चाय बेचने वाले का बेटा बना असिस्टेंट कमांडेंट, गरीब बाप के लाल ने रचा इतिहास

Updated:
विज्ञापन

रिजल्ट आने के बाद जश्न मनाते घनश्याम और उनके परिजन (फाइल फोटो)

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

चाय बेचने वाले के बेटे घनश्याम जायसवाल ने UPSC परीक्षा में असिस्टेंट कमांडेंट बनकर सफलता हासिल की है. जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी.

विज्ञापन

सक्सेस स्टोरी: मुजफ्फरपुर के बैरिया निवासी घनश्याम जायसवाल ने सीमित संसाधनों के बीच मेहनत और लगातार तैयारी के दम पर UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की है. उनका चयन असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर हुआ है. घनश्याम के पिता बैरिया बस स्टैंड पर चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाते हैं, जबकि मां गृहिणी हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद घनश्याम ने बड़े लक्ष्य को छोड़ा नहीं और करीब 5-6 वर्षों तक लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे. घनश्याम की सफलता की कहानी सभी युवाओं और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणादायक है. बता दें, अगस्त 2026 के महीने में UPSC ने CAPF का रिजल्ट घोषित किया था.

विज्ञापन

IIT-JEE में नहीं मिली सफलता, फिर चुना UPSC का रास्ता

घनश्याम ने 12वीं की पढ़ाई के दौरान IIT-JEE की परीक्षा दी थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. इस असफलता से उन्होंने हार मानने के बजाय अपना लक्ष्य बदलकर UPSC की तैयारी शुरू कर दी. इसके बाद कई वर्षों तक उन्होंने नियमित रूप से पढ़ाई जारी रखी.

उनकी शुरुआती पढ़ाई बैरिया स्थित नथुनी भगत विद्यालय से हुई. इसके बाद रामेश्वर सिंह कॉलेज, मुजफ्फरपुर से साइंस विषय में 12वीं की पढ़ाई पूरी की. आगे उन्होंने राजनीति विज्ञान से ऑनर्स में स्नातक किया.

पिता की दुकान पर भी बंटाते थे हाथ

UPSC की तैयारी के दौरान घनश्याम ने पढ़ाई के साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी समझा. जरूरत पड़ने पर वह पिता की चाय-नाश्ते की दुकान पर भी हाथ बंटाते थे. दुकान की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा.

घनश्याम के मुताबिक पिछले 5-6 वर्षों में उन्होंने औसतन रोजाना 9 से 10 घंटे पढ़ाई की. रात में करीब 12 से 1 बजे तक पढ़ने के बाद सुबह उठकर कुछ बच्चों को पढ़ाते थे और फिर अपनी तैयारी में जुट जाते थे.

निरंतरता को बताया सफलता का मंत्र

घनश्याम का कहना है कि UPSC जैसी परीक्षा की तैयारी में सबसे जरूरी चीज निरंतरता है. उनके मुताबिक लंबे समय तक बिना रुके तैयारी करते रहना उनकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा.

वह UPSC अभ्यर्थियों को सबसे पहले बेसिक्स मजबूत करने की सलाह देते हैं. इसके लिए NCERT की किताबों को खुद पढ़ने और अपने हाथ से नोट्स तैयार करने पर जोर देते हैं. उनका मानना है कि खुद बनाए गए नोट्स से विषय को समझने और परीक्षा के समय रिवीजन करने में आसानी होती है.

पिता बोले- कभी पढ़ाई नहीं रोकने दी

घनश्याम के पिता शत्रुधन शाह का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन उन्होंने बेटे की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया. चाय-नाश्ते की दुकान से होने वाली आमदनी से परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बेटे की पढ़ाई जारी रखी.

UPSC में और बेहतर रैंक का लक्ष्य

असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर चयन के बाद भी घनश्याम ने अपनी तैयारी जारी रखने की बात कही है. उनका लक्ष्य अगले साल फिर UPSC परीक्षा में शामिल होकर इससे बेहतर रैंक हासिल करना और भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी संभालना है.

घनश्याम की कहानी पढ़ाई के साथ परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए लगातार मेहनत करने की मिसाल पेश करती है. असफलता के बाद लक्ष्य बदलने के बजाय उन्होंने लंबी तैयारी का रास्ता चुना और आखिरकार UPSC में चयन हासिल किया.

यह भी पढे़ं:

3 बार प्रीलिम्स में फेल, चौथे बार में बनीं IAS अधिकारी, मुजफ्फरपुर की बिटिया ने रचा इतिहास

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन