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संवाद : स्वयं व परिवार के साथ-साथ समाज और प्रकृति के प्रति भी है युवाओं की जबावदेही

Updated at : 12 Jan 2025 1:56 AM (IST)
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संवाद : स्वयं व परिवार के साथ-साथ समाज और प्रकृति के प्रति भी है युवाओं की जबावदेही

संवाद : स्वयं व परिवार के साथ-साथ समाज और प्रकृति के प्रति भी है युवाओं की जबावदेही

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-प्रभात खबर कार्यालय में राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संध्या पर संवाद का किया गया आयोजन

मुजफ्फरपुर.

स्वामी विवेकानंद की जयंती सह राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संख्या पर प्रभात खबर कार्यालय में शनिवार को संवाद का आयोजन किया गया. इसमें विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया. युवाओं ने स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता हमेशा कायम रहने और उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने की बात कही. कहा कि हमारा देश सबसे अधिक युवाओं वाला देश है, लेकिन युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में नहीं लग रही है. हम सिर्फ जॉब के पीछे भाग रहे हैं. हम अपने तक सीमित हाेकर रह जाते हैं.

युवाओं की जबावदेही स्वयं और अपने परिवार के साथ-साथ समाज, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से लेकर परंपराओं और अपनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार की भी है. स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपनी भाषा में संबोधन किया था, लेकिन हम अपनी भाषा को अपनाने में संकोच करते हैं. युवाओं ने डिजिटल लिट्रेसी को लेकर भी बातचीत की. कहा कि युवाओं का अधिकतर समय डिजिटल माध्यमों के साथ बीत रहा है. तकनीक वर्तमान समय की जरूरत है, लेकिन अल्प ज्ञान के कारण हम अति आत्मविश्वास में आ जाते हैं और इसके थ्रेट से अनजान हो जाते हैं. इसका दुष्परिणाम भी भुगतना होता है.

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम

बिहार में युवाओं की संख्या सबसे अधिक है. हम इसे एसेट नहीं लैबलिटी के तौर पर देखते हैं. यदि हम इसे सकारात्मक रूप में लेकर आगे बढ़ें तो राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सकते हैं. युवाओं को डिजिटल लिट्रेसी के लिए आगे आना होगा. वीरभद्र आर्य, छात्र

बिना जानकारी डिजिटल को अपनाना पड़ रहा भारी

तकनीक की जानकारी बिना ही उसे अपनाना भारी पड़ रहा है. ऐसे में युवाओं को चाहिए कि वे गलत सूचनाओं, अफवाह और डिजिटली लोगों को साक्षर बनाने के लिए आगे आएं. डिजिटल में क्या सही है और क्या गलत इसकी पहचान बेहद जरूरी है. साकिब सफील, छात्र

अपनी परंपरा को साथ लेकर चलें युवा

स्वामी विवेकानंद ने अपनी अंतरराष्ट्रीय पटल पर ऐसी छाप छोड़ी जो अमिट हो गया. युवाओं को भी चाहिए कि अपनी संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण में भूमिका निभाएं. इसपर निरंतर शोध होते रहना चाहिए.

कार्तिक पांडेय, छात्र

थोड़ी सी असफलता में हो जाते हैं विचलित

कहा जाता है कि युवाओं में सबसे अधिक ऊर्जा होती है. इसके बाद भी वर्तमान में युवा थोड़ी सी असफलता को नहीं झेल पाते. वे विचलित होकर गलत कदम उठा लेते हैं. युवाओं को जोश, जूनून के साथ सही दिशा में बढ़ना चाहिए.

सुशांत सिंह, छात्र

संसाधन का होना चाहिए सही इस्तेमाल

डिजिटल डिवाइस के रूप में युवाओं के पास एक एसेट मौजूद है, लेकिन इसका सही दिशा में उपयोग किया जाना चाहिए. यदि सीमित और सही दिशा में इस विधा का इस्तेमाल हो तो इसके सकारात्मक असर भी दिखेंगे.

– प्रेरणा मिश्रा, छात्रा

डिजिटल प्लेटफाॅर्म के प्रति लिट्रेसी जरूरी

डिजिटल प्लेटफाॅर्म वर्तमान समय की नीड है, लेकिन इसके लिए साक्षरता का अभाव है. हमें देखादेखी इसका उपयोग करने से बचना चाहिए. अधूरी जानकारी होने के कारण हम इसके जाल में फंसते चले जाते हैं.

– पायल कौशिक, छात्रा

अपने क्षेत्र में बेस्ट देने की होनी चाहिए कोशिश

वर्तमान में भारत में सबसे अधिक युवा हैं. हमने चांद तक का सफर पूरा किया है और दुनिया भर की नजरें हमारी ओर हैं. ऐसे में युवाओं को चाहिए कि वे जिस क्षेत्र में हों वहां बेस्ट देने की कोशिश करें. अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझें. निकिता कुमारी, छात्रा

सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं युवा

युवा देश की रीढ़ की हड्डी समान हैं. ये किसी भी क्षेत्र में परिवर्तन ला सकते हैं. युवाओं को सही दिशा और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना होगा. हम विकासशील से विकसित देश बनने की ओर अग्रसर हैं. इसमें युवाओं की भूमिका अहम है. शुभ्रा लक्ष्मी, छात्रा

सिर्फ पढ़ें ही नहीं, उसे जीवन में उतारें भी

हम स्वामी विवेकानंद जैसे महान पुरुषों की जीवनी को सिर्फ पढ़ें नहीं बल्कि उसे अपने जीवन में भी उतारने की कोशिश करें. युवा अपनी शक्ति नहीं पहचान पा रहे हैं. डिजिटल माध्यम से सही इस्तेमाल तभी होगा जब हमें इसकी जानकारी होगी. दिव्यलता, छात्रा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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