मुख्यालय में रहें डॉक्टर आदेश. संस्थागत प्रसव को बढ़ाएं
Updated at : 10 Mar 2017 4:28 AM (IST)
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मेजर व माइनर ऑपरेशन में लाएं सुधार बिहारशरीफ : गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य जांच के लिए शुरू किये गये पायलट प्रोजेक्ट ,मिशन स्वस्थ आंचल की सफलता एवं प्रभावशाली को देखते हुए इसे 22 मार्च को बिहार दिवस के अवसर पर पूरे जिले में लागू किया जायेगा. इसके लिए सभी जरूरी तैयारी शुरू कर दी जाये. […]
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मेजर व माइनर ऑपरेशन में लाएं सुधार
बिहारशरीफ : गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य जांच के लिए शुरू किये गये पायलट प्रोजेक्ट ,मिशन स्वस्थ आंचल की सफलता एवं प्रभावशाली को देखते हुए इसे 22 मार्च को बिहार दिवस के अवसर पर पूरे जिले में लागू किया जायेगा. इसके लिए सभी जरूरी तैयारी शुरू कर दी जाये. उक्त निर्देश डीएम डॉ त्यागराजन ने गुरुवार को सदर अस्पताल के सभागार में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षात्मक बैठक में दिया. इसके लिए 16 मार्च तक पंचायत वार माइक्रोप्लान तैयार कर लिया जाय. मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में यह कार्यक्रम काफी प्रभावी है.
अब तक 421 नशेड़ियों का हुआ इलाज
समीक्षा के दौरान डीएम ने पाया कि जिला नशामुक्ति केंद्र में अब तक 421 नशेड़ियों का इलाज हुआ है. डीएम डॉ त्यागराजन ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि एक तीन सदस्यीय टीम बनाकर 10 दिनों में रिपोर्ट दें कि इनलोगों की अभी क्या स्थिति है. साथ ही वे क्या कर रहे हैं.
पांच फीसदी केस की रैंडमली जांच की जाय.जिले के अस्पतालों में बायोमीटरिक हाजिरी की क्या स्थिति है इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनायी गयी. डीएम ने कहा कि इस हाजिरी के आधार पर ही डॉक्टर एवं कर्मियों का वेतन मिलेगा.अगर इसका पालन नहीं किया गया तो उपाधीक्षक व संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों पर ही कार्रवाई होगी. डीएम ने बैठक में इंडोर,आउटडोर,माइनर एवं मेजर ऑपरेशन में भी सुधार लाने को कहा.
जिस क्षेत्र में हुई घटना और अस्पताल में डॉक्टर नहीं हुए तो होगी कार्रवाई
डीएम ने कहा कि शिकायत मिली है कि जिले के बिन्द अस्पताल में डॉक्टर समय पर नहीं जाते हैं. उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि इसकी जांच कर कार्रवाई करें.डीएम ने सभी डॉक्टरों को मुख्यालय में रहने को कहा.उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी क्षेत्र में कोई दुर्घटना हुई एवं संबंधित अस्पताल में डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहे तो विभागीय कार्रवाई के साथ प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.
सभी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव में वृद्धि लाने के लिए उन्होंने सख्त निर्देश दिया.अभी भी 60 फीसदी डिलेवरी ही सरकारी अस्पतालों में ही हो रहा है. घर पर प्रसव कराने के वजह से जिले में वर्ष 2016 में छह नवजातों की टेटनस से मौत हो गयी थी.इसमें घर पर डिलेवरी कराने में रहुई प्रखंड के मामले में किसी एएनएम का भी सहयोग था. लोकल प्रैक्टिशनर की भी भूमिका की बात सामने आई.डीएम ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि उस एएनएम की पहचान कर उसपर कार्रवाई करें तथा नीम हकीम को चिंहित कर एफआईआर दर्ज करायें.
सभी लेखापालों का स्थानांतरण करने का दिया निर्देश
जननी बाल सुरक्षा के लंबित भुगतान को जल्द करने को कहा गया.साथ ही डीएम ने सभी अस्पतालों के लेखापालों का स्थानांतरण करने का सख्त निर्देश दिया.
बंध्याकरण ऑपरेशन पर भी विशेष ध्यान देने की हिदायत डीएम ने दी.सभी कार्यों को मिलाकर तैयार किये गये रैकिंग में बिहारशरीफ सदर,बिन्द एवं नगरनौसा पीएचसी अच्छा तथा करायपरशुराय,थरथरी व हरनौत की स्थिति पीछी पायी गयी.इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ.सुबोध प्रसाद सिंह,एसीएमओ डॉ.ललित मोहन प्रसाद,डीएलओ डॉ.रविन्द्र कुमार,डीपीएम,डीपीआरओ लालबाबू,डॉ.मनोरंजन कुमार,डॉ.शैलेन्द्र कुमार,अनुराग सिन्हा समेत कई सीडीपीओ आदि शामिल थे.
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