है . इसके साथ ही लाइब्रेरी को और समृद्ध बनाया जाएगा . यहा लैंग्वेज लैव की स्थापना होगी. जिसमें सभी विषयों की जानकारी दी जाएगी
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