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जलापूर्ति केंद्र भी अब तोड़ रहा आस कैसे बुझ पायेगी लोगों की प्यास

Updated at : 03 May 2019 6:41 AM (IST)
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जलापूर्ति केंद्र भी अब तोड़ रहा आस कैसे बुझ पायेगी लोगों की प्यास

बिहारशरीफ : शहर की तेजी से बढ़ रही आबादी की प्यास बुझाने की समस्या विकराल होती जा रही है. भू-गर्भीय जल के बेतहाशा हो रहे दोहन से दिन पर दिन जल स्तर तेजी से खिसकता जा रहा है. इसके कारण जलापूर्ति के लिए गाड़ी गयी बोरिंग बेकार होती जा रही है. भू-गर्भीय जल के दोहन […]

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बिहारशरीफ : शहर की तेजी से बढ़ रही आबादी की प्यास बुझाने की समस्या विकराल होती जा रही है. भू-गर्भीय जल के बेतहाशा हो रहे दोहन से दिन पर दिन जल स्तर तेजी से खिसकता जा रहा है.

इसके कारण जलापूर्ति के लिए गाड़ी गयी बोरिंग बेकार होती जा रही है. भू-गर्भीय जल के दोहन होने और भूमिगत जल के रिचार्ज नहीं होने से स्थिति विस्फोटक होती जा रही है. शहर से लेकर गांव तक यही स्थिति है. भू-गर्भीय जल का पूर्व की अपेक्षा अब पांच गुना से भी अधिक दोहन हो रहा है.
जितनी तेजी से भूमि से जल निकाला जा रहा है, उस अनुपात में अंडर ग्राउंड वाटर रिचार्ज नहीं हो पा रहा है. यही वजह है कि भूमिगत जल का स्तर तेजी से भाग रहा है. पूर्व में वर्षा जल का 30 फीसदी रिचार्ज होता था और अब मात्र आठ से 10 फीसदी ही रिचार्ज हो पाता है, बाकी करीब 90 फीसदी वर्षा का पानी बह जाता है.
सबसे बड़ी बात तो यह है कि दिन-ब-दिन कच्ची भूमि (जमीन) का क्षेत्र भी कम होता जा रहा है. पिछले कई वर्षों से पर्याप्त मात्रा में जिले में बारिश भी नहीं हो पा रही है. जो बारिश होती है, वह भूमि के अंदर नहीं जा पा रही है. शहर से लेकर गांव तक लोग मकान बनाने के साथ ही गहरी बोरिंग करा रहे हैं और उसमें सबमर्सिबल लगाकर दिन-रात भूमिगत जल का दोहन कर रहे हैं.
जलापूर्ति केंद्रों पर प्यास बुझाने की है जिम्मेदारी : भू-गर्भीय जल स्तर के लगातार नीचे जाने से कुएं, तालाब सभी सूखे पड़े हैं. कम गहराई वाले चापाकल व बोरिंग बेकार साबित हो रहे हैं.
अब प्यास बुझाने के लिए एकमात्र सहारा अधिक गहराई वाली बोरिंग ही है. अधिक गहराई वाली बोरिंग कराना आम लोगों की बस की बात नहीं है. इसके कारण आम लोग प्यास बुझाने के लिए सरकारी जलापूर्ति केंद्रों पर आश्रित होते जा रहे हैं. सरकारी जलापूर्ति केंद्रों की स्थिति भी काफी दयनीय है. सरकारी जलापूर्ति केंद्र भी एकाएक फेल होते जा रहे हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में भी 60 से 65 फुट नीचे है पानी : ग्रामीण क्षेत्रों में राजगीर की भूई-लोदी पंचायत में भूमिगत जल का स्तर 55 से 60 फुट नीचे है. वहीं, सिलाव प्रखंड की पांची-गोनावां पंचायत में 57 से 60 फुट नीचे पानी है.
इसी प्रकार बेन प्रखंड की बारा-अरावां पंचायत में भूमिगत जल 60 से 65 फुट नीचे है. गिरियक प्रखंड की गाजीपुर पंचायत में 45-48 फुट नीचे पानी है. वहीं, कतरीसराय प्रखंड की मैरा-बरीठ पंचायत में 48 से 50 फुट नीचे पानी है. इस्लामपुर प्रखंड की सकरी-सूढ़ी पंचायत में भूमिगत पानी 54 से 60 फुट नीचे है.
शहर में जमीन के नीचे पानी मिलना मुश्किल
शहर में भूमिगत जल का स्तर 90 से 100 फुट नीचे चला गया है. शहर में स्थिति यह हो गयी है कि शहर के कई मोहल्लों में जमीन के नीचे पानी नहीं मिल पा रहा है. कई मोहल्लों में जमीन के नीचे 150 से 200 फुट पर पहाड़ मिल जा रहा है, जिसके नीचे बोरिंग करना संभव नहीं हो पा रहा है. शहर के अगल-बगल के गांवों में भूमिगत जल का स्तर 50 से 58 फुट नीचे है.
क्या कहते हैं अधिकारी
शहरवासियों की प्यास बुझाने को नगर निगम हर संभव प्रयास कर रहा है. शहर के जलापूर्ति केंद्रों में राइजर पाइप जोड़कर पाइप की लंबाई बढ़ायी जा रही है. जलापूर्ति केंद्रों में लगी मोटर की शक्ति बढ़ायी जा रही है. शहर के कई वार्डों में नयी बोरिंग की जा रही है. शहर में कहीं से भी पानी की किल्लत की सूचना मिलती है, तो वहां टैंकर के माध्यम से आपूर्ति की जा रही है.
सौरभ जोरेवाल, नगर आयुक्त, बिहारशरीफ
ग्रामीण क्षेत्रों में भू-जल स्तर पर पीएचइडी लगातार नजर रख रही है. विश्व बैंक के सहयोग से जिले में पेयजल की कई योजनाएं चल रही हैं. राजगीर, सिलाव, बिंद आदि जगहों पर बहुग्रामीण पेयजलापूर्ति योजनाएं चल रही हैं. हर घर नल का जल योजना से भी गांव-गांव में पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है. खराब चापाकलों को ठीक करने के लिए टीमें बनायी गयी हैं.
मनोज कुमार, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी
पानी की कमी का पशुओं पर दिख रहा असर
भू-जल का स्तर खिसकने के कारण सबसे बुरा प्रभाव पशु-पक्षियों पर दिख रहा है. तालाब, कुएं, चापाकल सभी सूख के जाने से इस भीषण गर्मी में न तो उनकी प्यास बूझ पा रही है और न नहाने का पानी मिल पा रहा है. लोगों को पीने के पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है. ऐसे में लोग पशुओं के लिए जैसे-तैसे पानी का इंतजाम कर रहे हैं.
शहर के 18 मोहल्लों में टैंकर से हुई पेयजल की आपूर्ति
शहर में पेयजल की किल्लत को देखते हुए नगर निगम द्वारा 18 मोहल्लों में पेयजल की आपूर्ति की गयी. इसकी जानकारी देते हुए नगर आयुक्त सौरभ जोरेवाल ने बताया कि शहर के हाजीपुर, गढ़पर, सालूगंज, कमरुद्दीनगंज, कासी तकिया, पैठान टोला, नालंदा कॉलोनी, सुंदरगढ़, गगन दीवान, नयीसराय, चूड़ीचक, खासगंज, मंसूर नगर, मिरदाद, मदरसा गली, मोहद्दीनगर, खंचिया गली, कागजी मोहल्ला आदि में टैंकर से पेयजल की आपूर्ति की गयी.
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