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महिला पुलिसकर्मी बेफिक्र कर सकेंगी ड्यूटी, छोटे बच्चे पालना घर में खेलेंगे

Updated at : 08 Aug 2024 10:50 PM (IST)
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महिला पुलिसकर्मी बेफिक्र कर सकेंगी ड्यूटी, छोटे बच्चे पालना घर में खेलेंगे

महिला पुलिसकर्मी बेफिक्र कर सकेंगी ड्यूटी, छोटे बच्चे पालना घर में खेलेंगे

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-पुलिस लाइन में छह लाख से हो रहा निर्माण, 15 को होगा उद्घाटन-छह साल की उम्र से कम बच्चों को ड्यूटी के दौरान रखा जा सकेगा -महिला कर्मियों को अब बच्चे की देखभाल की नहीं सताएगी चिंता मुजफ्फरपुर. जिला पुलिस में तैनात महिला पुलिसकर्मी व पदाधिकारी को ड्यूटी के दौरान छोटे बच्चों की देखभाल की टेंशन नहीं रहेगी. पुलिसलाइन में छह लाख से बच्चों की देखभाल के लिए पालना घर बनाया जा रहा है. दो कमरों में यह पालना घर चलेगा. 15 अगस्त को झंडोत्तोलन के बाद डीएम सुब्रत कुमार सेन व एसएसपी राकेश कुमार घर का उद्घाटन करेंगे. घर में छह साल की उम्र के नीचे के बच्चों को रखा जाएगा. उनकी निगरानी के लिए दो महिला क्रेच वर्कर व सहायक क्रेच वर्कर की तैनाती की जाएगी. सीसीटीवी से निगरानी रखी जाएगी. नगर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी टू विनीता सिन्हा को पालना घर का नोडल ऑफिसर बनाया है. घर में बच्चों के अनुरूप माहौल रहेगा. कमरे की दीवारों पर बच्चों की पेंटिंग लगायी जाएगी. कमरे में फर्श पर मैट बिछाया जाएगा. बच्चों के पढ़ाई से लेकर उनके खेलने व मनोरंजन का हर सामान यहां मौजूद रहेगी. इसमें झूला, खिलौना, पढ़ाई के लिए वॉल पोस्टर, बच्चों को दूध गर्म करके देने लिए गैस चूल्हा व बर्तन की व्यवस्था रहेगी. ——- अब तक 35 महिला पुलिसकर्मियों ने कराया है रजिस्ट्रेशन पालना घर में अपने छह साल से कम उम्र के बच्चों को रखने के लिए अब तक 35 महिला पुलिसकर्मी व पदाधिकारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. उद्घाटन के बाद इसकी संख्या और तेजी से बढ़ सकती है. पुलिस की नौकरी में टाइम बांड तय नहीं है. कभी-कभी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या होने पर ड्यूटी टाइम अधिक हाे जाता है. अब पालना घर के शुरू होते ही महिला कर्मी बच्चों की टेंशन लिए बिना ही ड्यूटी कर सकेंगी. — – सेंट्रल जेल के पालना घर में आधा दर्जन बच्चों की देखरेख :: शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा में भी पिछले माह पालना घर की शुरुआत हुई थी. एक माह में आधा दर्जन जेल की महिला कर्मचारी व अधिकारी के छह साल के नीचे के बच्चे का रजिस्ट्रेशन हुआ है. ड्यूटी आते समय वे अपने बच्चे को पालना घर में छोड़ देती हैं . फिर, वापस जाते समय अपने बच्चों को साथ ले जाती हैं. इससे पूर्व समाहरणालय में भी जिला प्रशासन ने पालना घर बनवाया है. इसका मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया था.

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